फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Hair grown in the mouth extracted with special technology in AIIMS Gorakhpur

UP: मुंह में उग आए थे बाल... खुजली, जलन, बदबू और खाना निगलने में होती थी पेरशानी; विशेष तकनीक से निकाला गया

Sat, 28 Jun 2025 03:00 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर Published by: शाहरुख खान Updated Sat, 28 Jun 2025 03:00 PM IST
सार

दो मरीजों के मुंह में बाल उग आए थे। मरीजों को मुंह में खुजली, जलन, दुर्गंध और खाना निगलने में कठिनाई का सामना करना पड़ा। एम्स में विशेष तकनीक से मरीजों के मुंह से बाल निकाले गए।

विज्ञापन
Hair grown in the mouth extracted with special technology in AIIMS Gorakhpur
गोरखपुर एम्स - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गोरखपुर में एम्स के डॉक्टरों ने ऐसे दो मरीजों का इलाज किया, जिनके मुंह के अंदर बाल उगने लगे थे। सुनने में भले अजीब लगे, लेकिन यह मेडिकल साइंस की एक जानी-पहचानी जटिलता है, जो ओरल कैंसर के ऑपरेशन के बाद कभी-कभी सामने आती है। 
विज्ञापन


एम्स की इस उपलब्धि को चिकित्सा क्षेत्र में सराहना मिल रही है। इसे प्रतिष्ठित इंडियन डर्मेटोलॉजी ऑनलाइन जर्नल में प्रकाशित भी किया गया है। दरअसल, दोनों मरीज ओरल कैंसर से पीड़ित थे और इलाज के दौरान उनके मुंह के कैंसरग्रस्त हिस्से को हटाकर शरीर के किसी दूसरे हिस्से की त्वचा लगाई गई। 
विज्ञापन


एक मरीज के मुंह में जांघ की त्वचा प्रत्यारोपित की गई थी, जबकि दूसरे के लिए गर्दन की त्वचा का इस्तेमाल किया गया। समय के साथ इन त्वचा में बाल उगने लगे, जो न केवल अजीब दिखते थे, बल्कि मरीजों को मुंह में खुजली, जलन, दुर्गंध, भोजन निगलने में कठिनाई और सामाजिक असहजता जैसी समस्याओं से भी जूझना पड़ा।
विज्ञापन
विज्ञापन


डॉ. सुनील गुप्ता ने बताया कि दोनों मरीजों की स्थिति अब सामान्य है और बाल वापस नहीं उगे हैं। एक मरीज 41 वर्ष का है और दूसरा 51 वर्ष का। यह प्रक्रिया अत्यंत सावधानी, सैनिटेशन और तकनीकी दक्षता के साथ की गई, ताकि मुंह की नाजुक त्वचा को कोई नुकसान न पहुंचे।

हेयर इलेक्ट्रोलाइसिस तकनीक से इलाज
इस समस्या का समाधान किया एम्स के त्वचा एवं चर्म रोग विभाग के डॉ. सुनील कुमार गुप्ता और उनकी टीम ने। डॉ. गुप्ता ने बताया कि आमतौर पर ऐसे मामलों में लेजर हेयर रिमूवल तकनीक अपनाई जाती है, लेकिन मुंह के अंदर सीमित स्थान और सफेद बालों के कारण यह तकनीक प्रभावी नहीं हो पाती। 

 

ऐसे में उन्होंने हेयर इलेक्ट्रोलाइसिस नामक तकनीक का इस्तेमाल किया। इस विधि में एक बेहद बारीक सुई (निडिल) को इलेक्ट्रोकेटरी प्रोब से जोड़ा गया और प्रत्येक बाल की जड़ तक सावधानीपूर्वक विद्युत प्रवाह पहुंचाया गया। इससे बाल स्थायी रूप से नष्ट हो गए। 

 

यह प्रक्रिया बेहद सूक्ष्म और जोखिम भरी थी, क्योंकि मुंह की अंदरूनी त्वचा बेहद संवेदनशील होती है। इस तकनीक से एक बार में 200 से 300 बाल हटाए गए और पूरी प्रक्रिया को 5 से 6 सत्रों में आठ सप्ताह के भीतर पूरा किया गया।

 

चर्म रोग विभाग के डॉक्टरों का प्रयास प्रशंसनीय है। एम्स में मरीजों का इलाज केवल बीमारी को खत्म करने तक सीमित नहीं है, बल्कि मरीज को सामान्य, आत्मविश्वासपूर्ण और सम्मानजनक जीवन देने की दिशा में किया गया हर प्रयास भी उतना ही महत्वपूर्ण है। -डॉ. विभा दत्ता, कार्यकारी निदेशक, एम्स
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed