अवैध खनन: शाम ढलते ही छलनी होने लगती है राप्ती, चार की परमिशन लेकर खुदाई करते हैं 20 फीट, सबका बना है बही खाता
हजनवां तहसील का बड़गहन, कैंपियरगंज तहसील का तुर्कवलिया, सिसई घाट हो या फिर सदर तहसील का मोहरीपुर इलाका। सभी जगह एक या दो परमिट की आड़ में माफिया अपने अवैध धंधे को बेरोक-टोक चला रहे हैं।
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गोरखपुर में ठेका, अस्पताल, जमीन के धंधे में ही नहीं, जिले में मिट्टी-बालू के खनन में भी माफिया की गहरी पैठ है। राप्ती नदी को छलनी करने का धंधा शाम ढलते ही शुरू हो जाता है। सहजनवां तहसील का बड़गहन, कैंपियरगंज तहसील का तुर्कवलिया, सिसई घाट हो या फिर सदर तहसील का मोहरीपुर इलाका। सभी जगह एक या दो परमिट की आड़ में माफिया अपने अवैध धंधे को बेरोक-टोक चला रहे हैं। दिन के उजाले में एक-एक कर डंपर जाते हैं, तो रात के अंधेरे में गाड़ियों का रेला लग जाता है। फिर इनकी रफ्तार की जद में कोई आया तो उसकी मौत तय मानिए।
राप्ती नदी पर बड़गहन के पास शनिवार को दोपहर में एक-एक गाड़ियां मिट्टी लेकर जाती रहीं। बंधे के पास धूल का गुबार उड़ रहा था। लेकिन, जैसे ही शाम ढलने लगी गाड़ियों का रेला बढ़ने लगा। रात करीब 10 बजे एक साथ 15 से 20 डंपर व ट्रैक्टर ट्रॉली गुजरी तो एक बार सड़क पर आने वाले दूसरे वाहन रूक गए। सारे डंपर सड़क के बीचोंबीच जा रहे थे और पीछे की गाड़ियों को साइड भी नहीं दे रहे थे। लखनऊ से आ रही एक होंडा सिटी कार इन गाड़ियों को ओवरटेक करने के लिए आगे बढ़ी और टकराते-टकराते बची। इसके बाद सभी गाड़ियां डंपर से दूरी ही बनाकर चलने लगीं।
शनिवार को दोपहर करीब दो बजे कैंपियरगंज के तुर्कवलिया और ठाकुरनगर गांव में अवैध खनन हो रहा था। यहां ट्रैक्टर ट्राली पर जेसीबी से मिट्टी की खुदाई करके लोड किया जा रहा था। जिस रास्ते ये वाहन गुजर रहे थे वहां सड़क के पास एक चार पहिया में कुछ युवक पहरेदारी कर रहे थे। यानी कि अगर कोई गाड़ी को रोकता-टोकता है तो वे जाकर समझेंगे। ट्रैक्टर-ट्राली भी फुल स्पीड में लहराते हुए निकल रही थीं और तेज आवाज में चालक भोजुपरी गाने बजा रहे थे।
खनन के इस खेल में सबका बही खाता बना हुआ है। जितने की मिट्टी बिकती है खनन माफिया को उसका 30 फीसदी हिस्सा देना होता है। इसमें तहसील और पुलिस दोनों का हिस्सा शामिल है। अगर एक ट्राली मिट्टी की कीमत आठ सौ रुपये और एक डंपर मिट्टी की कीमत पांच हजार रुपये है तो इसी हिसाब से चढ़ावे की रकम भी तय होती है। हिसाब-किताब महीने में एक बार होता है। इस धंधे में ईमानदारी भी खूब है।
जहां भी खनन हो रहा है वहां के लिए नियम-कानून भी हैं। मसलन, सार्वजनिक रास्ते का इस्तेमाल न करना है। साथ ही जहां पर भवन हो, वहां पास में खनन पर रोक है। लेकिन, इन नियमों को दिन के उजाले में ही तोड़ा जाता है। जिस खनन विभाग के पास कार्रवाई की जिम्मेदारी है, वह आंख मूंदे बैठा है। गांव वालों को चुप कराने के लिए वहीं के दबंग लोगों को मेठ बना दिया गया है, ताकि विरोध करने की हिम्मत कोई न करे।
नियमों के मुताबिक, परमिट देते समय ही यह तय किया जाता है कि किस जगह पर कितनी गहराई तक खनन कराया जा सकता है। अगर किसी जगह पर चार फीट खनन का परमिट है, तो वहां 20 फीट खनन कर दिया जाता है। यानी 16 फीट मिट्टी ज्यादा निकाली जाती है और सरकारी खजाने में इसकी रायल्टी जमा नहीं होती है। जब भी शिकायत पर जांच होती है, उसे सांठगांठ से दबा दी जाती है। बचने के लिए तर्क दिया जाता है कि उस जगह पर पहले से 16 फीट गड्ढा था, इस वजह से 20 फीट गहरा हो गया। यानी झूठे तर्क से नियम-कानून को खारिज कर अवैध खनन का खेल जारी रखा जाता है।
जानकार बताते हैं कि इस तरह के अवैध खनन के खेल में सबसे अहम भूमिका खनन विभाग की होती है। विभाग की अनुमति के बिना यह संभव है नहीं। इसके लिए बाकायदा सरकारी सिस्टम से जुड़ा एक गिरोह काम करता है। विभाग का एक बाबू तय करता है कि कैसे और किसे परमिशन देनी है। इसके अलावा एक आदमी को परमिशन मिलते ही उसकी आड़ में तीन अन्य लोग जेसीबी से खनन कैसे करेंगे, यह भी वही तय करता है। फिर, संबंधित विभागों को साधा जाता है।
- परमिशन लेने वाले को ऐसी जगह से मिट्टी निकालनी होती है, जहां पर कोई सड़क, सार्वजनिक मार्ग, भवन या सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान न हो
- तय मानक से अधिक मिट्टी निकालने पर यह अवैध खनन होगा
- परमिशन के बाद भी अगर सरकार, न्यायालय का कोई नया आदेश आएगा तो उसका पालन करना होगा
- खनन के आसपास के खेतों को कोई नुकसान नहीं होना चाहिए
- खनन वाली जगह पर अगर पेड़ हो तो उसे नुकसान न पहुंचे
- पर्यावरण स्वच्छता प्रमाण पत्र के प्रभावी नियमों अधिसूचना एवं शर्तों के अनुसार खनन संविदा की जाएगी
कहीं भी अवैध खनन नहीं हो रहा है। सभी जगहों पर खनन करने वाले लोगों ने परमिट ले रखा है। बिना रायल्टी जमा कराए ईंट भट्ठा वाले मिट़टी की खुदाई करते हैं, ऐसी शिकायतें आई हैं, उनकी जांच कराई जा रही है। कमल कश्यप, खनन अधिकारी