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UP Nikay Chunav 2023: गोरखपुर नगर निगम बोर्ड बनाने में निर्दलीय पार्षद हो सकते हैं बड़ी भूमिका में

Mon, 08 May 2023 12:46 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 08 May 2023 12:46 PM IST
सार

नगर निगम चुनाव को गोरखपुर में भाजपा ने हमेशा पूरी दमदारी से लड़ा है। अपना मेयर बनाने में तो कई बार सफलता मिल चुकी है, लेकिन अब तक बोर्ड बनाने का सपना पूरा नहीं हो सका है। इसके लिए उसे हर बार सपा के प्रत्याशियों से कड़ी चुनौती मिली है। हालांकि, बोर्ड तो सपा भी कभी नहीं बना सकी लेकिन, खेल बिगाड़ने में उसे हर बार सफलता मिलती रही है।

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Independent councilors can play big role in making Gorakhpur Municipal Corporation Board
गोरखपुर नगर निगम। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नगर निगम बोर्ड बनाने में इस बार फिर निर्दलीय खेवनहार की भूमिका में हो सकते हैं। कम मतदान के चलते सभी राजनीतिक दलों के समीकरण अब बिगड़ गए हैं। भाजपा के बागी और दस नए वार्ड में निर्दलीय मुख्य लड़ाई में हैं। ऐसे में किसी भी दल को पूर्ण बहुमत मिलने की उम्मीद नहीं दिख रही है।

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नगर निगम बोर्ड में बहुमत के लिए 41 पार्षद के सदस्य की जरूरत है। अब तक इस आंकड़े को कोई भी राजनीतिक दल छू नहीं पाया है। पिछली बार भी भाजपा को निर्दलीय की मदद से ही बोर्ड बनानी पड़ी थी। भाजपा के 22 सदस्य जीते थे और छह बागी बनकर लड़े थे जो बाद भाजपा में वापस हो गए थे। इस बार भी तस्वीर साफ नहीं है। कान्हा उपवन नगर वार्ड में भाजपा प्रत्याशी का निर्दल प्रत्याशी के बीच कांटे की टक्कर मानी जा रही है।
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वहीं, नकहा और शिवाजी नगर में भी भाजपा और सपा प्रत्याशियों को निर्दल प्रत्याशी चुनौती दे रहे हैं। भाजपा के बागी प्रत्याशी राजेश तिवारी और जितेंद्र वर्मा पल्लू भी भाजपा की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। वीर शिवाजी नगर से निर्दल प्रत्याशी सौरभ विश्वकर्मा भी भाजपा प्रत्याशी से कांटे के मुकाबले में हैं। नकहा वार्ड से भी भाजपा प्रत्याशी कांटे के मुकाबले में फंसे हुए हैं।

पंडित रामप्रसाद बिस्मिल नगर वार्ड से भी निर्दल प्रत्याशी अफरोज गब्बर की पत्नी कांटे के मुकाबले में है। इसके अलावा नए जुड़े हुए वार्ड में भी पूर्व प्रधानों का पलड़ा भारी है, जिनमें अधिकांश निर्दल हैं। इन पहलुओं पर गौर करें तो नगर निगम में किसी को बहुमत मिलने का संकेत नहीं दिख रहा है।

 

अब तक पूरा नहीं हो सका है किसी भी दल का पूर्ण बहुमत वाले बोर्ड का सपना

नगर निगम चुनाव को गोरखपुर में भाजपा ने हमेशा पूरी दमदारी से लड़ा है। अपना मेयर बनाने में तो कई बार सफलता मिल चुकी है, लेकिन अब तक बोर्ड बनाने का सपना पूरा नहीं हो सका है। इसके लिए उसे हर बार सपा के प्रत्याशियों से कड़ी चुनौती मिली है। हालांकि, बोर्ड तो सपा भी कभी नहीं बना सकी लेकिन, खेल बिगाड़ने में उसे हर बार सफलता मिलती रही है।

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पिछले तीन चुनाव में सपा प्रत्याशियों से मिलती रही है कड़ी टक्कर
निगम के पिछले तीन चुनाव में बोर्ड बनाने की चर्चा करें तो हर बार भाजपा बोर्ड बनाने के करीब तक पहुंच गई लेकिन निर्दलीय ही सहारा बने। 2006 के निगम चुनाव में परिसीमन के बाद कुल 70 वार्ड के लिए चुनाव हुआ, जिसमें भाजपा के 26 प्रत्याशी ही जीतने में सफल हो सके। उस बार सपा के 24 पार्षद चुने गए थे। उस समय प्रदेश में सपा की सरकार थी। 2017 के चुनाव में भाजपा ने जिताऊ प्रत्याशी के चयन को लेकर काफी सतर्कता बरती तो पार्टी की स्थिति थोड़ी बेहतर हुई। भाजपा को 28 सीटें मिली, जबकि सपा के 21 पार्षद जीतकर सदन में पहुंचे।

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