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रहें होशियार: पाउडर वाले दूध से बना रहे पनीर, फैट के लिए डाल रहे रिफाइंड- जानिए कैसे करते हैं मिलावट

Sun, 06 Jul 2025 01:43 PM IST
रोहित सिंह अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर Published by: रोहित सिंह Updated Sun, 06 Jul 2025 01:43 PM IST
सार

सुरेश की मानें तो पनीर बनाने में सबसे अधिक उपयोग पाउडर वाले दूध का होता है। इस दूध को गाढ़ा बनाने के लिए इसमें सोयाबीन का पाउडर मिलाया जाता है। पाउडर वाले दूध में फैट नहीं होता, जबकि पनीर या खोवा बनाने के लिए फैट जरूरी होता है। इसके लिए घी का प्रयोग आवश्यक है, लेकिन इससे लागत बढ़ेगी।

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In Gorakhpur, they are making paneer from powdered milk and using refined oil for fat
पनीर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

 कहावत है कि एक झूठ को छिपाने के लिए सौ झूठ बोलने पड़ते हैं। वैसे ही पनीर में एक को छिपाने के लिए 10 और मिलावट की जा रही है। पाउडर वाले दूध से पनीर बनाने में फैट जरूर मिलता है, लेकिन इसमें घी की जगह रिफाइंड ऑयल डाला जा रहा है। इसकी वजह से जो कसैलापन आता है, उसे दूर करने के लिए धंधेबाज सैकरीन डालते हैं।
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शुद्ध पनीर बनाने के कारीगर सुरेश गुप्ता के अनुसार, रिफाइंड और सैकरीन की वजह से पनीर का रंग पीला न पड़े, इसलिए धंधेबाज उसमें डिटर्जेंट मिला रहे हैं। इन सबकी वजह से पनीर से प्रोटीन की जगह लिवर की बीमारी मिल रही है।
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शाकाहारियों में प्रोटीन के लिए सबसे अधिक डिमांड पनीर की है। इसके अलावा हर बड़े भोज में जायके के लिए दाल व सब्जी के साथ पनीर का एक आइटम भी जरूर रखा जाता है। इस वजह से शहर में रोजाना करीब 300 क्विंटल पनीर की खपत होती है। अकेले खोवा मंडी से हर दिन करीब 30 क्विंटल पनीर बिक जाता है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्र के खजनी से शहर में सबसे अधिक पनीर आता है।
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पनीर में इन सामग्रियों की हो रही मिलावट
सुरेश की मानें तो पनीर बनाने में सबसे अधिक उपयोग पाउडर वाले दूध का होता है। इस दूध को गाढ़ा बनाने के लिए इसमें सोयाबीन का पाउडर मिलाया जाता है। पाउडर वाले दूध में फैट नहीं होता, जबकि पनीर या खोवा बनाने के लिए फैट जरूरी होता है। इसके लिए घी का प्रयोग आवश्यक है, लेकिन इससे लागत बढ़ेगी।

लिहाजा मिलावटखोर इसमें घी की जगह रिफाइंड डालते हैं। इसकी वजह से दूध में कड़वाहट आ जाती है। कड़वाहट को कम करने के लिए थोड़ी मात्रा में सैकरीन मिलाया जाता है। अब रिफाइंड व सैकरीन की वजह से दूध का रंग हल्का पीला पड़ जाता है, इसीलिए इसमें डिटर्जेंट मिलाते हैं।

दूध का कम उत्पादन है मिलावट की सबसे बड़ी वजह
घर हो या दुकान, हर जगह दूध व दूध से बने उत्पाद की मांग तो खूब है, लेकिन उस अनुरूप दूध का उत्पादन नहीं है। जिले में हर दिन करीब नौ लाख लीटर दूध की खपत घरों व दुकानों में है, जबकि केवल लगभग तीन लाख लीटर ही उत्पादन है। अब गीडा में दो फैक्टरियां भी खुल गई हैं, जिन्हें हर दिन करीब पांच लाख लीटर दूध की जरूरत पड़ रही है।

इन कंपनियों को दूसरे जिलों से दूध खरीदना पड़ रहा है। इसके अलावा खजनी इलाके से भी दूध खरीदा जा रहा है। ऐसे में दूध की किल्लत बढ़ती जा रही है। इस डिमांड को ही पूरा करने के लिए पाउडर वाले दूध की मांग बढ़ी है।

सेहत के लिए हानिकारक है मिलावटी पनीर
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के डॉ. राजकिशोर का कहना है कि पनीर में जिस तरह से केमिकल और डिटर्जेंट आदि के मिलावट की बात सामने आ रही है, वह चिंताजनक है। पनीर का प्रयोग प्रोटीन की पूर्ति के लिए होता है, जबकि केमिकलयुक्त यह पदार्थ लिवर को खराब कर देगा।

ओपीडी में अक्सर ऐसे मरीज आ रहे हैं, जिन्हें पेट संबंधी दिक्कतें होती हैं। पनीर खाने से अपच आदि की जो शिकायत आती है, उसकी जड़ में सबसे प्रमुख वजह यही होता है कि पनीर बनाने में प्रयुक्त केमिकल पेट में जाकर एसिडिटी को बढ़ाता है। इस वजह से कई बार फूड प्वाइजनिंग तक हो जाती है।

एक्सपायर्ड कोल्ड ड्रिंक्स नष्ट कराया, पनीर का भी नमूना लिया
 मिलावटी पनीर पर रोकथाम के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग ने अभियान शुरू किया है। इसके तहत शनिवार को तीन दुकानों से पनीर का नमूना लिया गया। इसमें से एक दुकान खोवा मंडी की है, जबकि दो अन्य दुकानें शहर के अलग-अलग हिस्सों में हैं। इसके अलावा बीआरडी मेडिकल कॉलेज रोड स्थित एक प्रॉविजन स्टोर में मिले 40 बोतल एक्सपायर्ड कोल्ड ड्रिंक्स को भी नष्ट कराया गया।


कोल्ड ड्रिंक्स पर पहले भी कार्रवाई हो चुकी है। खाद्य सुरक्षा विभाग के सहायक आयुक्त डॉ. सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि एक्सपायर्ड कोल्ड ड्रिंक्स बेचने की शिकायत पर जांच की गई। इसके अलावा पनीर में मिलावट की जांच के लिए हर दिन नमूने एकत्रित किए जा रहे हैं।
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