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गोरखपुर: उद्योगों को पानी की हर बूंद का देना होगा हिसाब, भूगर्भ जल विभाग ने जारी किया नोटिस
Tue, 20 Jul 2021 12:26 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 20 Jul 2021 12:26 PM IST
सार
भूगर्भ जल विभाग ने गीडा के उद्योगों समेत सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को जारी किया नोटिस
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
गोरखपुर के गीडा में लगे उद्योगों एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को उनके यहां इस्तेमाल होने वाले पानी का पूरा हिसाब देना होगा। कोई भी औद्योगिक इकाई, व्यावसायिक प्रतिष्ठान या डिब्बा बंद पानी की आपूर्ति करने वाली संस्था को खर्च किए गए भूगर्भ जल के हिसाब से कीमत चुकानी पड़ेगी। भूगर्भ जल विभाग ने गीडा के सभी उद्योगों समेत शहर के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नोटिस देना शुरू कर दिया है।
प्रदेश में जलस्तर गिरावट के मद्देनजर सरकार ने भूगर्भ जल अधिनियम को तैयार किया है। इसके तहत भूगर्भ जल का व्यावसायिक इस्तेमाल करने वाले सभी प्रतिष्ठानों या संस्थानों को खपत किए गए भूगर्भ जल के अनुसार वार्षिक भुगतान करना होगा। इसके अलावा सभी प्रतिष्ठानों और संस्थानों को न सिर्फ रजिस्ट्रेशन कराना होगा, बल्कि विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र भी लेना होगा। इसके तहत स्कूल, कॉलेज, होटल, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी रजिस्ट्रेशन कराने के अलावा अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना होगा।
घरेेलू और कृषि भूगर्भ जल उपभोक्ता को नहीं देना होगा शुल्क
भूगर्भ जल विभाग प्राविधिक सहायक दिनेश अग्रवाल ने बताया कि उत्तर प्रदेश भूगर्भ जल अधिनियम के अनुसार सभी वाणिज्यिक, औद्योगिक और सामूहिक भूगर्भ जल उपभोक्ताओं को भूगर्भ जल के इस्तेमाल के लिए भूगर्भ जल विभाग में रजिस्ट्रेशन के लिए पांच हजार रुपये और अनापत्ति प्रमाणपत्र के लिए भी पांच हजार रुपये शुल्क की रसीद कटानी होगी। इसके बाद खपत के हिसाब से वार्षिक शुल्क अदा करना होगा। घरेलू और कृषि भूगर्भ जल उपभोक्ता को किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं देना है। गीडा के उद्यमियों को इस संबंध में नोटिस भेजा जाने लगा है।
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प्रदेश में जलस्तर गिरावट के मद्देनजर सरकार ने भूगर्भ जल अधिनियम को तैयार किया है। इसके तहत भूगर्भ जल का व्यावसायिक इस्तेमाल करने वाले सभी प्रतिष्ठानों या संस्थानों को खपत किए गए भूगर्भ जल के अनुसार वार्षिक भुगतान करना होगा। इसके अलावा सभी प्रतिष्ठानों और संस्थानों को न सिर्फ रजिस्ट्रेशन कराना होगा, बल्कि विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र भी लेना होगा। इसके तहत स्कूल, कॉलेज, होटल, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी रजिस्ट्रेशन कराने के अलावा अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना होगा।
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घरेेलू और कृषि भूगर्भ जल उपभोक्ता को नहीं देना होगा शुल्क
भूगर्भ जल विभाग प्राविधिक सहायक दिनेश अग्रवाल ने बताया कि उत्तर प्रदेश भूगर्भ जल अधिनियम के अनुसार सभी वाणिज्यिक, औद्योगिक और सामूहिक भूगर्भ जल उपभोक्ताओं को भूगर्भ जल के इस्तेमाल के लिए भूगर्भ जल विभाग में रजिस्ट्रेशन के लिए पांच हजार रुपये और अनापत्ति प्रमाणपत्र के लिए भी पांच हजार रुपये शुल्क की रसीद कटानी होगी। इसके बाद खपत के हिसाब से वार्षिक शुल्क अदा करना होगा। घरेलू और कृषि भूगर्भ जल उपभोक्ता को किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं देना है। गीडा के उद्यमियों को इस संबंध में नोटिस भेजा जाने लगा है।
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यह है निर्धारित शुल्क
- घरेलू और कृषि भूगर्भ जल उपभोक्ता- शून्य
- वाणिज्यिक भूगर्भ जल उपभोक्ता- 90 पैसे से 1.50 रुपये प्रति घन मीटर रोजाना
- औद्योगिक एवं सामूहिक भूगर्भ जल उपभोक्ता- 70 पैसे से 1.30 रुपये प्रति घन मीटर रोजाना
भूगर्भ जल के स्तर के अनुसार अलग-अलग शुल्क तय
दिनेश अग्रवाल ने बताया कि भूगर्भ जल के स्तर के अनुसार वाणिज्यिक और औद्योगिक एवं सामूहिक जल उपभोक्ता को दो अलग श्रेणी में बांटते हुए क्षेत्र के हिसाब से शुल्क निर्धारित किया गया है। भूगर्भ जल स्तर श्रेणी, सेमी क्रिटिकल, क्रिटिकल के अलावा अति दोहित यानी शहरी क्षेत्र के लिए अलग-अलग श्रेणी में वार्षिक शुल्क तय किया गया है। भूगर्भ जलस्तर की श्रेणी के हिसाब से प्रतिदिन 500 घन मीटर, 500 से 1000 घनमीटर, 1000 से 5000 घनमीटर और 5000 घनमीटर रोजाना के हिसाब से शुल्क तय है। वार्षिक भूगर्भ जलदोहन शुल्क का निर्धारण जलस्तर की विभिन्न श्रेणी में जल के दोहन से संबंधित स्लैब की दर, भूगर्भ जल उपयोग की मात्रा एवं एक वर्ष में पंपिंग दिनों को गुणा करके किया जाएगा।