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आश्रित कोटे में अर्दली का बेटा बाबू तो सिपाही का बेटा बना दारोगा, योग्यता के मुताबिक मिली नौकरी

Sat, 20 Feb 2021 08:21 PM IST
vivek shukla शोभित कुमार पांडेय, संतकबीरनगर।
शोभित कुमार पांडेय, संतकबीरनगर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 20 Feb 2021 08:21 PM IST
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Job in dependent quota according to merit in sant kabir nagar
बाएं हिमांशु और दाएं सूरज कुमार चौधरी। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।

अनुकंपा पर नौकरी हासिल करने में परेशानी भले ही झेलनी पड़ी लेकिन योग्यता को ही तरजीह मिली। अर्दली के बेटे को जहां बाबू पद पर नौकरी मिली, वहीं पुलिस महकमे के मुख्य आरक्षी और आरक्षी के बेटे-बेटी को दरोगा पद पर नौकरी मिली।

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उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के कोतवाली क्षेत्र के छबिलहाखोर निवासी लालचंद गिरी डीएम के अर्दली थे। 14 अप्रैल 2019 को उनकी हार्टअटैक से मौत हो गई। उनके दो बेटे और तीन बेटियां है। आश्रित कोटे में बड़े बेटे हिमांशु गिरी ने नौकरी पाने के लिए आवेदन किया। तत्कालीन डीएम रवीश गुप्त ने वर्ष 2020 में हिमांशु गिरी को आश्रित कोटे में बाबू पद पर नौकरी दी।
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हिमांशु गिरी ने बताया कि वह स्नातक हैं। बड़े भाई दिपांशु गिरी ट्रांसपोर्ट का काम करते हैं। जबकि दो बहनों की शादी हो गई है। प्रशासन ने योग्यता को तरजीह देते हुए उन्हें बाबू पद पर नौकरी दी। कलेक्ट्रेट के रिकॉर्ड रूम में उनकी तैनाती है।
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श्रावस्ती जिले के इकौना थाना क्षेत्र के मध्यनगर मनोहरपुर निवासी अलखराम चौधरी संतकबीरनगर जिले के धर्मसिंहवा थाने पर हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात थे। 19 मई 2016 को बीमारी से उनकी मौत हो गई। उनके दो बेटे और तीन बेटियां है। स्नातक तक पढ़ाई करने वाले उनके बड़े बेटे सूरज कुमार चौधरी ने आश्रित कोटे में दारोगा पद के लिए आवेदन किया।

 

सूरज कुमार चौधरी ने बताया कि वैसे तो वर्ष 2019 में उन्हें दारोगा पद पर नौकरी मिली लेकिन कोर्ट तक दरवाजा खटखटना पड़ा था। नई नियमावली के तहत परीक्षा हुई। वर्तमान में आजमगढ़ के सिधारीपुर थाने में उनकी तैनाती है। इसी तरह देवरिया जिले के सलेमपुर क्षेत्र के पडरी तिवारी निवासी बुद्घिराम यादव धनघटा थाने में एचसीपी थे। वर्ष 2017 में ब्रेन हेमरेज से उनकी मौत हो गई। उनके दो बेटे हैं। बड़े बेटे सुनील कुमार यादव बीए, बीएड हैं। बड़े बेटे सुनील कुमार यादव को आश्रित कोटे में दारोगा पद पर नौकरी मिली।

सुनील कुमार यादव ने बताया कि पुराने नियमावली में 35 मिनट में पांच किलोमीटर की दौड़ लगानी थी लेकिन उन्हें नई नियमावली के तहत 28 मिनट में पांच किलोमीटर की दौड़ लगानी पड़ी। सभी परीक्षाएं उत्तीर्ण करने के बाद ही दरोगा पद पर नौकरी मिली। वर्तमान में लखनऊ के अलीगंज थाने में तैनाती है।

कुशीनगर के तुर्कपट्टी क्षेत्र के तिरमासाहुन निवासी विजय प्रताप मिश्र को भी दारोगा पद पर नौकरी मिली है। उनके पिता देवकीनंद मिश्र सिपाही के पद पर संतकबीरनगर में तैनात थे। वर्ष 2016 में सिपाही देवकीनंदन मिश्र की मृत्यु हो गई। आश्रित कोटे में बेटे विजय प्रताप मिश्र दारोगा पद पर भर्ती हुए और वर्तमान में लखनऊ के महानगर थाने में उनकी तैनाती है।

गोंडा जनपद के कोतवाली देहात क्षेत्र के पुरेहेमराज शुकुलपुरवा निवासी रामकृपाल शुक्ला संतकबीरनगर में सिपाही थे। 14 सितंबर 2011 में उनकी मौत हो गई। उनकी बेटी लक्ष्मी शुक्ला ने 30 जून 2016 और फिर 12 अगस्त 2016 को आश्रित कोटे में नौकरी के लिए आवेदन किया। विभाग ने बेटी लक्ष्मी शुक्ला को दारोगा पद पर नौकरी दी।

एसपी डॉक्टर कौस्तुभ ने कहा कि वर्ष 2019 में चार आश्रितों को योग्यता के आधार पर विभाग में दारोगा पद पर नौकरी मिली। जबकि उनके पिता की सिपाही और मुख्य आरक्षी पद पर तैनाती के दौरान मृत्यु हुई थी। अभी आश्रितों की 15 पत्रावलियां पेडिंग है। इसमें पांच पत्रावलियां पूर्ण हो गई है और उन्हें पीएचक्यू (पुलिस मुख्यालय) प्रयागराज भेजा जा रहा है। जबकि दस पत्रावलियों में किसी आश्रित की आयु पूरी नहीं है तो कोई आश्रित स्नातक की पढ़ाई पूर्ण करने के बाद दरोगा पद पर नौकरी के लिए आवेदन करने की जानकारी दी है। जैसे ही उनकी ओर से आवेदन किया जाएगा उनकी पत्रावलियों को पूर्ण करा कर पीएचक्यू भेजा जाएगा।

 
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