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Varun Singh: कैप्टन वरुण सिंह का पूर्वांचल से है गहरा नाता, सलामती के लिए पूरा देश कर रहा दुआ

Fri, 10 Dec 2021 06:44 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 10 Dec 2021 06:44 PM IST
सार

हेलीकॉप्टर हादसे में 14 लोगों में से इकलौते जीवित बचे हैं ग्रुप कैप्टन वरुण, दस हजार फीट से विमान की लैंडिंग कराने पर मिल चुका है शौर्य चक्र।

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Group Captain Varun singh special story only survivor out of 14 people in helicopter crash
विंग कमांडर वरुण सिंह - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

तमिलनाडु के हेलीकॉप्टर हादसे में 14 लोगों में से एकलौते जीवित बचे ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह का पूर्वांचल से गहरा नाता है। देवरिया उनकी जन्मभूमि तो गोरखपुर कर्मभूमि रही है। वह गोरखपुर में बतौर फाइटर पायलट जगुआर के स्क्वाड्रन में तैनात रहे। चार माह पहले वरुण सिंह राष्ट्रपति के हाथों शौर्य चक्र से सम्मानित हो चुके हैं। हादसे की खबर मिलने के बाद से ही सभी, अपने जांबाज लाल के शीघ्र स्वस्थ और दीर्घायु होने की प्रार्थना कर रहे हैं।

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जानकारी के मुताबिक, वरुण सिंह  देवरिया के कन्हौली गांव के रहने वाले हैं। वह मूलरूप से फाइटर पायलट हैं। साल 2007 से 2009 तक उनकी गोरखपुर में पोस्टिंग रही है। वह जगुआर फाइटर प्लेन उड़ाते रहे हैं। गोरखपुर से उनका हैदराबाद तबादला हुआ था। इन दिनों तमिलनाडु के वेलिंगटन में तैनाती है। वेलिंगटन स्थित डिफेंस एकेडमी के कार्यक्रम में सीडीएस रावत को हिस्सा लेना था, कैप्टन उनके साथ जा रहे थे, लेकिन पहले ही हादसा हो गया।
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पूर्व विधायक अखिलेश प्रताप सिंह के भतीजे हैं
ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह, कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता व पूर्व विधायक अखिलेश प्रताप सिंह के भतीजे हैं। 12 अक्तूबर 2020 को फ्लाइंग कंट्रोल सिस्टम खराब होने के बावजूद, वरुण ने करीब दस हजार फीट की ऊंचाई से विमान की सफल लैंडिंग कराई थी। इसके लिए 15 अगस्त को राष्ट्रपति ने उन्हें शौर्य चक्र से सम्मानित किया था। वरुण के चाचा अखिलेश प्रताप सिंह ने कहा कि सेना के अधिकारियों द्वारा हादसे में वरुण के घायल होने की सूचना मिली है। ईश्वर से उनके जल्द ठीक होने की कामना की जा रही है।

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प्रो दिव्यारानी सिंह के चचेरे भाई हैं वरुण

ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह गोरखपुर विश्वविद्यालय में गृह विज्ञान की विभागाध्यक्ष प्रो दिव्यारानी सिंह के चचेरे भाई हैं। प्रो. दिव्यारानी बताती हैं कि वरुण से परिवार का मान-सम्मान बढ़ा है। शौर्य चक्र मिलने के बाद क्षेत्र के लोगों का सीना चौड़ा हो गया। सब गर्व से वरुण की शौर्यगाथा सुनाते हैं। ग्रुप कैप्टन वरुण की पढ़ाई चंडीगढ़ से हुई है। वह शुरू से मेधावी व बहादुर रहे हैं। भीषण हादसे की खबर सुनकर परिवार के लोग घबरा गए थे। इस बीच अस्पताल में भर्ती होने की खबर आ गई। अब परिवार के लोग वरुण के सकुशल घर आने की प्रार्थना कर रहे हैं। अस्पताल में वरुण की पत्नी गीतांजलि हैं।   

पिता केपी सिंह भी सेना में रहे, पत्नी व बच्चे रहते हैं साथ

प्रो दिव्यारानी के मुताबिक वरुण के पिता कर्नल केपी सिंह भी देश सेवा कर चुके हैं। रिटायरमेंट के बाद वह भोपाल में रह रहे हैं। वरुण की पोस्टिंग तमिलनाडु में है। पत्नी गीतांजलि, बेटा रिद्धिमान व बेटी आराध्या वहीं रहती हैं।
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