गोरखपुर: 35 रुपये में आवंटित था आवास, बकाया बढ़कर हो गया नौ लाख
अवर अभियंता के पुत्र नगर निगम में आयोजित संभव कार्यक्रम में आवास के आवंटन को बढ़ाने की मांग करने पहुंचे, लेकिन नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने पूरी जानकारी के बाद आवास पर कब्जा लेने का अपर नगर आयुक्त को निर्देश दिया। वहीं, संभव की जनसुनवाई में 18 मामले आए, जिनका नगर आयुक्त ने निस्तारण किया। मंगलवार को 12 बजे से जनसुनवाई शुरू हुई।
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वर्तमान में लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) में कार्यरत अवर अभियंता शिव शंकर सिंह के नाम मोहद्दीपुर में आवंटित नगर निगम के आवास का बकाया नौ लाख रुपये हो गया है। यह आवास मात्र 35 रुपये प्रति माह की दर से आवंटित था। 2018 में ही आवास का आवंटन खत्म हो गया।
मंगलवार को अवर अभियंता के पुत्र नगर निगम में आयोजित संभव कार्यक्रम में आवास के आवंटन को बढ़ाने की मांग करने पहुंचे, लेकिन नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने पूरी जानकारी के बाद आवास पर कब्जा लेने का अपर नगर आयुक्त को निर्देश दिया। वहीं, संभव की जनसुनवाई में 18 मामले आए, जिनका नगर आयुक्त ने निस्तारण किया। मंगलवार को 12 बजे से जनसुनवाई शुरू हुई।
झरना टोला वार्ड के गायत्रीनगर के निवासी क्षेत्र में डोर टू डोर कूड़ा उठाने वाली गाड़ी के नहीं आने की शिकायत लेकर पहुंचे। नगर आयुक्त ने आनन फानन में ड्राइवर से लेकर सुपरवाइजर और मोबलाइजर को तलब किया। रजिस्टर की जांच की। रजिस्टर में घरों की संख्या कम होने पर नाराजगी जताते हुए ड्राइवर और सुपरवाइजर को सख्त हिदायत दी। साथ ही बृहस्पतिवार को क्षेत्र में जांच करने का लोगों का आश्वासन भी दिया।
नर्सेज हॉस्टल के पास नगर निगम की दुकान का किराया पिछले कई वर्षों से जमा न होने की शिकायत लेकर पहुंचे दुकानदार वीरेंद्र की सुनवाई करते हुए नगर आयुक्त ने तत्काल चेक करने का निर्देश दिया। साथ ही संबंधित विभाग के अधिकारी को तत्काल कार्रवाई का निर्देश भी दिया। इस दौरान अपर नगर आयुक्त दुर्गेश मिश्र एवं मृत्युंजय, चीफ इंजीनियर संजय चौहान के अलावा नगर निगम के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
आधे घंटे में मैमुन निशा को मिला मृत्यु प्रमाणपत्र
पहाड़पुर गीताप्रेस निवासी मैमुन निशा अपने ससुर का मृत्यु प्रमाणपत्र का मामला लेकर पहुंची। बताया कि उनके ससुर मो. शफीक का चार जनवरी को निधन हो गया था। उनके मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए 20 जनवरी को ही आवेदन दिया गया, लेकिन आज तक नहीं बन पाया।
नगर आयुक्त ने तत्काल जन्म मृत्यु प्रमाणपत्र विभाग के लिपिक दीपक श्रीवास्तव को बुलाया और तत्काल प्रमाणपत्र बनाकर देने का निर्देश दिया। आधे घंटे में ही मैमुन निशा को अपने ससुर का मृत्यु प्रमाणपत्र मिल गया।