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स्वास्थ्य: दस तरह की बीमारियों से बचाता है आयोडीन नमक, बच्चों के विकास में है सहायक

Sat, 22 Oct 2022 12:20 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 22 Oct 2022 12:20 PM IST
सार

राष्ट्रीय घेघा रोग नियंत्रण कार्यक्रम का नाम वर्ष 1992 में बदल कर राष्ट्रीय आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण कार्यक्रम रख दिया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य आयोडीन की कमी से होने वाले सभी बीमारियों के प्रति लोगों को सजग करना है। आयोडीन एक सूक्ष्म पोषक तत्व है, जो आयोडीन थॉयराक्साईन (टी-फोर) और ट्रियोडोथायरोनाइन (टी-तीन) जैसे हारमोंस बनाने के लिए आवश्यक घटक है।

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iodized salt prevents ten types of diseases
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

आयोडीन नमक के सेवन से दस प्रकार के बीमारियों से बचा जा सकता है। सामान्य शारीरिक वृद्धि के लिए प्रतिदिन 100 से 150 माइक्रो ग्राम आयोडीन का सेवन आवश्यक है। यह संदेश राष्ट्रीय आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण कार्यक्रम के तहत जन-जन तक पहुंचाई जा रही है।

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यह कहना है डॉ. नंद कुमार का। उन्होंने कहा कि जिले भर के अधीक्षक और प्रभारी चिकित्सा अधिकारी को शुक्रवार को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की टीम ने जागरूक किया।
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उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय घेघा रोग नियंत्रण कार्यक्रम का नाम वर्ष 1992 में बदल कर राष्ट्रीय आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण कार्यक्रम रख दिया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य आयोडीन की कमी से होने वाले सभी बीमारियों के प्रति लोगों को सजग करना है।
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आयोडीन एक सूक्ष्म पोषक तत्व है, जो आयोडीन थॉयराक्साईन (टी-फोर) और ट्रियोडोथायरोनाइन (टी-तीन) जैसे हारमोंस बनाने के लिए आवश्यक घटक है। यह मनुष्य के सामान्य वृद्धि एवं विकास के साथ ही आरोग्यता में अहम भूमिका निभाता है।


बच्चों के विकास में सहायक
नोडल अधिकारी ने बताया कि बच्चों के समुचित विकास के लिए उन्हें आयोडीन युक्त नमक ही खाना है और बच्चों को भी यही नमक खिलाना है। ऐसा न करने से जन्मजात शारीरिक एवं मानसिक दिव्यांगता, गर्भ में पल रहे बच्चे के मानसिक विकास में कमी, अपंगता, बहरापन, गूंगापन, शरीर में उर्जा की कमी व थकान, बांझपन और मासिक धर्म से संबंधित समस्याएं पैदा हो जाती हैं।

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