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गोरखपुर: गोदाम में सरकारी चावल न जमा कराने की होगी जांच, अपर आयुक्त सहकारिता ने मांगा जवाब
Wed, 04 May 2022 04:57 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 04 May 2022 04:57 PM IST
सार
एक करोड़ रुपये का गेहूं भी सरकारी गोदाम में नहीं जमा कराया गया। गोलमाल का पर्दाफाश हुआ, लेकिन जांच नहीं कराई गई। अब आरटीआई कार्यकर्ता संजय मिश्र ने मामले की जांच सीबीआई और एसआईटी से कराने की मांग की है।
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विस्तार
धान कुटाई के बाद 34,451 क्विंटल चावल सरकारी गोदाम में न जमा कराए जाने के मामले की जांच होगी। इस सिलसिले में अपर आयुक्त एवं अपर निबंधक (क्रय व विक्रय) सहकारिता बी. चंद्रकला ने जांच के आदेश दिए हैं। अपर आयुक्त ने अपर निबंधक सहकारिता गोरखपुर मंडल से जवाब मांगा है। साथ ही कहा है कि जांच करके रिपोर्ट जल्द उपलब्ध कराई।
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राप्ती नगर के आरटीआई कार्यकर्ता संजय मिश्रा को सूचना के अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के जरिए मिली जानकारी के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2017-18, 2018-19 और 2019-20 में 293 क्रय केंद्रों से धान व गेहूं की खरीद हुई थी। इनमें से 38 केंद्रों की जांच से पता चला था कि गोरखपुर के सात राइस मिलरों ने 34,451 क्विंटल कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) चावल सरकारी गोदाम में नहीं जमा कराया है।
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इन राइस मिलरों को क्रय केंद्रों से धान उपलब्ध कराया गया था। चावल की कीमत 9.62 करोड़ रुपये बताई गई थी। इसी तरह, एक करोड़ रुपये का गेहूं भी सरकारी गोदाम में नहीं जमा कराया गया। गोलमाल का पर्दाफाश हुआ, लेकिन जांच नहीं कराई गई। अब आरटीआई कार्यकर्ता संजय मिश्र ने मामले की जांच सीबीआई और एसआईटी से कराने की मांग की है।
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इस सिलसिले में अपर आयुक्त एवं अपर निबंधक बी. चंद्रकला को पत्र भी दिया है। इसी का नतीजा रहा कि अपर आयुक्त ने पूरे मामले की जांच रिपोर्ट तलब की है। अपर आयुक्त का कहना है कि जांच रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।