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फरियादी बनकर लूट की सूचना देने वाला निकला जालसाज, तीन साथियों के साथ हुआ गिरफ्तार
Thu, 05 Nov 2020 02:41 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 05 Nov 2020 02:41 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में 22 लाख रुपये की लूट का केस दर्ज कराने वाला गल्फ संस्था का संचालक संतोष सिंह भी जालसाज निकला। पुलिस के मुताबिक, संतोष और उसके साथी फर्जी स्टांप और दस्तावेजों की मदद से लोगों को विदेश भेजकर ठगी करते थे। पुलिस ने संतोष और उसके तीन साथियों को गिरफ्तार कर लिया है।
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आरोपियों की पहचान देवरिया के खामपार निवासी संतोष कुमार सिंह, बिहार के नौतन सीवान निवासी अभिषेक सिंह, जीरादेई निवासी पवन सिंह, गगहा के कुनौलपुर निवासी पवन सिंह के रूप में हुई है। एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने प्रेस कांफ्रेंस कर बताया कि 22 लाख रुपये लूट की सूचना के बाद पुलिस मौके पर गई थी। उस दौरान संस्था के कार्यालय में स्कैन किए हुए स्टांप पेपर मिले थे। कोषागार से इसकी जांच कराई गई तो पता चला कि सिर्फ दो स्टांप ही बिक्री किए गए हैं, बाकी इन लोगों ने कूटरचित तरीके से तैयार किया था।
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इस आधार पर पुलिस ने जांच की तो वहां से कलर प्रिंटर, स्कैनर, बीस लाख रुपये भी बरामद हो गए। जांच में सामने आया है कि ये लोग कूटरचित दस्तावेज तैयार कर लोगों को विदेश भेजने का काम करते हैं, जिससे सरकारी राजस्व की भी क्षति हो रही थी। एसएसपी ने बताया कि आरोपियों पर गैंगस्टर की कार्रवाई भी की जाएगी।
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20 लाख रुपये अवैध कमाई के, इनकम टैक्स को भी देंगे सूचना
संतोष के पास से मिले 20 लाख रुपये के बारे में एसएसपी ने बताया कि यह अवैध काम से अर्जित धन है। इसके बारे में संतोष ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया है। इस वजह से रुपये को जब्त कर राजकोष में जमा कराया जा रहा है। इसकी जानकारी इनकम टैक्स विभाग को भी दी जाएगी, ताकि वह भी जांच कर सके।
हो सकती है यह सजा
धारा 255: कोई सरकार द्वारा राजस्व के प्रयोजन के लिए प्रचालित किसी स्टांप का कूटकरण करे (सजा आजीवन कारावास या दस साल की सजा व जुर्माना)
धारा 256: स्टांप का कूटकरण कर उसका इस्तेमाल करना (सजा सात साल कारावास व जुर्माना)
धारा 259: स्टांप को फर्जी तरीके से तैयार करना (सजा सात साल कारावास व जुर्माना)
धारा 260: जानबूझकर फर्जी स्टांप तैयार कर उसका इस्तेमाल करना (सजा सात साल कारावास व जुर्माना)
हो सकती है यह सजा
धारा 255: कोई सरकार द्वारा राजस्व के प्रयोजन के लिए प्रचालित किसी स्टांप का कूटकरण करे (सजा आजीवन कारावास या दस साल की सजा व जुर्माना)
धारा 256: स्टांप का कूटकरण कर उसका इस्तेमाल करना (सजा सात साल कारावास व जुर्माना)
धारा 259: स्टांप को फर्जी तरीके से तैयार करना (सजा सात साल कारावास व जुर्माना)
धारा 260: जानबूझकर फर्जी स्टांप तैयार कर उसका इस्तेमाल करना (सजा सात साल कारावास व जुर्माना)
पवन ने बदमाशों को दिलाया था भरोसा, नहीं बुलाई जाएगी पुलिस
गल्फ संस्था के कर्मचारी पवन सिंह को पुलिस ने दोनों ही मामलों में आरोपी बनाया है। पुलिस का कहना है कि पवन सिंह को उम्मीद थी कि खुद फर्जीवाड़ा करने की वजह से संतोष लूट के मामले में पुलिस नहीं बुलाएगा। लूट से पहले उसने बदमाशों को यही भरोसा भी दिलाया था, लेकिन पुलिस के पहुंच जाने से उसका खेल खुल गया। पवन के भरोसा दिलाने की वजह से ही लूट के बाद बदमाश आराम से मौके पर मोबाइल फोन से बातचीत कर रहे थे। यहां तक कि अंदर घुसते समय भी बदमाशों ने मुंह को भी नहीं ढका था।
शुरू से ही संदेह के घेरे में था पवन
सीओ कैंट सुमित शुक्ला ने बताया कि संतोष को कार्यालय में रखे गए नौ लाख रुपये के बारे में जरा भी जानकारी नहीं थी। लूट की सूचना पर पहुंची पुलिस से पवन सिंह, बार-बार अपनी सोने की टूटी चेन के बारे में बता-दिखा रहा था। पुलिस को उसकी गतिविधि संदिग्ध लगी तो उससे सख्ती से पूछताछ की गई। इसके बाद पूरा मामला खुलकर सामने आ गया। पवन ने खुद को फंसते देख पुलिस को यह भी बता दिया कि संस्था में फर्जी स्टांप का काम होता है।
शुरू से ही संदेह के घेरे में था पवन
सीओ कैंट सुमित शुक्ला ने बताया कि संतोष को कार्यालय में रखे गए नौ लाख रुपये के बारे में जरा भी जानकारी नहीं थी। लूट की सूचना पर पहुंची पुलिस से पवन सिंह, बार-बार अपनी सोने की टूटी चेन के बारे में बता-दिखा रहा था। पुलिस को उसकी गतिविधि संदिग्ध लगी तो उससे सख्ती से पूछताछ की गई। इसके बाद पूरा मामला खुलकर सामने आ गया। पवन ने खुद को फंसते देख पुलिस को यह भी बता दिया कि संस्था में फर्जी स्टांप का काम होता है।