गोरखपुर: पहले से बनी इमारतों को कराया जा सकेगा वैध, महायोजना 2031 लागू होने के पहले आवेदन देकर लेना होगा प्रमाणपत्र
महायोजना लागू होने के बाद भी नहीं बदलेगा भूखंड का उपयोग। आवेदन करते समय जमा करने पड़ेंगे कुछ प्रमाणपत्र।
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शासन की तरफ से जारी इस दिशा-निर्देशों को पहले विकास प्राधिकरण के बोर्ड को अंगीकृत करना होगा, उसके बाद लोगों से आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे। प्राधिकरण में इस समय 319 गांव जुड़ गए हैं। तैयार हो रही महायोजना 2031 में इन गांवों को भी शामिल किया जा रहा है।
महायोजना में इन गांवों के भूखंडों का भू- उपयोग भी तय होगा। इन क्षेत्रों में तमाम लोग भूखंड या भवन का किसी न किसी रूप में इस्तेमला कर रहे हैं। यदि इनके उपयोग को जारी रखने की अनुमति महायोजना जारी होने से पहले नहीं ली गई तो उसे अवैध माना जाएगा। मसलन यदि कोई स्कूल, औद्योगिक इकाई या व्यावसायिक उपयोग कर रहा होगा और महायोजना में भू उपयोग इसके विपरीत आ जाएगा तो वह अपने भवन का पहले से किया जा रहा उपयोग जारी नहीं रख पाएगा। इसी तरह आवासीय भवन वाली जगह यदि व्यावसायिक हो गई तो उसे भी समस्या का सामना करना पड़ेगा।
आवेदन करते समय जमा करने पड़ेंगे कुछ प्रमाण पत्र
इसके अलावा नगर निगम या नगर पंचायत से जारी गृह कर, जल कर की रसीद या बिजली बिल प्रस्तुत किया जा सकता है। यदि भूमि या भवन का उपयोग प्रदूषण फैलाने वाले या संकटमय प्रकृति के उद्योग के रूप में हो रहा है तो पर्यावरण, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, अग्निशमन या विद्युत सुरक्षा का अनापत्ति प्रमाण पत्र भी देना होगा।इस योजना के तहत भवन या भूमि को नियमित कराने के बाद उसके आंतरिक प्रारूप में बदलाव किया जा सकेगा।
बाहरी डिजाइन में परिवर्तन नहीं हो सकेगा। यदि भवन को ध्वस्त कर नया निर्माण कराया जाता है तो प्राधिकरण से मानचित्र पास कराना होगा। ग्रीन बेल्ट (पार्क, खुले स्थल) के अंतर्गत यदि पुराने उपयोग को अनुमति दी जाएगी तो उस जमीन के बराबर क्षेत्रफल को महायोजना में आरक्षित किया जाएगा।
भूखंडीय आवासीय एवं अन्य उपयोग के लिए पांच रुपये प्रति वर्ग मीटर, ग्रुप हाउसिंग के लिए 15 रुपये प्रतिवर्ग मीटर, व्यावसायिक, शापिंग कांप्लेक्स, शापिंग माल, सिनेमा, मल्टीप्लेक्स, मिश्रित, कार्यालय उपयोग के लिए 30 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से प्रोसेसिंग शुल्क देना होगा।
जीडीए उपाध्यक्ष आशीष कुमार ने बताया कि प्राधिकरण के तहत आने वाले विस्तारित क्षेत्र की भूमि एवं भवनों का पुराना उपयोग जारी रखने के लिए शासन की ओर से उपविधि 2021 जारी की गई है। इसे अगली बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। बोर्ड से अंगीकृत होने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।