सरकारी चावल हड़पने का मामला: 11 माह से जांच और कार्रवाई में कोई प्रगति नहीं, जांच रिपोर्ट दबाने का आरोप
जिन अधिकारियों के समय में गड़बड़ी की गई है वे अब भी तैनात हैं। अधिकारियों पर जांच रिपोर्ट दबाने का आरोप लगा है।
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गोरखपुर जिले के सात राइस मिलरों द्वारा 34,451.49 कुंतल सरकारी चावल हड़पने के मामले में बीते 11 माह से न तो जांच आगे बढ़ रही है और न ही कोई प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। आरटीआई कार्यकर्ता का आरोप है कि जिन अधिकारियों के समय में गड़बड़ी हुई है, वह अब भी तैनात हैं। लिहाजा, जांच रिपोर्ट दबाई जा रही है। मामले की निष्पक्ष व स्वतंत्र एजेंसी से जांच होनी जरूरी है।
आरटीआई से 22 नवंबर 2021 को मिली जानकारी के मुताबिक मामले की जांच अपर जिला सहकारी अधिकारी अधिकोषण, उपभोक्ता, सहजनवां व सदर ने की है। जांच चार अगस्त 2020 को पूरी हुई थी। सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता गोरखपुर सुनील कुमार गुप्ता ने रिपोर्ट बनाकर छह अगस्त 2020 को सहकारिता उत्तर प्रदेश के अपर आयुक्त एवं अपर निबंधक प्रशासन को उपलब्ध कराई।
पांच अक्तूबर 2020 को यही रिपोर्ट यूपी पीसीएफ के प्रबंध निदेशक के पास भेजी गई। प्रबंध निदेशक ने कुछ आपत्ति की तो कार्यकारी निदेशक सहकारिता आलोक दीक्षित ने 23 दिसंबर 2020 को दोबारा रिपोर्ट तलब कर ली। इसके बाद अपर आयुक्त एवं अपर निबंधक प्रशासन जमुना प्रसाद पांडेय ने 14 जनवरी 2021 में सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता गोरखपुर सुनील कुमार को पत्र लिखा और एक सप्ताह के अंदर तत्कालीन जिला प्रबंधक पीसीएफ शैलेश कुमार के खिलाफ मिले साक्ष्य व घोटाले से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। करीब 11 महीने का समय बीत चुका है, लेकिन रिपोर्ट नहीं भेजी गई। मामला जहां का तहां पड़ा है।
गीडा के मिलर ने गायब किया 13892.25 कुंतल चावल
जांच रिपोर्ट के मुताबिक मेसर्स स्वास्तिक एग्रो इंडस्ट्रीज गीडा ने 2018-19 में ही 13,892.25 कुंतल चावल (कस्टम मिल्ड राइस) डिलिवरी नहीं की। इसकी कीमत 4.08 करोड़ 20 हजार 15 रुपये है। यह धनराशि गबन की गई है। इस मामले में आरसी जारी की गई। साथ ही गीडा स्थित इंस्ट्रीज की जमीन पीसीएफ के पक्ष में पंजीकृत बंधक कराई गई, लेकिन कोई दंडात्मक कानूनी कार्रवाई नहीं हो सकी।
आरसी मिली तो नाम बदलकर शुरू कर दी धान कुटाई
रिपोर्ट के मुताबिक 2017-18 में मेसर्स जय मां शक्ति माडर्न राइस मिल शांति नगर टिकरिया रोड महराजगंज ने 6,930.064 कुंतल कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) हड़प लिया। इसके प्रति प्रति कुंतल चावल का मूल्य 2620.20 रुपये है। यानी चावल की वास्तविक कीमत 1.81 करोड़ 58 हजार 415.41 रुपये है। मिलर के खिलाफ आरसी भी जारी हुई, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। रिपोर्ट में फर्जीवाड़े की तरफ भी इशारा किया गया है। कहा गया है कि आरसी जारी होने के बाद मेसर्स जय मां शक्ति माडर्न राइस मिल ने अपना नाम बदल लिया और अंबे राइस मिल परमेश्वरपुर के नाम से धान कुटाई का काम शुरू कर दिया, लेकिन जिम्मेदारों ने आंखें मूंद ली।
इन राइस मिलरों ने गायब किया चावल (मूल्य सहित)
तीन राइस मिलरों ने 19, 820.14 कुंतल चावल हड़प लिया। इसकी कीमत पांच करोड़ 78 लाख 88 हजार 088 रुपये बताई गई है।
- मेसर्स स्वास्तिक एग्रो इंडिया गीडा गोरखपुर (4,08,20,015 रुपये)
- मेसर्स शक्ति ट्रेडिंग कंपनी गीडा गोरखपुर (1, 46, 21,541 रुपये)
- मेसर्स लक्ष्मी गोरखपुर (24,46,532 रुपये) (आरसी जारी होने के बाद 33 लाख 50 हजार रुपये जमा किए, बाकी बकाया है)
जांच रिपोर्ट के मुताबिक चार राइस मिलरों ने 2017-18 में 14631.35 कुंतल कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) हड़प लिया। इन सबके ऊपर तीन करोड़ 83 लाख 34 हजार 480 रुपये की बकाएदारी है।
- मेसर्स जय गुरुदेव ट्रेडिंग कंपनी बढ़नी गोपालपुर खजनी (2,53,16,828 रुपये)
- मेसर्स संकल्प मिनी राइस मिल महराजगंज परमेश्वरपुर गोरखपुर (48,71,755 रुपये)
- मेसर्स शाद एग्रो सिहाइचपार गगहा गोरखपुर (30,91,625 रुपये)
- मेसर्स कृष्ण एग्रो गुलरिहा बाजार गोरखपुर (50,54,232 रुपये)
मुकदमा दर्ज कराया, फिर भी रिकवरी नहीं
मेसर्स शक्ति ट्रेडिंग कंपनी गीडा गोरखपुर (1,46,21,541) ( इस मिलर के खिलाफ सहजनवां थाने में मुकदमा (अपराध संख्या 0280/2019) दर्ज कराया गया था। मिलर ने सरकारी चावल हड़प लिया था। आरसी जारी हुई, लेकिन वसूली नहीं की गई।
गेहूं हड़प करके पहुंचाया एक करोड़ से ज्यादा का नुकसान
पीसीएफ ने अलग-अलग सत्रों में गेहूं की भी खरीदारी की थी। इसका सरकार ने भुगतान किया, लेकिन गेहूं सरकारी गोदाम तक नहीं पहुंचा। जांच रिपोर्ट के मुताबिक गेहूं हड़पने से 1,06,79, 609 रुपये का नुकसान हुआ है। अगर गेहूं और चावल के नुकसान को देखा जाए तो आंकड़ा 10,69,02,137 रुपये तक पहुंच जाएगा। यह मोटी रकम राइस मिलरों व क्रय केंद्र प्रभारियों से वसूली जानी है।
आरटीआई कार्यकर्ता संजय मिश्रा ने कहा कि आरटीआई से जो जांच रिपोर्ट मिली है, उससे बड़े गोलमाल की पुष्टि हुई है। धांधली तीन सत्रों की धान कुटाई में हुई है। गेहूं खरीदकर सरकारी गोदामों में नहीं भेजा गया। जिन अधिकारियों के समय में गड़बड़ी हुई, वही अब भी तैनात हैं। लिहाजा, जांच रिपोर्ट दबाई जा रही है। निष्पक्ष जांच हो तो धांधली अरबों रुपये की होगी। अब साक्ष्यों के साथ उच्च स्तरीय अधिकारियों के पास जाएंगे। मामले की निष्पक्ष व स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग करेंगे। जिम्मेदार अफसर व मिलरों पर प्रभावी कार्रवाई जरूरी है।