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Gorakhpur News: लोकतंत्र में असहमति मंजूर, तथ्यों से परे आरोप नहीं
Sat, 24 Oct 2026 02:51 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Sat, 24 Oct 2026 02:51 AM IST
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गोरखपुर। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चल रही बहस के बीच अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने मतदाता सूची की शुद्धता, मताधिकार की सुरक्षा और निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर चर्चा की। शुक्रवार को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कमेटी हॉल में आयोजित राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में वक्ताओं ने कहा कि एसआईआर पर विमर्श तथ्यों, सांविधानिक प्रावधानों और लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर होना चाहिए।
अभाविप के आयाम शोध कार्य के तत्वावधान में सम्मेलन दो सत्रों में आयोजित हुआ। राष्ट्रीय संगठन मंत्री आशीष चौहान ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति, आलोचना और वैचारिक बहस का स्वागत होना चाहिए, लेकिन इनका आधार तथ्य, तर्क और सांविधानिक मर्यादाएं होनी चाहिए। आरोपों के साथ प्रमाण और तर्क भी जरूरी हैं।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक के पूर्व कुलपति प्रो. एसपीएम त्रिपाठी ने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता और पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकार का संरक्षण निष्पक्ष चुनाव के लिए महत्वपूर्ण है।
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गोरखपुर विश्वविद्यालय के विधि विभाग के सहायक आचार्य डॉ. शैलेश सिंह ने कहा कि एसआईआर को राजनीतिक नजरिए के बजाय सांविधानिक प्रावधानों और निर्वाचन व्यवस्था की विश्वसनीयता के संदर्भ में समझना चाहिए। बुद्धा पीजी कॉलेज के सहायक आचार्य डॉ. जितेंद्र मिश्रा ने कहा कि एसआईआर के प्रत्येक चरण में पारदर्शिता, सत्यापन और जवाबदेही महत्वपूर्ण हैं। दोनों सत्रों में शोधार्थियों ने एसआईआर की सांविधानिक वैधता, मतदाता सूची की शुद्धता, मताधिकार की सुरक्षा और निर्वाचन आयोग की भूमिका से जुड़े सवाल पूछे। वक्ताओं ने उनके प्रश्नों के जवाब दिए। पहले सत्र का संचालन अभाविप गोरखपुर महानगर के उपाध्यक्ष डॉ. दीपेंद्र मोहन सिंह और दूसरे सत्र का संचालन अभाविप गोरक्ष प्रांत के उपाध्यक्ष डॉ. निगम मौर्य ने किया। कार्यक्रम में अभाविप गोरक्ष प्रांत के अध्यक्ष डॉ. राकेश प्रताप सिंह, क्षेत्रीय संगठन मंत्री घनश्याम शाही, क्षेत्रीय छात्रा प्रमुख प्रो. सुषमा पांडेय, प्रो. विनय सिंह और प्रांत संगठन मंत्री पुनीत अग्रवाल, प्रांत मीडिया संयोजक शिवम पांडेय सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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अभाविप के आयाम शोध कार्य के तत्वावधान में सम्मेलन दो सत्रों में आयोजित हुआ। राष्ट्रीय संगठन मंत्री आशीष चौहान ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति, आलोचना और वैचारिक बहस का स्वागत होना चाहिए, लेकिन इनका आधार तथ्य, तर्क और सांविधानिक मर्यादाएं होनी चाहिए। आरोपों के साथ प्रमाण और तर्क भी जरूरी हैं।
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इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक के पूर्व कुलपति प्रो. एसपीएम त्रिपाठी ने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता और पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकार का संरक्षण निष्पक्ष चुनाव के लिए महत्वपूर्ण है।
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गोरखपुर विश्वविद्यालय के विधि विभाग के सहायक आचार्य डॉ. शैलेश सिंह ने कहा कि एसआईआर को राजनीतिक नजरिए के बजाय सांविधानिक प्रावधानों और निर्वाचन व्यवस्था की विश्वसनीयता के संदर्भ में समझना चाहिए। बुद्धा पीजी कॉलेज के सहायक आचार्य डॉ. जितेंद्र मिश्रा ने कहा कि एसआईआर के प्रत्येक चरण में पारदर्शिता, सत्यापन और जवाबदेही महत्वपूर्ण हैं। दोनों सत्रों में शोधार्थियों ने एसआईआर की सांविधानिक वैधता, मतदाता सूची की शुद्धता, मताधिकार की सुरक्षा और निर्वाचन आयोग की भूमिका से जुड़े सवाल पूछे। वक्ताओं ने उनके प्रश्नों के जवाब दिए। पहले सत्र का संचालन अभाविप गोरखपुर महानगर के उपाध्यक्ष डॉ. दीपेंद्र मोहन सिंह और दूसरे सत्र का संचालन अभाविप गोरक्ष प्रांत के उपाध्यक्ष डॉ. निगम मौर्य ने किया। कार्यक्रम में अभाविप गोरक्ष प्रांत के अध्यक्ष डॉ. राकेश प्रताप सिंह, क्षेत्रीय संगठन मंत्री घनश्याम शाही, क्षेत्रीय छात्रा प्रमुख प्रो. सुषमा पांडेय, प्रो. विनय सिंह और प्रांत संगठन मंत्री पुनीत अग्रवाल, प्रांत मीडिया संयोजक शिवम पांडेय सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।