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बदहाली: 15 बंदूकों और 60 कारतूसों से कैसे होगी वन की सुरक्षा

Sun, 27 Feb 2022 12:39 PM IST
vivek shukla रोहित सिंह, गोरखपुर।
रोहित सिंह, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 27 Feb 2022 12:39 PM IST
सार

सूत्र बताते हैं कि उन्हें अपने हथियारों पर भरोसा ही नहीं है कि वह चलेंगे भी या नहीं। वन विभाग गोरखपुर प्रभाग में पांच रेंज वन क्षेत्र के हैं। इनमें कैंपियरगंज, फरेंदा, तिनकोनिया, पनियरा और गोरखपुर रेंज शामिल है। सभी रेंज में लगभग पांच बीट हैं, इन्हीं के जिम्मे वन क्षेत्र की निगरानी और तस्करी रोकना होता है।

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How will forest be protected with 15 guns and 60 cartridges
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

15 बंदूकें और 60 कारतूसों के सहारे आखिर वनकर्मी जंगल की सुरक्षा कैसे करेंगे? वन प्रभाग के पास वर्तमान समय में कुल 60 बंदूकें ही हैं। इनमें 31 रायफल और और 29 डबल बैरल बंदूकें हैं। इनमें कुल 15 बंदूकें ( रायफल और डबल बैरल मिलाकर) ही सही हैं। लेकिन, इन सही असलहों में चलने वाले असलहे कौन से हैं? ये वन निगम को नहीं पता। बंदूक के अलावा कुल कितने कारतूस सही हैं, ये भी निगम के अधिकारी नहीं जानते।

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वर्तमान में जहां एक तरफ अपराधियों के हाथों में नाइन एमएम और .32 बोर की अवैध पिस्टल और बंदूक( रिवाल्वर) है तो दूसरी तरफ वनकर्मियों के पास 20 से 30 वर्ष पुरानी .315 बोर के रायफल और डबल बैरेल बंदूकें हैं। इनमें से कितनी सही और कितनी खराब हो चुकी हैं, इसकी जानकारी भी वन कर्मियों को नहीं है। नतीजा कि ये बिना हथियार के ही जंगल में कॉंबिंग करते हैं। अगर कभी जंगल में मुठभेड़ या तस्करों से आमना-सामना हो जाता है तो विभाग को अपनी भद्द पिटवानी पड़ती है।
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गोरखपुर जिले में वन विभाग के रेंजर और वन रक्षकों की तैनाती के बाद आज की तारीख तक हथियार चलाने का प्रशिक्षण नहीं दिया जा सका। ऐसे में जो असहले हैं वो जरूरत पड़ने पर चलेंगे या नहीं? वनकर्मी चला पाएंगे भी या नहीं, खुद में एक बड़ा सवाल है। शायद, तभी तो बिना हथियार के ही वन दरोगा, फॉरेस्ट गार्ड( वन रक्षक) जंगल में निरीक्षण या दौरा करते हैं।
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सूत्र बताते हैं कि उन्हें अपने हथियारों पर भरोसा ही नहीं है कि वह चलेंगे भी या नहीं। वन विभाग गोरखपुर प्रभाग में पांच रेंज वन क्षेत्र के हैं। इनमें कैंपियरगंज, फरेंदा, तिनकोनिया, पनियरा और गोरखपुर रेंज शामिल है। सभी रेंज में लगभग पांच बीट हैं, इन्हीं के जिम्मे वन क्षेत्र की निगरानी और तस्करी रोकना होता है। इन बीटों में एक रायफल और एक डबल बैरल बंदूक दी गई है। इन सभी रेंज के बीट में असलहे आवंटित हैं, लेकिन वर्तमान में सभी मालखाने में रखे हैं।

 

बंदूक की गोलियां तक हो गई हैं खराब

वन प्रभाग में रायफल और डबल बैरल बंदूकें हैं। इनमें से लगभग 20 कारतूस को रायफल के हैं, जबकि 40 बंदूक के हैं। सूत्र बताते हैं कि बंदूक वाले बहुत से कारतूस खराब हो चुके हैं। वर्षों पहले इन्हें मालखाने से रेंज और बीट में भेजा गया था।

2018 में तस्कर हो गए थे हावी

15 जुलाई 2018 को खोराबार के रामलखना जंगल में अवैध कटाई कर रहे तस्करों की सूचना पर वन विभाग ने छापा मारा था। कटान रोकने गए डिप्टी रेंजर डीएन पांडेय को तस्करों ने गोली मार दी थी। गंभीर रूप से घायल रेंजर को वन विभाग के अधिकारियों ने मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाया। सूत्रों की मानें तो उस वक्त भी विभागीय असलहा नहीं चलने की वजह से तस्कर हावी हो गए थे।

डीएफओ विकास यादव ने कहा कि वन विभाग के पास मौजूद सभी असलहे पुराने हो चुके हैं। वर्तमान में कुल 15 असलहे हैं जो देखने में सही नजर आते हैं। कारतूस भी कुल 60 ही हैं। अब इनमें से कितने सही हैं, इसकी जानकारी अभी नहीं है। जंगल में तस्करों का सामना करना और उन्हें रोकना, ये बड़ी जिम्मेदारी होती है। सीमित संसाधनों के बीच लगातार टीम जंगलों का निरीक्षण करती है। सुरक्षा के लिए अपने पास पर्याप्त संसाधनों के सहारे तस्करी रोकने का प्रयास भी करती है।

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