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Gorakhpur News: डीडीयू में जिस कॉलेज में पीजी की पढ़ाई वहीं मिलेगी चार वर्षीय डिग्री
Sat, 15 Jun 2024 04:20 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Sat, 15 Jun 2024 04:20 AM IST
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गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में इस सत्र से चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम लागू होगा। इसे विद्या परिषद से मंजूरी मिल गई है। अब विद्यार्थियों को चार साल की पढ़ाई पूरी करने के बाद ऑनर्स डिग्री मिलेगी लेकिन यह केवल उन्हीं कॉलेजों में होगा जहां पर परास्नातक की पढ़ाई होती है। जिस कॉलेज में पीजी नहीं होगा वहां विद्यार्थियों को ऑनर्स डिग्री नहीं मिलेगी।
ऑनर्स विद रिसर्च की बात करें ताे यह केवल विश्वविद्यालय के छात्रों को मिलेगी। क्योंकि विश्वविद्यालय के अलावा किसी भी कॉलेज में रिसर्च सेंटर नहीं है। जिन कॉलेजों में परास्नातक पाठ्यक्रम संचालित करने को मंजूरी नहीं है उन्हें चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम ऑनर्स की डिग्री के लिए विश्वविद्यालय से अनुमति लेनी पड़ेगी।
दो वर्ष का कर सकेंगे परास्नातक
जिन कॉलेजों में पीजी नहीं है वहां के छात्रों को तीन साल बाद स्नातक की डिग्री दे दी जाएगी। यदि किसी विद्यार्थी ने तीन वर्ष में सात सीजीपीए से ऊपर ग्रेड प्राप्त किया है वो वह चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम ऑनर्स के साथ रिसर्च की डिग्री के लिए विश्वविद्यालय में प्रवेश ले सकता है। इसके अलावा उनके पास दो वर्ष के परास्नातक पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने का भी विकल्प मौजूद रहेगा।
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मल्टीपल एंट्री और एग्जिट
चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम में मल्टीपल एंट्री और एग्जिट की सुविधा मिलेगी। एक वर्ष बाद यदि कोई छात्र दूसरे संस्थान में प्रवेश लेना चाहता है तो उसे मिल जाएगा। इसके साथ ही विश्वविद्यालय भी हर साल मेरिट जारी करेगा ताकि कॉलेज के इच्छुक विद्यार्थी विश्वविद्यालय में प्रवेश ले सकें।
सुविधाएं बढ़ाकर दे सकते हैं ऑनर्स डिग्री
विश्वविद्यालय से संबद्ध किसी कॉलेज में यदि पीजी की पढ़ाई नहीं होती है और यदि वह संबंधित कोर्स से जुड़ी पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है तो विश्वविद्यालय उसे चार वर्षीय ऑनर्स स्नातक ऑनर्स के लिए अनुमति दे सकता है। सुविधाओं में स्टाफ और लैब आदि की व्यवस्था शामिल है।
चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम को विद्या परिषद से मंजूरी मिल गई है। इसमें विद्यार्थियों को मल्टीपल एंट्री और एग्जिट का मौका मिलेगा। ऑनर्स विद रिसर्च की डिग्री केवल विश्वविद्यालय परिसर के ही विद्यार्थियों को मिलेगी।
- प्रो. पूनम टंडन, कुलपति
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ऑनर्स विद रिसर्च की बात करें ताे यह केवल विश्वविद्यालय के छात्रों को मिलेगी। क्योंकि विश्वविद्यालय के अलावा किसी भी कॉलेज में रिसर्च सेंटर नहीं है। जिन कॉलेजों में परास्नातक पाठ्यक्रम संचालित करने को मंजूरी नहीं है उन्हें चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम ऑनर्स की डिग्री के लिए विश्वविद्यालय से अनुमति लेनी पड़ेगी।
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दो वर्ष का कर सकेंगे परास्नातक
जिन कॉलेजों में पीजी नहीं है वहां के छात्रों को तीन साल बाद स्नातक की डिग्री दे दी जाएगी। यदि किसी विद्यार्थी ने तीन वर्ष में सात सीजीपीए से ऊपर ग्रेड प्राप्त किया है वो वह चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम ऑनर्स के साथ रिसर्च की डिग्री के लिए विश्वविद्यालय में प्रवेश ले सकता है। इसके अलावा उनके पास दो वर्ष के परास्नातक पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने का भी विकल्प मौजूद रहेगा।
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मल्टीपल एंट्री और एग्जिट
चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम में मल्टीपल एंट्री और एग्जिट की सुविधा मिलेगी। एक वर्ष बाद यदि कोई छात्र दूसरे संस्थान में प्रवेश लेना चाहता है तो उसे मिल जाएगा। इसके साथ ही विश्वविद्यालय भी हर साल मेरिट जारी करेगा ताकि कॉलेज के इच्छुक विद्यार्थी विश्वविद्यालय में प्रवेश ले सकें।
सुविधाएं बढ़ाकर दे सकते हैं ऑनर्स डिग्री
विश्वविद्यालय से संबद्ध किसी कॉलेज में यदि पीजी की पढ़ाई नहीं होती है और यदि वह संबंधित कोर्स से जुड़ी पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है तो विश्वविद्यालय उसे चार वर्षीय ऑनर्स स्नातक ऑनर्स के लिए अनुमति दे सकता है। सुविधाओं में स्टाफ और लैब आदि की व्यवस्था शामिल है।
चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम को विद्या परिषद से मंजूरी मिल गई है। इसमें विद्यार्थियों को मल्टीपल एंट्री और एग्जिट का मौका मिलेगा। ऑनर्स विद रिसर्च की डिग्री केवल विश्वविद्यालय परिसर के ही विद्यार्थियों को मिलेगी।
- प्रो. पूनम टंडन, कुलपति