Gorakhpur News: जीएसटी ने 50 व्यापारियों के परिजनों को दी 10 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता
त्यु होने पर दस लाख रुपये और दुर्घटना में दिव्यांग होने पर मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार पांच लाख या उससे अधिक तक का भुगतान होता है। इस योजना का लाभ मिलने वाले पंजीकृत व्यापारियों से किसी प्रकार की बीमा राशि भी नहीं ली जाती है। व्यापारियों के हित में मुख्यमंत्री दुर्घटना व्यापारी दुर्घटना बीमा योजना चलाई जा रही है।
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वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विभाग ने मंडल में अभी तक 50 व्यापारियों को 10 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद की है। इन सभी ने अपने व्यवसाए का जीएसटी में पंजीयन करवाया था। दुर्घटना में इनकी मौत हो गई थी। जीएसटी विभाग ने मुख्यमंत्री व्यापारी दुर्घटना बीमा के तहत इन्हें सरकार की योजना से लाभ दिया है। सात व्यापारियों को और मदद मिल सकती है। इनकी फी फाइल जीएसटी काउंसिल में भेजी गई है।
राज्य सरकार द्वारा संचालित इस योजना के तहत विभाग में पंजीकृत व्यापारी की हत्या अथवा दुर्घटना के फलस्वरुप मृत्यु/आंशिक व पूर्ण विकलांग हो जाने की स्थिति में व्यापारी के नामिनी/उत्तराधिकारी/स्वयं व्यापारी को 10 लाख रूपये तक का भुगतान किया जाता है। इसमें मृत्यु होने पर दस लाख रुपये और दुर्घटना में दिव्यांग होने पर मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार पांच लाख या उससे अधिक तक का भुगतान होता है। इस योजना का लाभ मिलने वाले पंजीकृत व्यापारियों से किसी प्रकार की बीमा राशि भी नहीं ली जाती है। व्यापारियों के हित में मुख्यमंत्री दुर्घटना व्यापारी दुर्घटना बीमा योजना चलाई जा रही है।
योजना के तहत आश्रित में पत्नी है तो उन्हें या बच्चे हैं तो संयुक्त रूप से सभी बच्चों को बराबर राशि प्रदान की जाती है। जीएसटी ग्रेड वन कमिश्नर विमल कुमार राय ने बताया कि व्यापारी का पंजीकरण होते ही इस योजना में वह खुद जुड़े जाता है। अगर दुर्घटना में उनकी मौत हो जाती है और परिजन इसकी जानकारी आकर जीएसटी विभाग को देते हैं, तो उन्हें मुख्यमंत्री दुर्घटना व्यापारी योजना के तहत भुगतान करने की सारी औपचारिकताएं पूरी करवाई जाती है।
अभी तक मंडल में 50 व्यापारियों को इसका लाभ दिया जा चुका है। पहले बीमा कंपनियों की देखरेख में यह योजना संचालित होती थी, जिसके कारण व्यापारियों को लाभ मिलने में देरी होती थी। अब सरकार जीएसटी विभाग को माध्यम से आवेदन स्वीकृत कर भुगतान कर रही।
परिजन कैसे करें आवेदन?
पंजीकृत व्यापारी की अगर दुर्घटना की मौत होती है तो सबसे पहले परिजन को चाहिए कि एफआइआर दर्ज कराएं। एफआइआर की कॉपी, मृत्यु प्रमाण पत्र, पोस्टमार्टम रिपोर्टर, खुद का आधार कार्ड, संबंधों का प्रमाण पत्र अपने जिले के उपायुक्त प्रशासन के यहां जमा करें। इसके बाद इसकी जांच कर पूरी रिपोर्ट संयुक्त आयुक्त जीएसटी के यहां भेजी जाती है। प्रपत्रों की जांच पूरी करने के बाद मंडल कार्यालय से उसे शासन को भेजा जाता है। फिर सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद मुख्यालय से आश्रित के खाते में सीधे राशि भेजी जाती है।
इन परिजनों को मिल चुका है लाभ
प्रवीण कुमार जायसवाल, अरविंद कुमार, रमेश प्रसाद, रविकांत मिश्रा, स्व फौजदार, विजय कुमार पांडेय, अनिल गिरी, दिनेश कुमार अग्रहरि, रजत सिंह, अनुज कुमार, संतोष कुमार, विनोद त्रिपाठी, कन्हैया लाल जायसवाल, आदित्य कश्यप, अविनाश गौतम, नरेंद्र शर्मा, अवधेश कुमारस मनीष गुप्ता, रामदेव, प्रभारूण मिश्रा, अमित कुमार, प्रमोद शंकर तिवारी, सत्येंद्र विक्रम सिंह, मान सिंह, सुरेश कुमार गुप्ता, सुशील, अजीत सिंह, आकाश जायसवाल,बृजेश, सुरेंद्र गिरी, रघुनाथ, संतोष गुप्ता, प्रशांत सिंह, शंभू, जय नारायण शाह, मधुर भाटिया, प्रवीन मिश्रा, कुलदीप गौड़, बलराम बर्नवाल, गजेंद्र बथवाल, योगेश जायसवाल, अनिल कुमार, उदित राव, अंजनि मिश्रा, राजाराम, ओमप्रकाश, रामदास मौर्य, सत्सेंद्र विक्रम दीपक छापड़िया और सविता छापड़िया शामिल हैं।