गोरखपुर: कोरोना की मार से अब तक उबर नहीं सके उद्योग, 25 प्रतिशत ही हो रहा है उत्पादन
गोदामों में रखे तैयार उत्पादों से ही हो जा रही बाजार की मांग पूरी, फैक्ट्रियों में क्षमता का 25 प्रतिशत ही हो रहा है उत्पादन।
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कोरोना की मार से जिले के उद्योग अब तक उबर नहीं सके हैं। गोदाम में रखे उत्पादों से ही बाजार की मांग पूरी हो जा रही है। ज्यादातर फैक्ट्रियों में क्षमता के सापेक्ष 25 प्रतिशत ही उत्पादन हो पा रहा है। कोरोना की दूसरी लहर बीते दो महीने हो चुके हैं, लेकिन बाजार में मांग नहीं बढ़ रही है। स्थिति यह है कि प्लास्टिक, रेडीमेड गारमेंट के अलावा निर्माण संबंधी करीब-करीब सभी उद्योगों में उत्पादन की रफ्तार धीमी पड़ चुकी है।
गीडा के अधिकतर उद्योगों का हाल यह है कि गोदामों में रखे स्टॉक से ही काम चल जा रहा है। कोरोना की तीसरी लहर की आशंका की वजह से सामान्य तौर पर लोगों ने अपने खर्चों को काफी हद तक सीमित कर दिया है। किसी अनिष्ट की आशंका में लोग रुपयों की बचत को प्राथमिकता दे रहे हैं। लिहाजा बाजारों में खरीदारी काफी हद तक ठप है और उद्योग बेहाल हैं।
स्कूल बंद होने से टेक्सटाइल उद्योग की हालत खस्ता
कारीवाल टेक्सटाइल एमडी दीपक कारीवाल ने कहा कि गोरखपुर के 80 प्रतिशत टेक्सटाइल उद्योग स्कूलों पर निर्भर हैं। कोरोना की वजह से स्कूल बंद होने से इन उद्योगों की हालत खराब है। पिछले वर्ष तक सरकारी स्कूलों में यूनिफार्म की सप्लाई होने से स्थिति थोड़ी ठीक थी। इस बार सरकार ने सीधे विद्यार्थियों के खाते में रकम देने की घोषणा कर दी है। ऐसे में कारोबार के लिए अन्य प्रदेशों पर निर्भरता है।
सरकारी निर्माण में तेजी की जरूरत
वेल्ड इंडिया के निदेशक आरएन सिंह ने कहा कि निर्माण संबंधी उद्योगों की स्थिति काफी खराब है। बाजार में मांग नहीं है। फिलहाल बहुत ही कम उत्पादन किया जा रहा है। गोदाम में पड़े स्टॉक से ही काम चलाया जा रहा है। सरकार को कुछ राहत भरे कदम उठाने चाहिए। साथ ही सरकारी निर्माण कार्य में तेजी लानी चाहिए। ऐसे करने पर ही निर्माण से जुड़े उद्योगों की स्थिति कुछ बेहतर हो सकेगी।
समारोहों के सीमित होने से पैकेजिंग इंडस्ट्री बेहाल
श्री सिद्धेश्वरी उद्योग एमडी हिमांशु टिबड़ेवाल ने कहा कि प्लास्टिक एवं पैकेजिंग इंडस्ट्रीज की स्थिति काफी खराब है। फैक्ट्री संचालन में भी मुश्किल आ रही है। पैकेजिंग मैटेरियल और पेपर डिस्पोजिबल आइटम तैयार होते हैं। सामान्य तौर पर इनकी मांग किसी विवाह या अन्य समारोह में होती है। इन दिनों कोरोना प्रोटोकॉल की वजह से समारोह आयोजित नहीं हो रहे हैं, इस वजह से मांग घटकर 25 प्रतिशत रह गई है।
मकान नहीं बन रहे, उत्पादन पड़ा धीमा
एसके केमिकल्स एमडी एसके अग्रवाल ने कहा कि आदमी की मूलभूत जरूरतें रोटी, कपड़ा और मकान है। कोरोना संक्रमण के दौर में रोटी यानी खान-पान से संबंधित उद्योगों की स्थिति कुछ हद तक ठीक रही, लेकिन मकान और कपड़ा संबंधी उद्योगों की स्थिति काफी खराब है। मकान बन नहीं रहे हैं। ऐसे में इससे संबंधित उद्योगों में उत्पादन करीब-करीब बंद है। कपड़ा उद्योगों की स्थिति भी ऐसी ही है।