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देखने में ही आसान लगती है भारतीय ज्ञान पंरपरा : प्रो. कपिल कपूर
Fri, 05 Jan 2024 01:32 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Fri, 05 Jan 2024 01:32 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। भारतीय ज्ञान की दीर्घ व विस्तृत परंपरा रही है। यह देखने में बहुत आसान लग सकती है। लेकिन, इसमें जितना आप अंदर प्रवेश करेंगे वह गूढ़ होती जाएगी। ये बातें पद्म भूषण प्रो. कपिल कपूर ने कही।
वे यूजीसी से संबद्ध पं. मदन मोहन मालवीय मिशन टीचर्स ट्रेनिंग द्वारा नेशनल एजुकेशन पाॅलिसी 2020 के विषय में जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। आठ दिवसीय कार्यशाला का उद् घाटन बृहस्पतिवार को किया गया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्वपूर्ण घटकों को भारतीय शब्दकोश से ही समझना उचित रहेगा। कहा कि धर्म और रिलिजन में मूलभूत अंतर है। इसे अपने व्याख्यान में विस्तार से बताया।
संस्थान के निदेशक प्रो. सुनीता मुर्मू ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया। कार्यक्रम के संयोजक अंग्रेजी विभाग के डॉ. अमोद कुमार राय ने विषय का प्रस्ताव रखा। कार्यक्रम में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन, प्रो. सुधीर श्रीवास्तव, प्रो. शिखा सिंह, प्रो. गौर हरी बेहरा भी जुड़े थे। बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालय में अध्यापन कार्य कर रहे प्रतिभागी गण भी जुड़े थे।
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गोरखपुर। भारतीय ज्ञान की दीर्घ व विस्तृत परंपरा रही है। यह देखने में बहुत आसान लग सकती है। लेकिन, इसमें जितना आप अंदर प्रवेश करेंगे वह गूढ़ होती जाएगी। ये बातें पद्म भूषण प्रो. कपिल कपूर ने कही।
वे यूजीसी से संबद्ध पं. मदन मोहन मालवीय मिशन टीचर्स ट्रेनिंग द्वारा नेशनल एजुकेशन पाॅलिसी 2020 के विषय में जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। आठ दिवसीय कार्यशाला का उद् घाटन बृहस्पतिवार को किया गया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्वपूर्ण घटकों को भारतीय शब्दकोश से ही समझना उचित रहेगा। कहा कि धर्म और रिलिजन में मूलभूत अंतर है। इसे अपने व्याख्यान में विस्तार से बताया।
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संस्थान के निदेशक प्रो. सुनीता मुर्मू ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया। कार्यक्रम के संयोजक अंग्रेजी विभाग के डॉ. अमोद कुमार राय ने विषय का प्रस्ताव रखा। कार्यक्रम में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन, प्रो. सुधीर श्रीवास्तव, प्रो. शिखा सिंह, प्रो. गौर हरी बेहरा भी जुड़े थे। बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालय में अध्यापन कार्य कर रहे प्रतिभागी गण भी जुड़े थे।
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