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गोरखपुर: कृषि यंत्रों की खरीद में जीएसटी, कृषि अफसरों की भूमिका भी संदिग्ध

Thu, 31 Aug 2023 03:27 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 31 Aug 2023 03:27 PM IST
सार

कृषि उपनिदेशक कार्यालय के वरिष्ठ सहायक अजीत कुमार पटेल ने छह अगस्त को 10 कृषि यंत्र बेचने वाले फर्म संचालकों और 104 किसानों पर केस दर्ज कराया था। आरोप है कि इन्होंने नियम विरुद्ध जाकर ये खरीदारी की थी। इसमें जीएसटी की भी चोरी की गई थी।

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GST in purchase of agricultural machinery role of agriculture officers also suspicious
Gst - फोटो : Istock

विस्तार

गोरखपुर मंडल में कृषि यंत्रों की खरीद में हुए घोटाले में अब जांच के दायरे में जीएसटी एवं कृषि विभाग के अफसर भी आ गए हैं। इन दोनों विभागों के अफसरों ने आरोपों के घेरे में आईं फर्माें के कागजातों का सत्यापन कर भुगतान के लिए स्वीकृति दे दी थी।

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शासन के निर्देश पर जीएसटी की एसआईबी टीम ने जांच में सत्यापित रिपोर्ट में खामियां पाई हैं। जांच की जद में सिद्धार्थनगर और गोरखपुर की फर्में भी आ गई हैं। रिपोर्ट के आधार पर फर्मों के साथ ही कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है।
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तीन महीने पहले कृषि यंत्रों की खरीद में घपले का मामला सामने आया था। शिकायत पर इन जिलों में कृषि संबंधी उपकरणों पर किसानों को दिए गए अनुदान की जांच की गई। आरोप है कि किसानों को अनुदान दिए जाने में बड़े पैमाने पर लाभ देते हुए जीएसटी की चोरी की गई।
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मसलन, किसी किसान को एक लाख रुपये का कृषि यंत्र लेना था, तो फर्म से आवेदन करने पर कृषि विभाग की तरफ से सत्यापन कर 40 से 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है। इस अनुदान के बाद जिस फर्म से कृषि यंत्र खरीदा जाना है, उसे शासन से अनुदान राशि भेज दी जाती है। फर्म किसानों से शेष रकम लेकर यंत्र बेच देती है।

 

इसके बदले उसे जीएसटी रिकाॅर्ड में बेचे गए सामान का उल्लेख करना होता है। इसी में बड़े पैमाने पर खेल का मामला सामने आया है। इस तरह के मामलों की शिकायत पर शासन से महाराजगंज में कृषि यंत्रों की खरीदारी की जांच की गई। जीएसटी ने जांच कर इन मामलों में खरीद-बिक्री सही दिखाते हुए रिपोर्ट शासन को भेज दी थी। वहां जांच रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं होने पर मामले की जांच जीएसटी की एसआईबी को सौंपी गई।

जांच के दौरान सामने आया कि कृषि यंत्रों को खरीदने के नाम पर किसानों और फर्मों ने करीब दो करोड़ रुपये का हेरफेर किया है। इन मामलों में कृषि विभाग और जीएसटी के सत्यापन के बाद ही खरीदारी मिली।

 

क्या था मामला

कृषि उपनिदेशक कार्यालय के वरिष्ठ सहायक अजीत कुमार पटेल ने छह अगस्त को 10 कृषि यंत्र बेचने वाले फर्म संचालकों और 104 किसानों पर केस दर्ज कराया था। आरोप है कि इन्होंने नियम विरुद्ध जाकर ये खरीदारी की थी। इसमें जीएसटी की भी चोरी की गई थी।

जीएसटी एडिश्नल कमिश्नर ग्रेड वन विमल कुमार राय ने कहा कि महाराजगंज की दोनों सेक्टर टीम ने सत्यापन में कुछ गड़बड़ी की है। इसकी जांच चल रही है। शासन से रिपोर्ट तलब हुई है। जांच के बाद जिसकी गलती निकली, नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इन टीमों ने जीएसटी फर्मों के सत्यापन के कागजी और भौतिकी परीक्षण में कमी की थी।

 

केस 1
इसरावती देवी ने प्रशासनिक जांच में बयान दिया था कि उन्होंने कृषि यंत्रों की खरीदारी नहीं की थी। इस संबंध में किसी प्रकार का भी कारोबार नहीं किया गया था। न ही कृषि यंत्र को लेकर किसी प्रकार का भुगतान उन्हें मिला था। इस बयान का सत्यापन डिप्टी कमिश्नर खंड प्रथम में इसरावती देवी की तरफ से किया गया था।

केस 2
गोरखपुर से महाराजगंज रोड के बीच साधना शुक्ला नाम से फर्म है। इनके द्वारा महाराजगंज जीएसटी के समक्ष बयान दिया गया था कि 2017,18 और 19-20 का सारा रिकॉर्ड लेकर जांच में जा रही थीं। बस्ता रास्ते में कहीं गायब हो गया। इसी कारण कृषि यंत्र की खरीद-बिक्री की जानकारी देना संभव नहीं। जीएसटी ने इस बयान को सही मानते हुए जांच आगे बढ़ाकर हुए इसे सत्यापित कर रिपोर्ट सौंप दी थी।
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