फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Jaggery based sweets from Kushinagar, Chuda Matar from Maharajganj, Puwa and Bakhir from Deoria are also proposed.

Gorakhpur News: गोरखपुर के दाल पीठा, घाठी और तीसी का लड्डू को मिलेगी राष्ट्रीय ख्याति

Thu, 19 Feb 2026 02:31 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 19 Feb 2026 02:31 AM IST
विज्ञापन
Jaggery based sweets from Kushinagar, Chuda Matar from Maharajganj, Puwa and Bakhir from Deoria are also proposed.
गोरखपुर। जनपद के पारंपरिक व्यंजनों को राष्ट्रीय ख्याति मिलेगी। शासन की ओर से ओडीओसी के लिए गोरखपुर मंडल के पारंपरिक व्यंजनों के चयन की जिम्मेदारी दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय को दी गई है। डीडीयू प्रशासन ने व्यंजनों का चयन किया है। इसके तहत गोरखपुर का दाल-पीठा, घाठी, तीसी का लड्डू जैसे व्यंजनों का प्रस्ताव तैयार किया है।
विज्ञापन

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से एक जनपद-एक व्यंजन शुरू किए जाने की योजना बनाई गई है। इसके लिए आईआईटी कानपुर के मार्गदर्शन में ओडीओसी को लेकर योजना को मुकम्मल रूप दिए जाने की कोशिश की जा रही है। उत्तर प्रदेश के 20 राज्य विश्वविद्यालयों को अपने-अपने कार्यक्षेत्र में पारंपरिक व्यंजनों को चिह्नित करने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसमें डीडीयू को गोरखपुर मंडल के चारों जनपदों के ऐसे पारंपरिक व्यंजन चुनने थे, जिनका ऐतिहासिक महत्व है और मार्केटिंग भी की जा सके।
विज्ञापन

डीडीयू की ओर से प्रो. दिव्या रानी सिंह के नेतृत्व में बनाए गए नोडल केंद्र ने ऐसे व्यंजनों का चयन किया है, जिनकी पैकेजिंग और मार्केटिंग की जा सके। सभी जिलों से तीन से पांच व्यंजनों के नाम कानपुर भेज दिए गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

ओडीओसी के तहत देवरिया का पुआ और बखीर, कुशीनगर के गुड़ आधारित मिठाई और महराजगंज का चूड़ा मटर भी प्रस्तावित किया गया है। इन व्यंजनों के संरक्षण एवं ब्रांडिंग के साथ उद्यमिता एवं स्वरोजगार से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। पारंपरिक व्यंजनों का वैज्ञानिक मानकीकरण, रेसिपी दस्तावेज एवं प्रकाशन, प्रशिक्षण एवं कार्यशालाएं, स्टार्टअप मॉडल विकास, ई-कॉमर्स एवं ब्रांडिंग रणनीति, जीआई टैग की संभावनाओं पर काम करना है, जिससे पूर्वांचल के इन व्यंजनों की पहचान देश भर में हो सके।

कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि गृह विज्ञान विभाग सदैव नवाचार एवं सृजनात्मक कार्यों में अग्रणी रहा है। ‘एक जनपद, एक व्यंजन’ कार्यक्रम युवाओं के लिए अवसरों के नए द्वार खोलने वाला है। इस मौके पर नोडल अधिकारी प्रो. दिव्या रानी सिंह, प्रो. राजवंत राव, प्रो. उषा सिंह, महाबीर कंदोई, अचिंत्य लहरी व उदय मिश्र आदि मौजूद रहे।


जिलेवार चयनित पारंपरिक व्यंजन

गोरखपुर- दाल पीठा (फरा), घाठी, तीसी का लड्डू, गुजिया एवं महुअर (महुआ पुरी/लट्टा)

देवरिया- रिखवाचा, पुआ, बखीर (रसायाव), दाल भरी पुड़ी, सत्तू/सतुआ।

कुशीनगर- लकठा (गुड़ आधारित मिठाई), गुड़ की बर्फी/गुड़ सोंठ लड्डू।

महराजगंज- चूड़ा मटर, रामकटोरी, चावल की पुरी के साथ चटनी, कसार (ढोडी/चावल का लड्डू)।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed