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Gorakhpur News: नहीं मिलता चढ़ावा तो नियम के पेंच में उलझ जाती है फाइल

Fri, 11 Oct 2024 03:49 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर Updated Fri, 11 Oct 2024 03:49 AM IST
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If the offer is not received then the file gets entangled in the rules.
महराजगंज। ड्रग लाइसेंस बनवाने में झोल है। इसे हर कोई समझ नहीं सकता है। फाइल अस्वीकृत होने पर आवेदक इधर-उधर भटकने को विवश हैं। उनको समझ में नहीं आ रहा कि काम कैसे कराया जाए। एक अनुमान के अनुसार, जिले में करीब 700 से अधिक गैर लाइसेंसी दुकानें संचालित हो रही हैं।
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विभाग में दलालों की गहरी पैठ का आलम यह है कि सीधे आवेदन कराने में इतने नियम शर्तें पूरी करनी पड़ती है कि आवेदक की एड़ियां घिस जाती हैं। सूत्रों की मानें तो दवा की दुकान का लाइसेंस लेने के लिए आवेदक दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर हैं। कुछ तो ऐसे हैं, जो मकान किराएदारी को लेकर फंस गए हैं। कुछ कमरे के माप को लेकर परेशान हैं। हर काम की रकम तय है। इसे नहीं देने पर आवेदकों को परेशान होना पड़ता है।
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एक माह में करीब 40 आवेदन रिजेक्ट हुए हैं, इनमें ज्यादातर वे आवेदन हैं जो किराएदारी से जुड़े हैं। इसमें खेल यह किया जा रहा है कि एक पेपर दिया जा रहा है, इस पर लेखपाल कानूनगों की रिपोर्ट लगवाई जा रही है। जबकि नियम के अनुसार ऐसा नहीं होना चाहिए। सूत्रों की माने तो इस खेल में दलालों का पूरा सिंडिकेट काम कर रहा है।
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दवा विक्रेता ने बताया कि अगर किसी के मां के नाम पर कमरा है और दो भाई हैं तो उसकी ओर से दिए गए किराएनामे को नहीं माना जा रहा है। रकम नहीं मिलने पर दो भाइयों की ओर से एनओसी मांगी जा रही है। इस तरह से कई आवेदक परेशान हैं।

सूत्र बताते हैं कि हर फाइल की कीमत तय हो रखी है। इसमें फार्मासिस्ट को रुपये देने से लेकर नक्शा बनवाने समेत पास करने तक की कीमत तय है। नियम के मुताबिक एक लाइसेंस बनवाने में चालान का 3000 रुपये लगता है। छोटे-मोटे खर्चे मिलकर 2000 रुपये और लग सकता है। इसके अलावा ऑनलाइन वगैरह में 2000 रुपये खर्चे में कुल मिलाकर 7000 से 8000 रुपये खर्च होता है, लेकिन एक फाइल की कीमत दलालों के जरिए 80 से 90 हजार तय की जाती है। फुटकर का फार्मासिस्ट को देने वाले रकम को छोड़कर 25 से 30 हजार रुपये लिए जाते हैं।
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