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Gorakhpur News: जिला अस्पताल से अपहृत मासूम से दरिंदगी के बाद की गई थी हत्या, रोहिन नदी से मिला शव
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गोरखपुर। जिला अस्पताल परिसर से अपहृत 10 वर्षीय बालिका की दुष्कर्म के बाद हत्या की गई थी। पुलिस ने आरोपी सिपाही अभिषेक यादव को गिरफ्तार कर लिया है। देर शाम उसे बर्खास्त भी कर दिया गया। पुलिस की जांच में सामने आया कि डायल-112 में तैनात सिपाही अभिषेक यादव बच्ची को बहला-फुसलाकर बाइक से अपने साथ ले गया। गुलरिहा के चिउटहा पुल के पास श्मशान घाट के टिनशेड में उसके साथ दुष्कर्म किया। विरोध पर गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद शव रोहिन नदी में फेंक दिया। बृहस्पतिवार सुबह नदी किनारे शव मिलने के बाद शहर में हर तरफ आक्रोश फैल गया।
बृहस्पतिवार को पोस्टमार्टम के बाद गिरफ्तार आरोपी सिपाही को मेडिकल परीक्षण के लिए जिला अस्पताल लाया गया, जहां मौजूद नर्सों, स्वास्थ्यकर्मियों और तीमारदारों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने आरोपी की पिटाई कर दी। सूचना पर एसपी सिटी निमिष पाटील भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे और किसी तरह आरोपी को सुरक्षित बाहर निकाला। देर शाम राजघाट स्थित राप्ती नदी के तट पर पुलिस फोर्स की मौजूदगी में बालिका का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान परिजन का दर्द और गुस्सा दोनों फूट पड़ा।
आजमगढ़ निवासी ई-रिक्शा चालक की 10 वर्षीय बेटी 28 जुलाई की रात जिला अस्पताल में भर्ती अपनी बड़ी बहन को खाना देकर लौट रही थी। रात 9:40 बजे आरोपी सिपाही उसे बाइक पर बैठाकर जिला अस्पताल से निकला। सीसीटीवी फुटेज में उसका पूरा रूट कैद हुआ है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने पूछताछ में बताया कि बक्शीपुर, घासीकटरा, इलाहीबाग, हार्बर्ट बांध, बरगदवा और मोहरीपुर होते हुए वह करीब 12.5 किलोमीटर दूर चिउटहा पुल के नीचे श्मशान घाट पहुंचा और बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। रात करीब 12:30 बजे विरोध करने पर उसका गला दबाकर हत्या कर दी। शव को रोहिन नदी में फेंकने के बाद आरोपी पुलिस लाइन स्थित अपने घर जाकर सो गया। बृहस्पतिवार सुबह करीब 7:30 बजे स्थानीय लोगों ने रोहिन नदी में शव उतराता देखा। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव बाहर निकलवाया। पहचान होने के बाद बच्ची के घर और मोहल्ले में कोहराम मच गया। घटनास्थल से महज 50 मीटर की दूरी पर शव मिलने से पुलिस की शुरुआती जांच की पुष्टि हो गई।
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जिला अस्पताल में फूटा गुस्सा, आरोपी की कर दी पिटाई
कोतवाली और एसओजी की टीम आरोपी सिपाही को मेडिकल परीक्षण के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुंची। इसकी जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में नर्स, स्वास्थ्यकर्मी और तीमारदार अस्पताल परिसर में जुट गए। मेडिकल परीक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जैसे ही पुलिस टीम आरोपी को इमरजेंसी वार्ड से बाहर लेकर निकली, भीड़ ने आरोपी की पिटाई शुरू कर दी। पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद आरोपी को भीड़ के चंगुल से छुड़ाकर अस्पताल के एक कमरे में सुरक्षित किया और तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी। एसपी सिटी भारी पुलिस बल के साथ जिला अस्पताल पहुंचे। अतिरिक्त फोर्स की मदद से आरोपी को कड़ी सुरक्षा में अस्पताल से निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।
उधर, आरोपी को कोर्ट में पेश किए जाने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में अधिवक्ता भी कचहरी परिसर में एकत्र होने लगे। संभावित विरोध को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने आरोपी को सीधे न्यायालय ले जाने के बजाय पुलिस लाइंस पहुंचा दिया। बाद में देर शाम उसे कोर्ट में पेश करने की तैयारी की गई। इस दौरान आक्रोशित अधिवक्ताओं ने कचहरी रोड पर जाम लगाकर अपना विरोध भी दर्ज कराया।
पहले भी दुष्कर्म के आरोप में निलंबित हो चुका था आरोपी
गाजीपुर जिले के सादियाबाद थाना क्षेत्र के चौरा हंसराजपुर गांव निवासी अभिषेक यादव वर्ष 2016 में पुलिस विभाग में भर्ती हुआ था और 2018 बैच का सिपाही है। वर्तमान में उसकी तैनाती डायल-112 में थी। फरवरी 2025 में भी उस पर पश्चिम बंगाल की एक युवती के अपहरण और दुष्कर्म का आरोप लगा था। उस मामले में उसे निलंबित किया गया था लेकिन सितंबर 2025 में उसकी बहाली कर दी गई थी। अब इस पुराने मामले के सामने आने के बाद विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
अंतिम संस्कार के दौरान घरवालों का गुस्सा फूटा
पोस्टमार्टम के बाद शाम को बालिका का शव राजघाट स्थित राप्ती तट पर अंतिम संस्कार के लिए पहुंचा। इस दौरान परिजन ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई और हंगामा किया। अधिकारियों के समझाने के बाद अंतिम संस्कार कराया गया।
गर्भवती मां की बिगड़ी तबीयत
घटना की जानकारी मिलने के बाद बच्ची की गर्भवती मां सदमे में आ गईं। उनकी हालत बिगड़ने पर बृहस्पतिवार सुबह उन्हें शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।
एक सप्ताह में चार्जशीट का दावा
एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने बताया कि आरोपी सिपाही को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है। अपहरण की प्राथमिकी में हत्या, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट की धाराएं बढ़ा दी गई हैं। 24 घंटे के भीतर आरोपी की बर्खास्तगी की प्रक्रिया पूरी कर ली गई। साथ ही एक सप्ताह के भीतर चार्जशीट दाखिल कर फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमे का विचारण कराते हुए कठोर सजा दिलाने की कोशिश की जाएगी।
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बृहस्पतिवार को पोस्टमार्टम के बाद गिरफ्तार आरोपी सिपाही को मेडिकल परीक्षण के लिए जिला अस्पताल लाया गया, जहां मौजूद नर्सों, स्वास्थ्यकर्मियों और तीमारदारों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने आरोपी की पिटाई कर दी। सूचना पर एसपी सिटी निमिष पाटील भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे और किसी तरह आरोपी को सुरक्षित बाहर निकाला। देर शाम राजघाट स्थित राप्ती नदी के तट पर पुलिस फोर्स की मौजूदगी में बालिका का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान परिजन का दर्द और गुस्सा दोनों फूट पड़ा।
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आजमगढ़ निवासी ई-रिक्शा चालक की 10 वर्षीय बेटी 28 जुलाई की रात जिला अस्पताल में भर्ती अपनी बड़ी बहन को खाना देकर लौट रही थी। रात 9:40 बजे आरोपी सिपाही उसे बाइक पर बैठाकर जिला अस्पताल से निकला। सीसीटीवी फुटेज में उसका पूरा रूट कैद हुआ है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने पूछताछ में बताया कि बक्शीपुर, घासीकटरा, इलाहीबाग, हार्बर्ट बांध, बरगदवा और मोहरीपुर होते हुए वह करीब 12.5 किलोमीटर दूर चिउटहा पुल के नीचे श्मशान घाट पहुंचा और बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। रात करीब 12:30 बजे विरोध करने पर उसका गला दबाकर हत्या कर दी। शव को रोहिन नदी में फेंकने के बाद आरोपी पुलिस लाइन स्थित अपने घर जाकर सो गया। बृहस्पतिवार सुबह करीब 7:30 बजे स्थानीय लोगों ने रोहिन नदी में शव उतराता देखा। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव बाहर निकलवाया। पहचान होने के बाद बच्ची के घर और मोहल्ले में कोहराम मच गया। घटनास्थल से महज 50 मीटर की दूरी पर शव मिलने से पुलिस की शुरुआती जांच की पुष्टि हो गई।
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जिला अस्पताल में फूटा गुस्सा, आरोपी की कर दी पिटाई
कोतवाली और एसओजी की टीम आरोपी सिपाही को मेडिकल परीक्षण के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुंची। इसकी जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में नर्स, स्वास्थ्यकर्मी और तीमारदार अस्पताल परिसर में जुट गए। मेडिकल परीक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जैसे ही पुलिस टीम आरोपी को इमरजेंसी वार्ड से बाहर लेकर निकली, भीड़ ने आरोपी की पिटाई शुरू कर दी। पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद आरोपी को भीड़ के चंगुल से छुड़ाकर अस्पताल के एक कमरे में सुरक्षित किया और तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी। एसपी सिटी भारी पुलिस बल के साथ जिला अस्पताल पहुंचे। अतिरिक्त फोर्स की मदद से आरोपी को कड़ी सुरक्षा में अस्पताल से निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।
उधर, आरोपी को कोर्ट में पेश किए जाने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में अधिवक्ता भी कचहरी परिसर में एकत्र होने लगे। संभावित विरोध को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने आरोपी को सीधे न्यायालय ले जाने के बजाय पुलिस लाइंस पहुंचा दिया। बाद में देर शाम उसे कोर्ट में पेश करने की तैयारी की गई। इस दौरान आक्रोशित अधिवक्ताओं ने कचहरी रोड पर जाम लगाकर अपना विरोध भी दर्ज कराया।
पहले भी दुष्कर्म के आरोप में निलंबित हो चुका था आरोपी
गाजीपुर जिले के सादियाबाद थाना क्षेत्र के चौरा हंसराजपुर गांव निवासी अभिषेक यादव वर्ष 2016 में पुलिस विभाग में भर्ती हुआ था और 2018 बैच का सिपाही है। वर्तमान में उसकी तैनाती डायल-112 में थी। फरवरी 2025 में भी उस पर पश्चिम बंगाल की एक युवती के अपहरण और दुष्कर्म का आरोप लगा था। उस मामले में उसे निलंबित किया गया था लेकिन सितंबर 2025 में उसकी बहाली कर दी गई थी। अब इस पुराने मामले के सामने आने के बाद विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
अंतिम संस्कार के दौरान घरवालों का गुस्सा फूटा
पोस्टमार्टम के बाद शाम को बालिका का शव राजघाट स्थित राप्ती तट पर अंतिम संस्कार के लिए पहुंचा। इस दौरान परिजन ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई और हंगामा किया। अधिकारियों के समझाने के बाद अंतिम संस्कार कराया गया।
गर्भवती मां की बिगड़ी तबीयत
घटना की जानकारी मिलने के बाद बच्ची की गर्भवती मां सदमे में आ गईं। उनकी हालत बिगड़ने पर बृहस्पतिवार सुबह उन्हें शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।
एक सप्ताह में चार्जशीट का दावा
एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने बताया कि आरोपी सिपाही को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है। अपहरण की प्राथमिकी में हत्या, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट की धाराएं बढ़ा दी गई हैं। 24 घंटे के भीतर आरोपी की बर्खास्तगी की प्रक्रिया पूरी कर ली गई। साथ ही एक सप्ताह के भीतर चार्जशीट दाखिल कर फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमे का विचारण कराते हुए कठोर सजा दिलाने की कोशिश की जाएगी।