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Gorakhpur News: इंट्राऑपरेटिव तरीके से चर्बी की गांठ का उपचार, अब सर्जरी हुई आसान
Mon, 27 Apr 2026 02:47 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Mon, 27 Apr 2026 02:47 AM IST
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- एम्स में चर्बी की गांठ के इलाज की नई तकनीक की गई विकसित
गोरखपुर। एम्स में चर्बी की गांठ का सफल ऑपरेशन संभव हो सकेगा। एम्स ने इसके लिए नई तकनीक विकसित की है। 21 गेज की स्पाइनल सुई से चर्बी की गांठ (लिपोमा) को जाम कर दिया जाता है, जिसका शरीर पर निशान भी नहीं बनता। अभी तक एनेस्थीसिया देकर गांठ वाले स्थान को सुन्न करके इसकी सर्जरी की जाती थी। अब एक छोटा चीरा लगाकर गांठ को बाहर निकालते हैं और फिर टांके लगाकर पट्टी कर देते हैं।
एम्स के चर्म रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुनील गुप्ता ने बताया कि शरीर में पनपने वाली चर्बी की गांठ का पता लगाना ही सबसे जटिल कार्य है। इसका कारण है कि ये गांठ समय-समय पर इधर-उधर सरकती रहती है। शरीर में चिह्नित नहीं हो पाने से इसके उपचार में दिक्कत होती है। ऐसे में गांठ की सर्जरी कर पाना बेहद मुश्किल भरा होता है। इस दुश्वारी को देखते हुए उपचार के साथ इसे कम समय में कैसे स्थान की पहचान करें, इस पर काम किया।
कई शोध के बाद सामने आया कि 21-गेज सुई को पैल्पेबल लिपोमा (स्पर्श करने योग्य गांठ) के केंद्र में लंबवत रूप से डाला जाता है। सुई को तब तक डाला जाता है, जब तक लिपोमा के संपर्क में सीधे सूई का हिस्सा नहीं आता और मरीज को महसूस न हो।
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इस विधि से पिछले दिनों एम्स में एक मरीज का उपचार किया गया। मरीज लिपोमा से परेशान था। एम्स में उसका सफल ऑपरेशन किया गया। मरीज के घाव के चमड़े के नीचे करीब एक से 1.5 सेमी गहराई में सुई को डाला गया। इसे इंट्राऑपरेटिव तरीके से (छवियों को थ्रीडी में दिखाता है) लिपोमा को खोजकर उसे एक तरह से जाम कर दिया गया।
डॉ. गुप्ता ने बताया कि इस तकनीक में मरीज के शरीर पर निशान भी कम पड़ते हैं और भविष्य में फिर से लिपोमा होने का डर नहीं रहता। सामान्य सर्जरी में स्लिपरी लिपोमा के हिस्से कई बार स्लिप करने के दौरान छूट जाते हैं, जिससे दूसरी बार लिपोमा होने का खतरा रहता है। इस तकनीक में सुई के जरिये सटीकता से पहचान कर उसे जाम कर दिया जाता है। इसके बाद छोटी सर्जरी कर चर्बी की गांठ निकाल दी जाती है। इस तकनीक के विकास में चर्म रोग विभाग की डॉ. शिवांगी राणा, डॉ. दिव्यांशु देशमुख, डॉ. फरखंदा सोफी का अहम योगदान रहा।
कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने बताया कि इक सुई से लिपोमा को खोजकर उसे जाम करने की आधुनिक विधि एम्स ने खोजी है। इस नई विधि से उपचार बेहद सरल हो गया है। इससे सर्जरी के लिए राह आसान हुई है।
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गोरखपुर। एम्स में चर्बी की गांठ का सफल ऑपरेशन संभव हो सकेगा। एम्स ने इसके लिए नई तकनीक विकसित की है। 21 गेज की स्पाइनल सुई से चर्बी की गांठ (लिपोमा) को जाम कर दिया जाता है, जिसका शरीर पर निशान भी नहीं बनता। अभी तक एनेस्थीसिया देकर गांठ वाले स्थान को सुन्न करके इसकी सर्जरी की जाती थी। अब एक छोटा चीरा लगाकर गांठ को बाहर निकालते हैं और फिर टांके लगाकर पट्टी कर देते हैं।
एम्स के चर्म रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुनील गुप्ता ने बताया कि शरीर में पनपने वाली चर्बी की गांठ का पता लगाना ही सबसे जटिल कार्य है। इसका कारण है कि ये गांठ समय-समय पर इधर-उधर सरकती रहती है। शरीर में चिह्नित नहीं हो पाने से इसके उपचार में दिक्कत होती है। ऐसे में गांठ की सर्जरी कर पाना बेहद मुश्किल भरा होता है। इस दुश्वारी को देखते हुए उपचार के साथ इसे कम समय में कैसे स्थान की पहचान करें, इस पर काम किया।
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कई शोध के बाद सामने आया कि 21-गेज सुई को पैल्पेबल लिपोमा (स्पर्श करने योग्य गांठ) के केंद्र में लंबवत रूप से डाला जाता है। सुई को तब तक डाला जाता है, जब तक लिपोमा के संपर्क में सीधे सूई का हिस्सा नहीं आता और मरीज को महसूस न हो।
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इस विधि से पिछले दिनों एम्स में एक मरीज का उपचार किया गया। मरीज लिपोमा से परेशान था। एम्स में उसका सफल ऑपरेशन किया गया। मरीज के घाव के चमड़े के नीचे करीब एक से 1.5 सेमी गहराई में सुई को डाला गया। इसे इंट्राऑपरेटिव तरीके से (छवियों को थ्रीडी में दिखाता है) लिपोमा को खोजकर उसे एक तरह से जाम कर दिया गया।
डॉ. गुप्ता ने बताया कि इस तकनीक में मरीज के शरीर पर निशान भी कम पड़ते हैं और भविष्य में फिर से लिपोमा होने का डर नहीं रहता। सामान्य सर्जरी में स्लिपरी लिपोमा के हिस्से कई बार स्लिप करने के दौरान छूट जाते हैं, जिससे दूसरी बार लिपोमा होने का खतरा रहता है। इस तकनीक में सुई के जरिये सटीकता से पहचान कर उसे जाम कर दिया जाता है। इसके बाद छोटी सर्जरी कर चर्बी की गांठ निकाल दी जाती है। इस तकनीक के विकास में चर्म रोग विभाग की डॉ. शिवांगी राणा, डॉ. दिव्यांशु देशमुख, डॉ. फरखंदा सोफी का अहम योगदान रहा।
कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने बताया कि इक सुई से लिपोमा को खोजकर उसे जाम करने की आधुनिक विधि एम्स ने खोजी है। इस नई विधि से उपचार बेहद सरल हो गया है। इससे सर्जरी के लिए राह आसान हुई है।