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Gorakhpur News: शारीरिक श्रम बढ़ाएं, एंटीबायोटिक दवाओं का कम करें प्रयोग

Sat, 23 Dec 2023 01:13 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 23 Dec 2023 01:13 AM IST
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Increase physical exertion, reduce use of antibiotics
बाबा गंभीर नाथ प्रेक्षागृह में मधुमेह पर शुरू हुए तीन दिवसीय सेमीनार में बोले विशेषज्ञ
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तेजी से मधुमेह के शिकार हो रहे युवा, 10 साल में 25 फीसदी बढ़ी संख्या
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। मधुमेह की बीमारी युवाओं को भी चपेट में ले रही है। इसकी मुख्य वजह शारीरिक श्रम में कमी, खान-पान की गलत आदतें और एंटीबायोटिक दवाओं का बढ़ता प्रभाव है। 10 साल में देश भर में डायबिटीज पीड़ित युवाओं की संख्या में 25 फीसदी का इजाफा हुआ है। अगर इस स्थिति से बचना है तो खेलकूद गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ ही एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग में कमी लानी होगी।
मधुमेह पर यह चर्चा शुक्रवार से बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में शुरू हुए तीन दिवसीय प्रांतीय सेमिनार में आए देश भर के विशेषज्ञों के बीच रही। उत्तर प्रदेश डायबिटीज एसोसिएशन की तरफ से आयोजित इस सेमिनार को संबोधित करते हुए बंगलूरू के डायबिटीज विशेषज्ञ डॉ. अरविंद जगदीश ने कहा कि पिछले 10 से 15 वर्षों में तस्वीर तेजी से बदली है।
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अब डायबिटीज पीड़ितों की औसत उम्र में लगातार गिरावट हो रही है। इसकी वजह युवाओं का शारीरिक श्रम कम करना, धूप में न निकलना, एसी में रहना, फास्टफूड व सॉफ्ट ड्रिंक का सेवन अधिक करना है। यह युवाओं में दिल की बीमारी का कारण बन रहा है। खान पान में लापरवाही के चलते युवाओं में कोलेस्ट्रॉल व बीपी की समस्या हो रही है।
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वाराणसी से आए डॉ. मधुकर राय ने बताया कि डायबिटीज संकेत जरूर देता है। जिनके परिवार में यह बीमारी पहले से है, उन्हें हमेशा सतर्क रहना चाहिए। इसके अलावा प्यास ज्यादा लगे, बार-बार पेशाब हो, वजन कम होने लगे, घाव न भरें, यूरिन ट्रैक इन्फेक्शन व जननांगों में संक्रमण जैसे लक्षण दिखे तो जांच करा इन संकेतों की पहचान जरूरी है।
नोएडा के डॉ. सौरभ श्रीवास्तव ने बताया कि शुगर के कारण हड्डियों की बीमारी होती है। आस्टियोपोरोसिस की मुख्य वजह डायबिटीज है। इससे हड्डियों में क्षरण होता है। मरीज को चलने में दिक्कत होती है।
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शाॅर्ट टर्म मरीजों में बंद हो सकता है इंसुलिन
प्रयागराज की डॉ. अनुभा श्रीवास्तव ने बताया कि डायबिटीज का कारण शरीर में इंसुलिन का कम बनना है। शरीर में इंसुलिन बनाने का काम पैंक्रियाज करती है। शरीर में इंसुलिन का उत्पादन कम होने से शुगर लेवल बढ़ जाता है। इसको संतुलित करने के लिए मरीजों को इंसुलिन की सलाह दी जाती है। उन्होंने बताया कि कुछ मरीजों को शॉर्ट टर्म डायबिटीज होता है। जिनमें गर्भवती महिलाएं, लिवर, किडनी के मरीजों के अलावा संक्रमण के मरीज शामिल हैं। इन मरीजों को कुछ दिनों के लिए इंसुलिन दी जाती है। उसके बाद उनकी बीमारी स्वत: ठीक हो जाती है। जिन मरीजों में 10 साल से अधिक समय से डायबिटीज बना हुआ है। उनका इंसुलिन बंद नहीं होता।

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एंटीबायोटिक दवाएं भी डाल रहीं असर
आयोजन समिति से जुड़े डॉ. आरपी त्रिपाठी ने बताया कि सेमिनार में कुल चार विषयों आंत में रहने वाले माइक्रो फ्लोरा का मधुमेह से संबंध, लिवर की बीमारियां एवं मधुमेह, इंसुलिन की शुरुआत कब और कैसे करें व मधुमेह के नाते होने वाले गुर्दे की बीमारियों का निदान और उपचार पर गहन चर्चा की गई। लगभग 200 चिकित्सकों ने इसमें हिस्सा लिया। विशेषज्ञों ने बताया कि आंत में कई ऐसे बैक्टीरिया होते हैं, जो इंसुलिन निर्माण में सहायक होते हैं। एंटी बायोटिक दवाओं से ये बैक्टीरिया समाप्त हो जाते हैं। इस वजह से भी शुगर लेवल बढ़ जाता है।
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