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Gorakhpur News: भीड़ में जाने से लगता है डर तो आप अवसाद के शिकार

Thu, 14 Mar 2024 01:03 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर Updated Thu, 14 Mar 2024 01:03 AM IST
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If you feel afraid of going into a crowd, then you are a victim of depression.
सिद्धार्थनगर। अगर भीड़ में जाने से डर लगता है घबराहट होती या फिर किसी से बात करने का मन नहीं करता है तो यह अवसाद (डिप्रेशन) का लक्षण है। अगर आपके परिवार को कोई सदस्य या फिर खुद इस समस्या से जूझ रहे हैं तो सावधान हो जाइए। क्योंकि समय से इलाज नहीं हुआ तो शरीर में और कई गंभीर बीमारी हो सकती है। इस प्रकार के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में हर माह 30-45 मरीज इन लक्षणों वाले पहुंच रहे हैं। चिकित्सक दवा देने के साथ ही काउंसिलिंग कर रहे हैं और अभिभावक को भी मोटिवेट करने की सलाह दे रहे हैं।
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भागदौड़ भरी जिंदगी में कोई पढ़ाई के प्रेशर में हैं तो कोई बेरोजगारी से परेशान है तो कोई काम के बोझ से परेशान हैं। वहीं, अधिकांश लोग अन्य कारणों से परेशान हैं। यह परेशानी अवसाद को जन्म दे रही है। देखते ही देखते ही इंसान अंदर ही अंदर घुटकर अवसादग्रस्त हो जा रहा है। परिवार से अलग, समाज से अलग और धीरे-धीरे जिंदगी उसे बोझिल महसूस होने लगती है। मौजूदा समय में एक बीमारी ऐसी हो रही है, जिसमें व्यक्ति भीड़ में जाने से कतरा रहा है। चार लोगों से बात करने और उनके पास जाने से कतरा रहा है। 15-40 वर्ष की आयु के लोगों में यह समस्या पाई जा रही है।
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माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज हर माह इस प्रकार की बीमारी के शिकार 30-45 लोग पहुंच रहे हैं। चिकित्सक काउंसिलिंग के जरिए उनकी समस्याओं को समझा रहे हैं। कब से यह परेशानी शुरू हुई। पहले कैसे थे, सारी हिस्ट्री जानने के बाद अगर जरूरत है तो दवा दे रहे हैं। नहीं तो परिवार को मोटिवेट करने का तरीका बता रहे हैं। समय-समय पर बुलाकर काउंसिलिंग कर रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि यह प्रेशर या फिर एकाएक व्यक्ति के साथ में कुछ ऐसा घटित होता है, जिससे व्यक्ति इस प्रकार की बीमारी की गिरफ्त में आ जाता है।
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यह है लक्षण

आप दूसरों के यहां जाने से डरते हैं, क्या आप रोजमर्रा की सामाजिक स्थितियों में आत्म जागरूक हैं। क्या आप डर या चिंता के कारण नए लोगों से मिलने से बचते हैं। यदि आप कम से कम छह माह से ऐसा महसूस कर रहे हैं और ये भावनाएं आपके लिए रोजमर्रा के काम करना कठिन बना देती हैं। शरमाना, पसीना आना या कांपना, हृदय गति तेज होना, महसूस करना दिमाग खाली हो रहा है या पेट में खराबी महसूस हो रही है। कठोर शारीरिक मुद्रा रखें या अत्यधिक धीमी आवाज में बोलना आदि भी कई वजह है। अगर यह लक्षण है तो तत्काल चिकित्सक की सलाह लें।


व्यक्ति कई प्रकार के अवसाद का शिकार हो रहा है। मौजूदा समय में भीड़ के बीच जाने से डर लगने, लोगों से बात करने में हिचकिचाहट होने और गुमसुम रहने वाले मरीज पहुंच रहे हैं। उनके इलाज में प्रमुखता साइकोथेरेपी जैसे कि जाती है। इसमें एक्सपोजर थेरेपी एकॉग्निटिव बिहेवियर, थेरेपी, ऐक्सेप्टेंस एंड कमिटमेंट थेरेपी आदि का इस्तेमाल किया जाता है। अधिकांश मामले काउंसिलिंग से सही हो जाते हैं।
डॉ. मोहम्मद अफजल खान, सहायक आचार्य, मनोचिकित्स विभाग, माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज
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