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मिलावट का खेल : मिलावटी निकला पनीर...केमिकल से रंग रहे मटर दाल और रोस्टेड चना- जून में लिए गए थे सैंपल

Tue, 11 Nov 2025 01:59 PM IST
रोहित सिंह अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर Published by: रोहित सिंह Updated Tue, 11 Nov 2025 01:59 PM IST
सार

पिछले साल दाल के 54 नमूनों में से 30 में मिलावट पाई गई है। 10 नमूने अखाद्य श्रेणी में पाए गए हैं। अप्रैल से अगस्त के बीच लिए गए 22 नमूनों में से तीन को असुरक्षित घोषित किया गया जबकि नौ नमूनों में मिलावट की पुष्टि हुई। मतलब साफ है कि बाजार में बिक रही करीब 68 प्रतिशत दाल खाने लायक नहीं बची है।

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In Gorakhpur, adulterated cheese, peas, and chickpeas were found to be chemically colored
पनीर का नमूना लेकर उसे सील करते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

धंधेबाजों ने पनीर ही नहीं मटर दाल और रोस्टेड चना में भी मिलावट कर दी है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने जून में चार नमूने लिए थे। तब टीम ने 30 किलो पनीर मौके पर नष्ट कराया था। अब प्रयोगशाला की रिपोर्ट आ गई है। रिपोर्ट के अनुसार पनीर, नमकीन, मटर दाल और रोस्टेड चना के नमूनों को जांच में असुरक्षित घोषित किया गया है।
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सभी में मिलावट की पुष्टि हुई है। इस पर विभाग ने संबंधित दुकानदारों को 30 दिन के अंदर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का नोटिस जारी किया है।

रिपोर्ट से पता चला है कि पनीर बनाने के लिए धंधेबाज पाउडर दूध में रिफाइंड ऑयल और डिटर्जेंट मिला रहे हैं तो मटर दाल को चमकाने के लिए पीले रंग (टाट्राजीन) से पॉलिश किया जा रहा है। यह सेहत को बनाने की जगह बिगाड़ देगा। मिलावटी पनीर खाने से लिवर खराब हो सकता है। वहीं, पॉलिश वाली मटर दाल से लकवा और गठिया से जुड़ीं बीमारियां हो सकती हैं।

पिछले साल दाल के 54 नमूनों में 30 में मिली मिलावट
पिछले साल दाल के 54 नमूनों में से 30 में मिलावट पाई गई है। 10 नमूने अखाद्य श्रेणी में पाए गए हैं। अप्रैल से अगस्त के बीच लिए गए 22 नमूनों में से तीन को असुरक्षित घोषित किया गया जबकि नौ नमूनों में मिलावट की पुष्टि हुई। मतलब साफ है कि बाजार में बिक रही करीब 68 प्रतिशत दाल खाने लायक नहीं बची है।


 
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जून में लिए गए पनीर, नवरत्न नमकीन क्रेजी ब्रांड, मटर दाल और रोस्टेड चना के नमूने जांच में अधोमानक पाए गए हैं। दुकानदारों को नोटिस देकर जवाब मांगा गया है। विभाग की ओर से शुद्ध एवं सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है।

साथ ही लोगों से कहा जा रहा है कि वे खाद्य सामग्री खरीदते समय एफएसएसएआई लाइसेंस संख्या, निर्माण तिथि एवं गुणवत्ता विवरण अवश्य जांचें ताकि मिलावटी या असुरक्षित खाद्य पदार्थों से बचा जा सके। लोगों को भी सलाह दी गई है कि दाल खरीदते समय यह चेक कर लें कि उसे रंगा तो नहीं गया। अगर कोई आशंका है तो शिकायत करें। शिकायतकर्ता का नाम गोपनीय रखते हुए जांच कर कार्रवाई होगी: डॉ. एसके सिंह, सहायक आयुक्त, खाद्य सुरक्षा
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किडनी और लिवर के लिए नुकसानदायक है केमिकल वाला रंग

दाल प्रोटीन का सबसे बड़ा स्रोत है। इसमें कृत्रिम रंग और रसायनों का इस्तेमाल शरीर के लिए बेहद हानिकारक है। लंबे समय तक ऐसी दाल का सेवन करने से किडनी और लिवर पर बुरा असर पड़ता है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए तो यह और भी खतरनाक है।

मिलावटी पनीर खाते ही पेट में दर्द, उल्टी-दस्त, अपच, एलर्जी या जी मिचलाने जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं। इसके अलावा किडनी और लिवर के लिए नकली पनीर घातक साबित हो सकता है। लंबे समय में नकली पनीर किडनी लिवर फेल का कारण भी बन सकता है। हाइड्रोजेनेटेड वेजिटेबल ऑयल नसों को ब्लॉक कर सकता है: डॉ. गौरव पांडेय, जनरल फिजिशियन
 
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