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जलकल विभाग: शिकायत हुई तो ही पता चलता है कि आपूर्ति है ठप, महेवा मंडी के 10 हजार लोग झेल रहे परेशानी

Sun, 19 Jul 2020 11:45 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Sun, 19 Jul 2020 11:45 AM IST
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jalkal vibhag if complaining it is revealed that supply is closed
सांकेतिक तस्वीर।

गोरखपुर शहर में जलापूर्ति आवश्यक सेवाओं में आती है लेकिन जलकल विभाग का सूचना तंत्र ऐसा है कि अगर कोई आम आदमी न बताए तो विभाग को सप्लाई बाधित होने की जानकारी ही नहीं हो पाती है। जानकारी मिल गई तो इसे दुरुस्त करने में जलकल विभाग को दो से तीन दिन लग जाते हैं। यह तब है जबकि सिटीजन चार्टर के अनुसार पानी की आपूर्ति में आई गड़बड़ी को एक दिन में ठीक करने का प्रावधान है। इसके बाद इसमें काफी लापरवाही बरती जाती है। कई बार इसके लिए विभिन्न इलाके के पार्षद आपत्ति जता चुके हैं।

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पार्षद बेतियाहाता विश्वजीत त्रिपाठी ने बताया कि वार्ड के एक मोहल्ले में गंदे पानी की सप्लाई आ रही थी। संचारी रोग के कार्यक्रम में पहुंचे नगर आयुक्त को इसकी जानकारी भी दी गई। उन्होंने जलकल जीएम को तत्काल इसे ठीक कराने का निर्देश दिया, लेकिन उस दिन इसे दुरुस्त नहीं किया जा सका।
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पार्षद झरना टोला संध्या गुप्ता ने बताया कि वार्ड में लगाया गया एक ट्यूबवेल का मोटर जल गया। जलकल के अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई। इसके बावजूद चार दिनों बाद इसे दुरुस्त किया गया। जलकल विभाग की कार्यप्रणाली बहुत ही खराब हो गई है।
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जलकल सहायक अभियंता एसके श्रीवास्तव ने बताया कि पार्षद या क्षेत्र के लोगों के माध्यम से पानी की आपूर्ति के संबंध में शिकायत आती है। तत्काल उसे दुरुस्त करने की कोशिश होती है। रुस्तमपुर में पानी की आपूर्ति में गड़बड़ी की जानकारी नहीं है। इसे पता करके जल्द दुरुस्त कर दिया जाएगा। लोगों से अपील है कि अगर पानी की आपूर्ति में कहीं कोई दिक्कत आती है तो नगर निगम के शिकायती नंबर पर इसकी जानकारी दें।

नगर निगम संबंधी किसी दिक्कत होने पर यहां करें शिकायत:: मोबाइल नंबर 7311180390, 0551-2200450

पेयजल संकट: महेवा मंडी के 10 हजार प्रभावित

पूर्वांचल की बड़ी मंडियों में शुमार महेवा स्थित फलमंडी के 10 हजार लोगों के समक्ष पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। यहां करीब दो महीने से पानी की सप्लाई ठप है। गल्ला मंडी में स्थित बोरिंग के बैठ जाने के कारण सप्लाई ही नहीं हो रही है। मछली मंडी स्थित वैकल्पिक बोरिंग को राहत के लिए कुछ घंटे चलाया तो जा रहा है लेकिन यह नाकाफी है। उससे सिर्फ मछली मंडी में ही सप्लाई हो पा रही है और गंदा पानी भी आता है।

नवीन मंडी के व्यापारियों का कहना है कि मंडी में एक हैंडपंप है। वह भी करीब सौ मीटर दूरी पर है। मजबूरी में दिन में कई बार बाल्टी से पानी भरकर लाना पड़ता है। बताया कि आलू मंडी में एक ही नल होने के कारण यहां लोगों की लाइन लगी रहती है। मंडी के अन्य हिस्सों में भी यहीं हाल है। ठेले वाले, पल्लेदार और बाहर से आए लोगों के पास उमस भरी गर्मी में नल का पानी पीने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है।
दस हजार लोग प्रतिदिन पहुंचते हैं

महेवा मंडी में हर दिन औसतन 10 हजार लोग पहुंचते हैं। आलू-प्याज मंडी, सब्जी-फल मंडी, गल्ला मंडी और मछली मंडी मिलाकर करीब एक हजार दुकानें हैं। हर दुकान पर आढ़ती के साथ ही दो-तीन पल्लेदार भी रहते हैं। महेवा मंडी में सैकड़ों गाड़ियां प्रतिदिन विभिन्न जगहों से सामान लेकर आती हैं। इसके अलावा थोक व खुदरा व्यापारी भी पहुंचते हैं। उन्हेें पानी के लिए भटकना पड़ता है।

बजट के अभाव में नई बोरिंग का काम लटका

अध्यक्ष फल सब्जी विक्रेता एसोसिएशन अवध गुप्ता ने बताया कि मंडी में बजट के अभाव की वजह से नई बोरिंग का काम अटका पड़ा हुआ है। इसे बनाने के लिए करीब 20 लाख रुपये की जरूरत है। लेकिन इसमें अभी भी समय लग रहा है। मंडी प्रशासन का दावा है कि मछली मंडी की वैकल्पिक बोरिंग से सप्लाई पहले की तरह सामान्य कर दी गई है। वहीं आढ़तियों का कहना है कि नई बोरिंग के बिना यह संभव ही नहीं है।
पल्लेदार, ठेले वाले, ट्रांसपोर्ट वाले टोटी का ही पानी पीते हैं। नहाना, खाना, बर्तन और कपड़े धोना भी उसी पानी से होता है। बोरिंग बैठ जाने से दिक्कत हो रही है।

मंडी डीडीई रविंद्र कुमार सिंह ने बताया कि नई बोरिंग के लिए प्रस्ताव पहले ही भेजा गया है। उसकी स्वीकृति मिल चुकी है। टेंडर प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही मंडी में बोरिंग का काम शुरू कर दिया जाएगा।
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