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Gorakhpur News: गोरखपुर विश्वविद्यालय में स्थापित होगी हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग लैब
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गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (डीडीयू) ने अनुसंधान केंद्रित होने की दिशा में अपने कदम बढ़ाए हैं। भारत सरकार की प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पीएम उषा) योजना के तहत परिसर में अत्याधुनिक हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (एचपीसी) लैब की स्थापना की जाएगी। इसके लिए लगभग 1.75 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है।
एचपीसी लैब बनने से शोधार्थियों के पीएचडी और पोस्ट-डॉक्टोरल शोध की गुणवत्ता में वृद्धि होगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर की रिसर्च पब्लिकेशन की संभावनाएं बढ़ेंगी। प्रोजेक्ट आधारित और फंडेड रिसर्च को गति मिलेगी। पेटेंट, प्रोडक्ट-डेवलपमेंट और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के अवसर भी बढ़ेंगे। नैक मूल्यांकन, एनआईआरएफ और वैश्विक रैंकिंग में इसका फायदा मिलेगा। इससे डिजिटल और अनुसंधान क्षमताओं का विस्तार होगा। नवाचार, स्टार्ट अप और उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलेगा। एनईपी-2020 के अनुरूप अनुसंधान आधारित शिक्षा और बहु विषयकता के क्षेत्र में भी लाभ मिलेगा।
अनुसंधान क्षमताओं में होगी गुणात्मक वृद्धि
एचपीसी लैब एक सुपरकंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म है। यह अत्यधिक जटिल, बड़े पैमाने पर डेटा आधारित समस्याओं के समाधान में सक्षम होगी। एआई, मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग मॉडल के साथ ही जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय जोखिम और आपदा पूर्वानुमान भी लगाया जा सकेगा। एचपीसी केवल विज्ञान व इंजीनियरिंग तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि अर्थशास्त्र (आर्थिक मॉडलिंग, नीति विश्लेषण), समाजशास्त्र (जनसंख्या अध्ययन, सामाजिक व्यवहार विश्लेषण), भूगोल और पर्यावरण अध्ययन आदि में भी उपयोगी होगी।
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यह सुविधा विश्वविद्यालय के शोध पारिस्थितिकी तंत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। यह सुविधा डीडीयू को राष्ट्रीय और वैश्विक शोध मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करेगी। यह पहल एक सशक्त, आत्मनिर्भर और अनुसंधान प्रधान विश्वविद्यालय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- प्रो. पूनम टंडन, कुलपति, डीडीयू
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एचपीसी लैब बनने से शोधार्थियों के पीएचडी और पोस्ट-डॉक्टोरल शोध की गुणवत्ता में वृद्धि होगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर की रिसर्च पब्लिकेशन की संभावनाएं बढ़ेंगी। प्रोजेक्ट आधारित और फंडेड रिसर्च को गति मिलेगी। पेटेंट, प्रोडक्ट-डेवलपमेंट और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के अवसर भी बढ़ेंगे। नैक मूल्यांकन, एनआईआरएफ और वैश्विक रैंकिंग में इसका फायदा मिलेगा। इससे डिजिटल और अनुसंधान क्षमताओं का विस्तार होगा। नवाचार, स्टार्ट अप और उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलेगा। एनईपी-2020 के अनुरूप अनुसंधान आधारित शिक्षा और बहु विषयकता के क्षेत्र में भी लाभ मिलेगा।
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अनुसंधान क्षमताओं में होगी गुणात्मक वृद्धि
एचपीसी लैब एक सुपरकंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म है। यह अत्यधिक जटिल, बड़े पैमाने पर डेटा आधारित समस्याओं के समाधान में सक्षम होगी। एआई, मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग मॉडल के साथ ही जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय जोखिम और आपदा पूर्वानुमान भी लगाया जा सकेगा। एचपीसी केवल विज्ञान व इंजीनियरिंग तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि अर्थशास्त्र (आर्थिक मॉडलिंग, नीति विश्लेषण), समाजशास्त्र (जनसंख्या अध्ययन, सामाजिक व्यवहार विश्लेषण), भूगोल और पर्यावरण अध्ययन आदि में भी उपयोगी होगी।
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यह सुविधा विश्वविद्यालय के शोध पारिस्थितिकी तंत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। यह सुविधा डीडीयू को राष्ट्रीय और वैश्विक शोध मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करेगी। यह पहल एक सशक्त, आत्मनिर्भर और अनुसंधान प्रधान विश्वविद्यालय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- प्रो. पूनम टंडन, कुलपति, डीडीयू