फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Basti News ›   International youth day special story of Anusri in Basti

अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस: अंतरिक्ष की ओर बढ़े बेटी अनुश्री के कदम, इंग्लैंड में कर रही हैं पीएचडी

Wed, 12 Aug 2020 10:44 AM IST
vivek shukla नीरज श्रीवास्तव, बस्ती।
नीरज श्रीवास्तव, बस्ती। Published by: vivek shukla Updated Wed, 12 Aug 2020 10:44 AM IST
विज्ञापन
International youth day special story of Anusri in Basti
अनुश्री। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।

मन में कुछ अलग कर गुजरने की तमन्ना हो तो नामुमकिन कुछ भी नहीं होता। हौसलों की राह पर चलते हुए आसमां चूमने का सपना भी आसानी से सच किया जा सकता है। इसे साबित कर दिखाया है बस्ती की बेटी अनुश्री (33) ने। कल्पना चावला को प्रेरणा मानने वाली अनुश्री को नासा ने एक अप्रैल 2020 से प्रशिक्षण के लिए बुलावा भेजा था, मगर लॉकडाउन की वजह से फिलहाल प्रशिक्षण टल गया है।

विज्ञापन


अगली तिथि अभी तक अनुश्री को नहीं मिली है। अनुश्री इन दिनों यूनाइटेड किंगडम यानी इंग्लैड के कालचेस्टर सिटी में रह कर माइक्रो आइट्रोलॉजी अर्थात स्पेस विषय से पीएचडी कर रही हैं। यहां नासा ने उन्हें भेजा है। बस्ती की बेटी अनुश्री के कदम अंतरिक्ष की ओर बढ़ चले हैं, जिसे लेकर वे भी पूरी तरह आश्वस्त हैं।
विज्ञापन


शहर के गांधी नगर निवासी रेलवे के अधिकारी राकेश श्रीवास्तव व सुनीता की इकलौती बेटी कुशाग्र बुद्धि की हैं। जिससे परिवार ने उसे भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाने के लिए प्रोत्साहित किया। वर्ष 2003 में लखनऊ में तैयारी के दौरान कल्पना चावला की अंतरिक्ष अभियान से लौटते समय मौत होने की घटना ने अनुश्री को झकझोर दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

सिविल सर्विसेज की कर रही थी तैयारी

इसी बीच उसने सिविल सर्विसेज की तैयारी के लिए ली गई साइंस की पुस्तक में मंगल ग्रह पर जीवन की तलाश के बारे में गंभीरता से पढ़ा, इसके बाद सिविल सर्विसेज से उसका मन उचट गया और यहीं उसके मन में मंगल ग्रह अभियान में शामिल होने का बीज रोपित हो गया।

परास्नातक करने के दौरान अनुश्री ने लखनऊ में बायो एक्सिस डीएनए रिसर्च सेंटर से बायो टेक्नोलॉजी में शार्ट टर्म प्रोजेक्ट की ट्रेनिंग लेकर जीवन की दिशा मोड़ दी। इसी बीच इंग्लैंड की एक निजी संस्था यूनिवर्सिटी ऑफ एसेक्स ने एमएससी का ऑफर दिया, जिसे अनुश्री ने स्वीकार कर लिया।

वहां पढ़ाई के दौरान अमेरिका की एक निजी कंपनी ने मंगल ग्रह अभियान के लिए यूटा के रेगिस्तान में प्रशिक्षण के लिए प्रस्ताव दिया। यहां भारत से अनुश्री के अलावा सात देशों के प्रशिक्षणार्थियों के साथ मंगल ग्रह के वातावरण में रहने का प्रशिक्षण दिया गया।

मंगल ग्रह के लिए समर्पित है जीवन

अनुश्री बताती हैं कि प्रशिक्षण के दौरान उन्हें हैब से बाहर आने पर पंद्रह किलो का स्पेस सूट पहन कर काम कराया जाता था। दो माह नार्थ पोल यानी उत्तरी ध्रुव के करीब प्रशिक्षण दिया गया, जहां दो माह में कभी रात नहीं देखी। यही नहीं इंग्लैंड में मंगल ग्रह से संबंधित वैज्ञानिक प्रयोग के लिए धरती के 1.1 किमी नीचे नमक की खदान में पंद्रह दिन का प्रशिक्षण मिला।

अनुश्री ने कहा कि उनका जीवन अब मंगल ग्रह पर जीवन की खोज के लिए समर्पित है। एक अप्रैल से नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर, मेरी लैंडस्टेट अमेरिका में चार माह का प्रशिक्षण होना था, मगर टल गया है।

वे कहती हैं कि मिशन अंतरिक्ष का सफर अभी लंबा है। फिर भी मंगल ग्रह के अभियान में खुद की भागीदारी को लेकर आश्वस्त हूं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed