{"_id":"67821a04a84b0d3e2a096ec5","slug":"it-raid-continues-in-gorakhpur-for-the-third-day-irregularities-found-in-bank-records-2025-01-11","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Income Tax Raid: तीसरे दिन भी जारी, 'माननीय' का नहीं रखा मान...कहीं इसलिए तो चर्चा में नहीं आए प्रतिष्ठान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Income Tax Raid: तीसरे दिन भी जारी, 'माननीय' का नहीं रखा मान...कहीं इसलिए तो चर्चा में नहीं आए प्रतिष्ठान
Sat, 11 Jan 2025 12:44 PM IST
रोहित सिंह
रोहित सिंह, गोरखपुर
रोहित सिंह, गोरखपुर
Published by: रोहित सिंह
Updated Sat, 11 Jan 2025 12:44 PM IST
सार
चर्चा है कि कुछ दिन पहले जनप्रतिनिधि के रिश्तेदार शोरूम में गाड़ी खरीदने आए थे। इस दौरान उन्होंने परिचय दिया तो निदेशक ने खुद को जनप्रतिनिधि का परिचित बताते हुए पांच हजार रुपये की छूट देने की बात कही। रिश्तेदार ने जनप्रतिनिधि को फोन किया तो दूसरी तरफ से आयकर विभाग के डिप्टी स्तर से एक अधिकारी ने निदेशक को कॉल किया। तीसरे दिन भी आयकर विभाग की छापा चलता रहा।
विज्ञापन
होटल रॉयल रेजीडेंसी के अंदर भी जांच चल रही
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
आयकर छापे को लेकर तरह-तरह की चर्चा चल रही है। चर्चा है कि कारोबारियों के यहां छापे की वजह जनप्रतिनिधि की बात मानने से इंकार करना भी हो सकती है। चर्चा है कि कुछ दिन पहले जनप्रतिनिधि के रिश्तेदार शोरूम में गाड़ी खरीदने आए थे। इस दौरान उन्होंने परिचय दिया तो निदेशक ने खुद को जनप्रतिनिधि का परिचित बताते हुए पांच हजार रुपये की छूट देने की बात कही।
रिश्तेदार ने जनप्रतिनिधि को फोन किया तो दूसरी तरफ से आयकर विभाग के डिप्टी स्तर से एक अधिकारी ने निदेशक को कॉल किया। इसपर भी बात नहीं बनी और निदेशक ने जनप्रतिनिधि के संबंध और जरूरत होने पर उनके द्वारा खुद फोन किए जाने की बात भी डिप्टी रेंज के अधिकारी से बोल दी थी।
भवन बनाया और किराए पर दे दिया, इससे भी शक गहराया
आयकर विभाग के पास फर्म पर कर चोरी के पुख्ता प्रमाण हैं। पिछले छह महीनों की जांच में सामने आया था कि संस्था की तरफ से शहर के क्रीम लोकेशन की जमीनों को खरीद कर उसपर अच्छी खासी लागत के साथ भवन बना दिए गए। इन भवनों को दूसरे किसी को बेचने की बजाय दूसरी और महंगी कंपनियों को किराए पर दे दिया गया।
विज्ञापन
आयकर विभाग उन रुपयों के कनेक्शन की तलाश कर रही, जिससे ये भवन बनकर तैयार हुए। जमीन खरीदने और भवनों के निर्माण के बीच निवेश होने वाले धनों के जरिये और उसके सापेक्ष जमा किए जाने वाले कर की मिलान टीम कर रही है। इसके अलावा निवेश में सहयोग किए जाने वाले रुपये फर्म के खातों में लिए गए थे या नहीं, इसकी भी जांच हो रही है।
आयकर विभाग के सूत्रों ने बताया कि ये जांच शनिवार दोपहर तक चलेगी और समाप्त हो जाएगी। इस दौरान कर चोरी का बड़ा मामला सामने आ सकता है।
विज्ञापन
रिश्तेदार ने जनप्रतिनिधि को फोन किया तो दूसरी तरफ से आयकर विभाग के डिप्टी स्तर से एक अधिकारी ने निदेशक को कॉल किया। इसपर भी बात नहीं बनी और निदेशक ने जनप्रतिनिधि के संबंध और जरूरत होने पर उनके द्वारा खुद फोन किए जाने की बात भी डिप्टी रेंज के अधिकारी से बोल दी थी।
विज्ञापन
भवन बनाया और किराए पर दे दिया, इससे भी शक गहराया
आयकर विभाग के पास फर्म पर कर चोरी के पुख्ता प्रमाण हैं। पिछले छह महीनों की जांच में सामने आया था कि संस्था की तरफ से शहर के क्रीम लोकेशन की जमीनों को खरीद कर उसपर अच्छी खासी लागत के साथ भवन बना दिए गए। इन भवनों को दूसरे किसी को बेचने की बजाय दूसरी और महंगी कंपनियों को किराए पर दे दिया गया।
विज्ञापन
आयकर विभाग उन रुपयों के कनेक्शन की तलाश कर रही, जिससे ये भवन बनकर तैयार हुए। जमीन खरीदने और भवनों के निर्माण के बीच निवेश होने वाले धनों के जरिये और उसके सापेक्ष जमा किए जाने वाले कर की मिलान टीम कर रही है। इसके अलावा निवेश में सहयोग किए जाने वाले रुपये फर्म के खातों में लिए गए थे या नहीं, इसकी भी जांच हो रही है।
आयकर विभाग के सूत्रों ने बताया कि ये जांच शनिवार दोपहर तक चलेगी और समाप्त हो जाएगी। इस दौरान कर चोरी का बड़ा मामला सामने आ सकता है।
आलोक अग्रवाल के घर के अंदर चल रही है जांच
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
शहर के एक अधिकारी की पत्नी भी जांच में सचल दस्ते में
गोरखपुर शहर में तैनात एक वरिष्ठ अधिकारी की पत्नी भी आयकर विभाग के सचल दस्ते की टीम में शामिल हैं। सूत्रों की मानें तो इस अधिकारी के सामने ही फ्लोटिंग रेस्टोरेंट का संचालन शुरू किया गया था। फ्लोट में किए गए निवेश और फर्म की ओर से कर जमा करने की बेसिक जानकारी टीम के पास थी।
आलोक अग्रवाल का मोबाइल भी जब्त
आयकर विभाग की टीम ने आलोक अग्रवाल के दोनों मोबाइल फोन और फोन से व्हाट्सएप चैटिंग के रिकाॅर्ड को भी सुरक्षित किया है। सूत्रों की मानें तो इसमें कई मैसेज और फोटो ऐसे हैं, जिन्हें देख आयकर विभाग वाले भी हैरत में पड़ गए। सूत्रों ने बताया कि चूंकि जांच टीम के सामने आलोक ने आने में समय लगा दिया था, ऐसे में फोन को फॉरेंसिंक की जांच करवाने के बाद टीम लौटाएगी।
इसके अलावा केबिन के कंप्यूटर और गोरखपुर क्लब में रेस्टोरेंट संचालन के अनुबंध और शर्तों की फाइल के साथ उस फर्म से अर्जित होने वाली रकम की भी गणना की जाएगी। सूत्रों ने बताया कि गोरखपुर क्लब (कंपनी एक्ट द्वारा संचालित) के अंदर दूसरे किसी को बार या रेस्टोरेंट के संचालन का जिम्मा देने वाले जिम्मेदारों से भी सवाल-जवाब हो सकता है।
26 साल पहले जमीन खरीदी, 2012 में बनाया घर
आलोक अग्रवाल के परिवार ने 1998 में सीए और पारलेजी कंपनी की फैक्ट्री के मालिक अशोक सराफ (अग्रवाल) से सिविल लाइंस में जमीन खरीदी थी। ये जमीन अशोक और इनके चाचा बीएल सराफ ने परिवार के नाम से रजिस्ट्री की थी। आयकर विभाग के पास मौजूद रिकाॅर्ड के अनुसार, सराफ परिवार के चाचा- भतीजे व्यापारिक साझेदार भी हैं।
ऐसे में रजिस्ट्री भी दोनों ने मिलकर की थी। रिकाॅर्ड के अनुसार, 12 हजार स्कवायर फिट नजूल की फ्री होल्ड कराई जमीन से रजिस्ट्री की गई थी। कचहरी की रिकाॅर्ड की मानें तो आलोक अग्रवाल के घर से इंदिरा बाल विहार पार्क के एक हिस्से तक की पूरी जमीन तत्कालीन समय में आईएम परेरा के नाम पर शासन की तरफ से 1939 में पट्टा किया गया था।
शर्त थी कि इस जमीन पर सरकारी आवास बनाए जाएंगे। इसी शर्त के अलाटममेंट के साथ पट्टा किया गया था। फ्री होल्ड हुई जमीन पर मालिकान कब्जा कर उसे सुरक्षित कर लिया। इसी पूरी जमीन के एक हिस्से में आलोक अग्रवाल ने अपना मकान बनवाया है। आयकर विभाग की एक टीम संत कबीरनगर में इस फैक्टरी पर भी जांच कर रही है।
गोरखपुर शहर में तैनात एक वरिष्ठ अधिकारी की पत्नी भी आयकर विभाग के सचल दस्ते की टीम में शामिल हैं। सूत्रों की मानें तो इस अधिकारी के सामने ही फ्लोटिंग रेस्टोरेंट का संचालन शुरू किया गया था। फ्लोट में किए गए निवेश और फर्म की ओर से कर जमा करने की बेसिक जानकारी टीम के पास थी।
आलोक अग्रवाल का मोबाइल भी जब्त
आयकर विभाग की टीम ने आलोक अग्रवाल के दोनों मोबाइल फोन और फोन से व्हाट्सएप चैटिंग के रिकाॅर्ड को भी सुरक्षित किया है। सूत्रों की मानें तो इसमें कई मैसेज और फोटो ऐसे हैं, जिन्हें देख आयकर विभाग वाले भी हैरत में पड़ गए। सूत्रों ने बताया कि चूंकि जांच टीम के सामने आलोक ने आने में समय लगा दिया था, ऐसे में फोन को फॉरेंसिंक की जांच करवाने के बाद टीम लौटाएगी।
इसके अलावा केबिन के कंप्यूटर और गोरखपुर क्लब में रेस्टोरेंट संचालन के अनुबंध और शर्तों की फाइल के साथ उस फर्म से अर्जित होने वाली रकम की भी गणना की जाएगी। सूत्रों ने बताया कि गोरखपुर क्लब (कंपनी एक्ट द्वारा संचालित) के अंदर दूसरे किसी को बार या रेस्टोरेंट के संचालन का जिम्मा देने वाले जिम्मेदारों से भी सवाल-जवाब हो सकता है।
26 साल पहले जमीन खरीदी, 2012 में बनाया घर
आलोक अग्रवाल के परिवार ने 1998 में सीए और पारलेजी कंपनी की फैक्ट्री के मालिक अशोक सराफ (अग्रवाल) से सिविल लाइंस में जमीन खरीदी थी। ये जमीन अशोक और इनके चाचा बीएल सराफ ने परिवार के नाम से रजिस्ट्री की थी। आयकर विभाग के पास मौजूद रिकाॅर्ड के अनुसार, सराफ परिवार के चाचा- भतीजे व्यापारिक साझेदार भी हैं।
ऐसे में रजिस्ट्री भी दोनों ने मिलकर की थी। रिकाॅर्ड के अनुसार, 12 हजार स्कवायर फिट नजूल की फ्री होल्ड कराई जमीन से रजिस्ट्री की गई थी। कचहरी की रिकाॅर्ड की मानें तो आलोक अग्रवाल के घर से इंदिरा बाल विहार पार्क के एक हिस्से तक की पूरी जमीन तत्कालीन समय में आईएम परेरा के नाम पर शासन की तरफ से 1939 में पट्टा किया गया था।
शर्त थी कि इस जमीन पर सरकारी आवास बनाए जाएंगे। इसी शर्त के अलाटममेंट के साथ पट्टा किया गया था। फ्री होल्ड हुई जमीन पर मालिकान कब्जा कर उसे सुरक्षित कर लिया। इसी पूरी जमीन के एक हिस्से में आलोक अग्रवाल ने अपना मकान बनवाया है। आयकर विभाग की एक टीम संत कबीरनगर में इस फैक्टरी पर भी जांच कर रही है।