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Gorakhpur News: कैथ लैब के लिए जापान से आएंगी मशीनें
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- एम्स में कैथ लैब की स्थापना के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय से मिली मंजूरी
गोरखपुर। पूर्वांचल के हृदय रोगियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। एम्स गोरखपुर में अत्याधुनिक कैथ लैब स्थापित किए जाने की योजना को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से मंजूरी मिल गई है। इसके बाद संस्थान में आवश्यक उपकरणों की खरीद और तकनीकी तैयारियों को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, कैथ लैब के लिए अत्याधुनिक मशीनें जापान से मंगाई जाएंगी, जिनके अगले तीन महीने के भीतर पहुंचने की संभावना है। उपकरणों की स्थापना के साथ-साथ विशेषज्ञ डॉक्टरों और प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है, ताकि सेवा शुरू होते ही मरीजों को बिना किसी बाधा के इलाज मिल सके।
इस सुविधा के शुरू होने के बाद एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी और पेसमेकर प्रत्यारोपण जैसी महत्वपूर्ण और जटिल हृदय प्रक्रियाएं एम्स में उपलब्ध हो जाएंगी। अभी तक इन उपचारों के लिए मरीजों को लखनऊ, दिल्ली या निजी अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ जाते हैं।
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एम्स की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता का कहना है कि यह कदम क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव लाएगा और गंभीर हृदय रोगियों को समय पर उन्नत इलाज उपलब्ध कराकर जीवन रक्षक साबित होगा।
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गोरखपुर। पूर्वांचल के हृदय रोगियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। एम्स गोरखपुर में अत्याधुनिक कैथ लैब स्थापित किए जाने की योजना को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से मंजूरी मिल गई है। इसके बाद संस्थान में आवश्यक उपकरणों की खरीद और तकनीकी तैयारियों को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, कैथ लैब के लिए अत्याधुनिक मशीनें जापान से मंगाई जाएंगी, जिनके अगले तीन महीने के भीतर पहुंचने की संभावना है। उपकरणों की स्थापना के साथ-साथ विशेषज्ञ डॉक्टरों और प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है, ताकि सेवा शुरू होते ही मरीजों को बिना किसी बाधा के इलाज मिल सके।
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इस सुविधा के शुरू होने के बाद एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी और पेसमेकर प्रत्यारोपण जैसी महत्वपूर्ण और जटिल हृदय प्रक्रियाएं एम्स में उपलब्ध हो जाएंगी। अभी तक इन उपचारों के लिए मरीजों को लखनऊ, दिल्ली या निजी अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ जाते हैं।
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एम्स की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता का कहना है कि यह कदम क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव लाएगा और गंभीर हृदय रोगियों को समय पर उन्नत इलाज उपलब्ध कराकर जीवन रक्षक साबित होगा।