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Gorakhpur News: नहीं बनी बात, आज से परीक्षा का बहिष्कार करेगा गुआक्टा
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- मांगे नहीं पूरी होने पर गुआक्टा ने की है परीक्षा बहिष्कार की घोषणा
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय प्रशासन और विश्वविद्यालय से संबद्ध एडेड कॉलेजों के शिक्षकों के संगठन ‘गुआक्टा’ में विभिन्न मुद्दों पर चल रही रार का समाधान नही निकल पाया है। गुआक्टा ने डीडीयू प्रशासन पर हठधर्मिता का आरोप लगाते हुए एक जून से सेमेस्टर परीक्षा के बहिष्कार के निर्णय पर कायम रहने की घोषणा की है।
गुआक्टा के अध्यक्ष प्रो. केडी तिवारी और महामंत्री प्रो. धीरेंद्र सिंह ने कहा कि आठ सूत्री मांगों को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन से लगातार मांग की जा रही थी, लेकिन डीडीयू प्रशासन ने आश्वासन के अलावा कुछ नहीं दिया। बीते दिनों प्रशासनिक भवन में धरना-प्रदर्शन भी किया गया था। उस दिन भी विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा था कि शिक्षकों की सभी मांगें जायज हैं और जल्द से जल्द उन्हें लागू कर दिया जाएगा। लेकिन, अभी तक मांगें नहीं मानी गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि धरना-प्रदर्शन के दिन शिक्षकों से बदसलूकी की गई थी और उल्टा शिक्षकों को ही नोटिस जारी कर दिया गया।
गुआक्टा के मुताबिक विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से कुलसचिव और परीक्षा नियंत्रक ने बुधवार को फोन कर बहिष्कार का निर्णय वापस लिए जाने का आग्रह किया। उनके आग्रह पर गुआक्टा ने भी लचीला रुख अपनाते हुए कहा कि उनकी आठ में से तीन मांगें ऐसी हैं, जिस पर तत्काल निर्णय लिया जा सकता है। वह तीन मांगें आज ही मान ली जाएं तो वे बहिष्कार वापस ले लेंगे। इसके लिए बुधवार की रात्रि आठ बजे तक का समय भी दिया गया था। गुआक्टा का आरोप है कि उन्होंने रात तक इंतजार किया लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से कोई जवाब नहीं आया।
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अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय प्रशासन और विश्वविद्यालय से संबद्ध एडेड कॉलेजों के शिक्षकों के संगठन ‘गुआक्टा’ में विभिन्न मुद्दों पर चल रही रार का समाधान नही निकल पाया है। गुआक्टा ने डीडीयू प्रशासन पर हठधर्मिता का आरोप लगाते हुए एक जून से सेमेस्टर परीक्षा के बहिष्कार के निर्णय पर कायम रहने की घोषणा की है।
गुआक्टा के अध्यक्ष प्रो. केडी तिवारी और महामंत्री प्रो. धीरेंद्र सिंह ने कहा कि आठ सूत्री मांगों को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन से लगातार मांग की जा रही थी, लेकिन डीडीयू प्रशासन ने आश्वासन के अलावा कुछ नहीं दिया। बीते दिनों प्रशासनिक भवन में धरना-प्रदर्शन भी किया गया था। उस दिन भी विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा था कि शिक्षकों की सभी मांगें जायज हैं और जल्द से जल्द उन्हें लागू कर दिया जाएगा। लेकिन, अभी तक मांगें नहीं मानी गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि धरना-प्रदर्शन के दिन शिक्षकों से बदसलूकी की गई थी और उल्टा शिक्षकों को ही नोटिस जारी कर दिया गया।
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गुआक्टा के मुताबिक विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से कुलसचिव और परीक्षा नियंत्रक ने बुधवार को फोन कर बहिष्कार का निर्णय वापस लिए जाने का आग्रह किया। उनके आग्रह पर गुआक्टा ने भी लचीला रुख अपनाते हुए कहा कि उनकी आठ में से तीन मांगें ऐसी हैं, जिस पर तत्काल निर्णय लिया जा सकता है। वह तीन मांगें आज ही मान ली जाएं तो वे बहिष्कार वापस ले लेंगे। इसके लिए बुधवार की रात्रि आठ बजे तक का समय भी दिया गया था। गुआक्टा का आरोप है कि उन्होंने रात तक इंतजार किया लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से कोई जवाब नहीं आया।
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