डॉक्टर की सलाह: समय पर इलाज न कराने पर बढ़ रहा मर्ज, लिवर से लेकर कैंसर तक के मिल रहे मरीज
छोटे काजीपुर के रहने वाले सुलेमान को काफी समय से पेट दर्द की शिकायत थी। मेडिकल स्टोर से दवा लेकर काम चलाते रहे। मामला बढ़ा तो जिला अस्पताल में दिखाया तो पता चला कि लिवर बढ़ गया है।
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समय पर इलाज न कराने पर मर्ज बढ़ रहा है। जांच में लिवर से लेकर कैंसर तक के मरीज मिल रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मामूली परेशानी समझकर लोग चिकित्सकों को दिखाने से बचते हैं। इसका नतीजा यह है कि हर सप्ताह बीआरडी से लेकर जिला अस्पताल और एम्स की ओपीडी में 60 से अधिक लोगों को भर्ती करने की नौबत आ रही है। इनमें ऐसे मरीज हैं, जिन्हें सही समय पर अगर इलाज मिल जाता तो गंभीर बीमारियों से बचाया जा सकता था।
जानकारी के मुताबिक, सबसे अधिक मरीज चर्म रोग और लिवर के मिल रहे हैं। कैंसर जैसी बीमारी की भी पुष्टि मरीजों में हो रही है। जिला अस्पताल के चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. एनके वर्मा का कहना है कि चर्म रोग को लोग नजरअंदाज न करें, वरना परिवार के अन्य सदस्य भी बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। इसी तरह अगर लिवर के मरीज लापरवाही करेंगे तो पेट के कई रोगों को दावत दे सकते हैं।
छोटे काजीपुर के रहने वाले सुलेमान को काफी समय से पेट दर्द की शिकायत थी। मेडिकल स्टोर से दवा लेकर काम चलाते रहे। मामला बढ़ा तो जिला अस्पताल में दिखाया तो पता चला कि लिवर बढ़ गया है। जिला अस्पताल के डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि मरीज को ऑपरेशन की सलाह दी गई है। जबकि, अगर मरीज सही समय पर इलाज के लिए आ जाता तो दवाइयों से ठीक किया जा सकता था।
दांतों में दर्द था, जांच में कैंसर निकला
कूड़ाघाट के रहने वाले रमेश कुमार को दांतों में दर्द और सड़न की शिकायत थी। कई अस्पतालों में डॉक्टरों को दिखा चुके थे। राहत न होने पर एम्स में इलाज के लिए गए। इस बीच डॉक्टरों ने कैंसर जांच की सलाह दी। लखनऊ में जांच कराया तो पता चला कि मुंह का कैंसर हो गया है। डॉक्टरों ने बताया कि अगर सही समय पर इलाज हो गया होता तो कैंसर से बचाया जा सकता था।
आरोग्य मेले में भी आई थी इस तरह की शिकायतें
कोरोना की पहली लहर में लॉकडाउन के बाद जब मुख्यमंत्री आरोग्य मेले की शुरुआत की गई थी, तो यह बातें सामने आईं थीं कि इलाज में देरी की वजह से लोगों का मर्ज बढ़ता चला गया। एक माह के अंदर चार आरोग्य मेले में कैंसर के 11 मरीज मिले थे, जबकि 160 ऐसे मरीज मिले थे, जिन्हें तत्काल भर्ती करने की नौबत पड़ गई थी। ऐसे में डॉक्टरों ने सलाह दी है कि अगर जरा भी दिक्कत होती है तो तत्काल चिकित्सक से संपर्क करें। खुद से दवाइयां न लें।
इलाज में देरी की वजह से बढ़ रहा मर्ज
डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि जब से कोरोना महामारी आई है तब से लोग इलाज में लापरवाही कर रहे हैं। यह उनकी सेहत के लिए ठीक नहीं है। पहली लहर से लेकर तीसरी लहर के बीच कई ऐसे मरीज मिले हैं, जिनके इलाज में देरी हुई है। उन्हें गंभीर रूप से बीमार होना पड़ा है। ऐसे मरीजों की संख्या प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। हरदिन ओपीडी में चार से पांच मरीजों को भर्ती कर ऑपरेशन की सलाह देनी पड़ रही है। यही हाल बीआरडी मेडिकल कॉलेज और एम्स का भी है।