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Gorakhpur News: फर्जी आईएएस गिरोह का गुर्गा गिरफ्तार, गैंगस्टर एक्ट में गया जेल
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गुलरिहा। सरकारी ठेके, टेंडर और योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले फर्जी आईएएस गिरोह के एक गुर्गे को गुलरिहा पुलिस ने मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया। गैंगस्टर एक्ट के मामले में वांछित आरोपी रामनयन गुप्ता को मेडिकल कॉलेज स्थित सीआरसी बिल्डिंग के पास से पकड़ा गया। दोपहर बाद आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया। जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
एसपी सिटी निमिष पाटील के अनुसार, बिहार के सीतामढ़ी निवासी ललित किशोर उर्फ गौरव कुमार खुद को आईएएस अधिकारी बताकर लोगों को अपने जाल में फंसाता था। गिरोह के गुर्गे सरकारी विभागों में ठेका, टेंडर और अन्य कार्य दिलाने का भरोसा देकर निवेश के नाम पर बड़ी रकम वसूलते थे। जांच में सामने आया कि गिरोह से जुड़े रामनयन गुप्ता ने ठगी से अर्जित धनराशि को अपने नाम पर जमीन और अन्य संपत्तियों में निवेश किया था। पुलिस के मुताबिक, उसके नाम पर 100 डिसमिल से अधिक भूमि की रजिस्ट्री कराई गई थी, जिसकी कीमत करोड़ों रुपये आंकी गई है। आरोप है कि लोगों से प्राप्त रकम को पहले सरकारी परियोजनाओं में निवेश का झांसा देकर लिया जाता था और बाद में उसे संपत्ति खरीदने समेत अन्य माध्यमों में लगाया जाता था।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
मामले में गुलरिहा पुलिस ने 10 दिसंबर 2025 को रामनयन गुप्ता के साले अभिषेक कुमार और परमानंद गुप्ता को गिरफ्तार किया था। दोनों को कोर्ट में पेश किया गया था जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया था। बाद में रामनयन गुप्ता की भी गिरफ्तारी हुई थी। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 4.15 लाख रुपये नकद, सोने-चांदी के आभूषण, फर्जी पहचान पत्र, फर्जी दस्तावेज और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की थी।
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जमानत पर छूटने के बाद फिर हुई गिरफ्तारी
पुलिस के अनुसार, 6 फरवरी 2026 को रामनयन गुप्ता को गिरफ्तार किया था। हाल ही में वह जमानत पर बाहर आया था। इसके बाद सात जून को पुलिस ने गिरोह के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की, जिसमें रामनयन गुप्ता वांछित था।
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एसपी सिटी निमिष पाटील के अनुसार, बिहार के सीतामढ़ी निवासी ललित किशोर उर्फ गौरव कुमार खुद को आईएएस अधिकारी बताकर लोगों को अपने जाल में फंसाता था। गिरोह के गुर्गे सरकारी विभागों में ठेका, टेंडर और अन्य कार्य दिलाने का भरोसा देकर निवेश के नाम पर बड़ी रकम वसूलते थे। जांच में सामने आया कि गिरोह से जुड़े रामनयन गुप्ता ने ठगी से अर्जित धनराशि को अपने नाम पर जमीन और अन्य संपत्तियों में निवेश किया था। पुलिस के मुताबिक, उसके नाम पर 100 डिसमिल से अधिक भूमि की रजिस्ट्री कराई गई थी, जिसकी कीमत करोड़ों रुपये आंकी गई है। आरोप है कि लोगों से प्राप्त रकम को पहले सरकारी परियोजनाओं में निवेश का झांसा देकर लिया जाता था और बाद में उसे संपत्ति खरीदने समेत अन्य माध्यमों में लगाया जाता था।
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पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
मामले में गुलरिहा पुलिस ने 10 दिसंबर 2025 को रामनयन गुप्ता के साले अभिषेक कुमार और परमानंद गुप्ता को गिरफ्तार किया था। दोनों को कोर्ट में पेश किया गया था जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया था। बाद में रामनयन गुप्ता की भी गिरफ्तारी हुई थी। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 4.15 लाख रुपये नकद, सोने-चांदी के आभूषण, फर्जी पहचान पत्र, फर्जी दस्तावेज और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की थी।
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जमानत पर छूटने के बाद फिर हुई गिरफ्तारी
पुलिस के अनुसार, 6 फरवरी 2026 को रामनयन गुप्ता को गिरफ्तार किया था। हाल ही में वह जमानत पर बाहर आया था। इसके बाद सात जून को पुलिस ने गिरोह के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की, जिसमें रामनयन गुप्ता वांछित था।