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Gorakhpur News: किसी भी उम्र में आ सकता है हार्ट अटैक, युवावस्था में कार्डियक अरेस्ट बड़ा कारण

Wed, 09 Oct 2024 03:00 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 09 Oct 2024 03:00 AM IST
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Heart attack can happen at any age, cardiac arrest is a major reason in youth.
बीते 16 नंवबर को बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एक एमबीबीएस छात्र की अचानक हुई थी मौत
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एक दिसंबर को बैडमिंटन खेलने के दौरान छात्रा की हुई थी मौत



अमर उजाला ब्यूरो

गोरखपुर। बदलती जीवन शैली, खानपान और आनुवंशिक कारणों से भी हृदय की बीमारियां हो सकती हैं। इसके लिए उम्र की कोई सीमा नहीं है। युवावस्था में कार्डियक अरेस्ट और वंशानुगत बीमारी हाइपर ट्रॉफिक कार्डियकमायोपैथी भी मौत की वजह हो सकती है। इसलिए युवाओं को भी हृदय की जांच करानी चाहिए, जिससे कि बीमारियों का समय रहते उपचार किया जा सके।
इस तरह की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं। बीते 16 नंवबर को बीआरडी मेडिकल कॉलेज में देवरिया के रहने वाले एमबीबीएस छात्र अभिषेक अचानक गिर पड़े थे। इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके बाद एक दिसंबर को डीएवी पीजी कालेज में बैडमिंटन खेलने के दौरान छात्रा गौरी मिश्रा अचानक गिरकर बेहाेश हो गई थी। जिसके बाद उसकी मौत हो गई।
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फिजिशियन डाॅ. राजीव मिश्रा बताते हैं कि हृदय संबंधी बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है। बहुत से ऐसे बच्चे होते हैं, जिन्हें हृदय की बीमारी जन्मजात होती है। ऐसे ही तमाम लोग होते हैं, जिनके परिवार में किसी को हाइपर ट्रॉफिक कार्डियकमायोपैथी होती है। इसलिए ऐसा परिवार जिसमें कम उम्र में किसी व्यक्ति की हार्ट अटैक से मौत हुई है तो उनके बच्चों को जांच कराने की सलाह दी जाती है।
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हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रकाश चंद्र शाही बताते हैं कि हृदय एक इलेक्ट्रॉनिक पंप की तरह से कार्य करता है। अगर उसे करंट मिलना बंद हो जाए तो वह भी काम नहीं करता। इसे ही कार्डियक अरेस्ट का जाता है। इस स्थिति में हृदय मस्तिष्क और अन्य अवयवों व ऊतकों को रक्त और ऑक्सीजन पंप करना बंद कर देता है। ऐसे मामलों में यदि मरीज को तत्काल सीपीआर (कार्डियोप्लमोनरी रीससिटेशन) मिले तो उसकी जान बच भी सकती है।

जांच कराएं, आदत सुधारें

हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. कुनाल कहते हैं कि सबसे अधिक जरूरी जीवनचर्या और खानपान सुधारने की। इसके अलावा हर व्यक्ति को शुगर, ब्लड प्रेशर, हार्ट आदि की नियमित जांच करानी होगी। बीमारी किसी भी उम्र या व्यक्ति को हो सकती है। नियमित जांच से ही ऐसे मामलों की समय रहते पहचान कर इलाज किया जा सकता है। युवावस्था में हो रही मौतों का अभी कोई सटीक कारण पता नहीं चला है।
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