फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Habit of talking to yourself, if you are afraid of shadow, then you are a victim of schizophrenia

Gorakhpur News: खुद से बात करने की आदत, परछाई से डर लगता है तो सिजोफ्रेनिया के हैं शिकार

Thu, 25 May 2023 03:45 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 25 May 2023 03:45 AM IST
विज्ञापन
Habit of talking to yourself, if you are afraid of shadow, then you are a victim of schizophrenia
ऐसे मरीज झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़ें, डॉक्टर से कराएं इलाज : डॉ. प्रभात
विज्ञापन



केस-एक

शाहपुर के रहने वाले मनीष सिंह को खुद से बात करने की आदत हो गई थी। परिजन परेशान होकर इलाज के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग ले गए। जांच शुरू हुई तो पता चला की सिजोफ्रेनिया की दिक्कत है। धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।

-------

केस-दो

बेतियाहाता के रहने वाले शिवम कुमार को अपनी परछाई से डर लगता था। उन्हें लगता था कि हर वक्त कोई उनका पीछा कर रहा है। परिजन इलाज के लिए शहर के एक मनोचिकित्सक के पास ले गए। जांच में सिजोफ्रेनिया की शिकायत मिली। डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया है। अभी उनका फालोअप चल रहा है।
विज्ञापन


-------

अमर उजाला ब्यूरो

गोरखपुर। ये दो केस महज बानगी हैं। ऐसे सैकड़ों मामले हर दिन मनोचिकित्सकों के पास पहुंच रहे हैं। वह भी केस बिगड़ने के काफी बाद। मरीजों को मामला भूत-पिशाच से जुड़ा लगता है। इसकी वजह से लोग झाड़-फूक के चक्कर में फंस जाते हैं। जब मामला अधिक बिगड़ जा रहा है, तो डॉक्टर के पास जा रहे हैं। ऐसे मरीजों के इलाज में काफी समय लग रहा है। मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रभात कुमार अग्रवाल ने बताया कि लोगों को खुद से बात करने की आदत, परछाई से डर, दूसरों पर हमेशा शक होता हो तो यह सिजोफ्रेनिया का लक्षण है। सिजोफ्रेनिया मानसिक बीमारी है। बताया कि सिजोफ्रेनिया के 90 से 100 मरीज हर माह इलाज के लिए आ रहे हैं। ऐसे मरीजों के इलाज में थोड़ा समय लगता है, क्योंकि मानसिक रोग की दवा का असर धीरे-धीरे होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

उन्होंने बताया कि इस तरह के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे मरीजों को शक और आवाज की वजह से नींद भी नहीं आती है। उसके अपने विचार उसे सुनाई देने लगते हैं। सामान्य तौर पर एक प्रतिशत लोगों में यह बीमारी होती है। इस बीमारी का इलाज पूरी तरह से संभव है। मरीजों को सलाह दी जा रही है की दिक्कत होने पर झाड़-फूंक के चक्कर में न फंसें। तत्काल डॉक्टर के पास जाएं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed