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एक्सक्लूसिव: जीएसटी के एक नियम ने रोक दी औद्योगिक नीति की सुविधाएं, खास लाभ से वंचित हैं ये लोग

Fri, 19 Feb 2021 02:17 PM IST
vivek shukla राजीव रंजन, गोरखपुर।
राजीव रंजन, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 19 Feb 2021 02:17 PM IST
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GST rule stopped facilities of industrial policy in UP Gorakhpur
उद्यमी एसके अग्रवाल व आकाश जालान। - फोटो : अमर उजाला।
'जितना गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) चुकाएंगे, उतना का ही लाभ उठा सकेंगे', जीएसटी के इस नियम ने उद्यमियों को प्रदेश की औद्योगिक नीति की सुविधाओं से वंचित कर रखा है। इस नियम की वजह से इंवेस्टमेंट, इन्फ्रास्ट्रक्चर, टर्मलोन, आदि पर इनपुट क्रेडिट नहीं दिया जा रहा है। नतीजा है कि प्रदेश की पहली ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी में शामिल होने वाले उद्यमी भी लाभ के इंतजार में हैं। यह सेरेमनी करीब तीन साल पहले लखनऊ में हुई थी। औद्योगिक नीति के तहत मिलने वाली सुविधाओं से वंचित रहने का मामला मुख्यमंत्री के संज्ञान में भी लाया जा चुका है।
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दरअसल, प्रदेश की औद्योगिक नीति से आकर्षित गोरखपुर के उद्यमियों ने गोरखपुर में ही उद्योग लगाने को वरीयता दी। प्रदेश के पहली ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के तहत नारायणी लेमिनेटर्स, एसडी इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड, गोयल प्राइवेट लिमिटेड समेत चार औद्योगिक इकाइयों की स्थापना या विस्तारीकरण के लिए प्रदेश सरकार और उद्यमियों के बीच करार हुआ।
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औद्योगिक नीति के तहत प्रावधान है कि उद्योग लगाने पर न सिर्फ कैपिटल लोन पर पांच प्रतिशत की छूट मिलेगी, बल्कि फैक्ट्री परिसर में मूलभूत सुविधाएं विकसित करने, टर्म लोन, पावर हाउस बनाने, स्टांप ड्यूटी और 10 साल तक इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी पर भी छूट मिलेगी।
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औद्योगिक नीति के तहत, पहले यह केंद्र या राज्य सरकार के व्यापार कर संबंधी प्रावधानों से लिंक नहीं था, लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद उद्योग स्थापित करने संबंधी सभी प्रावधानों को जीएसटी से लिंक कर दिया गया है। इसका असर यह हुआ कि 'जितना जीएसटी चुकाएंगे, उतना का ही लाभ उठा सकेंगे'। ऐसे में औद्योगिक नीति के तहत मिलने वाली सुविधाओं से उद्यमी वंचित हो गए हैं।

उद्यमी आकाश जालान ने बताया कि औद्योगिक नीति के अनुसार अगर किसी उद्यमी ने 10 करोड़ रुपये की इंडस्ट्री लगाई तो उसे 18 प्रतिशत जीएसटी के अनुसार 1.80 करोड़ रुपये इनपुट क्रेडिट मिलता है। पांच करोड़ रुपये का कच्चा माल लाते हैं तो 90 लाख रुपये इनपुट क्रेडिट मिलेगा। लेकिन, जीएसटी में जोड़े गए नए नियम के चलते इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।  

चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के पूर्व अध्यक्ष एसके अग्रवाल ने बताया कि प्रदेश की औद्योगिक नीति में तकनीकी सुधार की आवश्यकता है, ताकि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को औद्योगिक नीति के तहत दी जा रही सुविधाओं का लाभ मिल सके। कैपिटल सब्सिडी एवं ब्याज में छूट के लिए अलग से प्रावधान किया जाना चाहिए। ऐसा नहीं होने से औद्योगिक नीति बनने के तकरीबन चार साल बाद भी उद्यमियों को इसका फायदा नहीं मिल पा रहा है। मुख्यमंत्री को इस समस्या से अवगत कराया गया है।
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