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Gorakhpur News: चुनाव की आड़ में जमाखोरी..बिना लगन बढ़ रहे मेवा-मसाले के दाम

Tue, 21 May 2024 04:37 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर Updated Tue, 21 May 2024 04:37 AM IST
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Hoarding under the guise of elections...prices of dry fruits and spices are increasing without dedication
फोटो--
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20 दिन से लगातार बढ़ रहा दाम, चुनाव में जमाखोरी की आशंका



गर्मी में बिना लगन के सूखे मेवा और मसालों का दाम बढ़ना चर्चा का विषय



संवाद न्यूज एजेंसी



गोरखपुर। गर्मी में इस बार लगन वाली खपत नहीं है, लेकिन सूखे मेवा और मसालों के दाम बढ़ रहे हैं। बाजार में बिक्री कम होने के बावजूद दाम बढ़ने की व्यापारियों के साथ लोगों में भी चर्चा है। कुछ व्यापारी मौसम की मार से फसल खराब होने को इसका कारण बता रहे हैं। हालांकि बाजार की नब्ज समझने वालों का मानना है कि व्यापारी बहाने बना रहे हैं। चुनाव की आड़ में धड़ल्ले से जमाखोरी हो रही है और दाम बढ़ रहा है।



मंडी में 20 दिन से सूखे मेवा और मसालों के दाम में लगातार वृद्धि हो रही है। इससे लोगों के किचन का बजट भी बिगड़ रहा है। जीरा और काली मिर्च के दाम में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जबकि छोटी इलायची और बड़ी इलायची का दाम भी तेजी से बढ़ा है। काजू, किशमिश, मखाना के दाम भी बढ़ रहे हैं। सामान्य तौर पर ठंड के मौसम या लगन में सूखे मेवा की मांग बढ़ती है। दोनों स्थिति नहीं होने के बावजूद दाम बढ़ रहे हैं। व्यापारियों के अनुसार चुनाव के दौरान अधिकारियों के व्यस्त होने के कारण सट्टेबाजों पर सख्ती नहीं बरती जा रही है।
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15 दिन में बढ़े दाम



मेवा-मसाले दाम (रुपये प्रति किलो) 15 दिन पहले दाम



जीरा 275 385



काली मिर्च 640 590



छोटी इलायची 1800-1900 1450- 1500



बड़ी इलायची 1600 1400



मखाना 1400 900



काजू 670 585



किशमिश 180-190 150-160



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व्यापारी बोले



सटोरिए सक्रिय हो गए हैं, जबकि फसल भी खराब हुई थी। वियतनाम, श्रीलंका में काली मिर्च की फसल खराब हुई थी, मार्च-अप्रैल में बारिश नहीं होने से पहाड़ियों में इलायची पकने से पहले सूख गई। इसी प्रकार मौसम के कारण आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल व तमिलनाडु में काजू की फसल खराब हुई थी।
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- गोपाल जायसवाल, व्यापारी, साहबगंज मंडी



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सट्टाबाजारी के कारण माल डंप हो रहा है। इस कारण मेवा व मसाले के दाम बढ़ रहे हैं। इस बार जीरा की फसल अच्छी थी, लेकिन 100 रुपये किलो दाम बढ़ गया। डेढ़ साल पहले जीरा 750 रुपये किलो बिका था, जो पिछले साल 180 रुपये पर सिमट गया था। बिक्री कम है, लेकिन दाम बढ़ रहा है।



- शैलेष तुलस्यान, व्यापारी, महेवा मंडी



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