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Gorakhpur News: वैचारिक विरासत में भी समृद्ध है गोरक्षनगरी
Thu, 18 Apr 2024 05:01 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Thu, 18 Apr 2024 05:01 AM IST
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फोटो-विश्व विरासत दिवस आज
-गोरखपुर में सहेजी जा रही है प्राचीन विरासतें
-विरासत गलियारा से बदल जाएगी सुविधाएं, आसानी होगी गीता प्रेस की राह
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। गोरक्षनगरी में भौतिक विरासतों को सहेजा जा रहा है, जबकि वैचारिक विरासत के मामले में भी यह क्षेत्र समृद्ध है। प्राचीन काल में यहां जिस वैचारिकता का सृजन हुआ है, वह बेहद महत्वपूर्ण है। गोरखपुर में बनाए जा रहे विरासत गलियारा से भी गीता प्रेस और घंटाघर का मार्ग और सुगम हो जाएगा। गोरखपुर में सूर्य, शिव और वैष्णव क्षेत्र है। तीनों से संबंधित प्राचीन मूर्तियां यहां बहुतायत प्राप्त हुई हैं। गोरखपुर में पुर नामांत है, इससे प्रतीत है कि यह प्राचीन नगर है और यहां की विरासत समृद्ध है।
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास, संस्कृति व पुरातत्व विभाग के प्रो. राजवंत राव के अनुसार विरासतें दो प्रकार की होती है। भौतिक के साथ वैचारिक विरासत भी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि गोरखपुर में चतुराश्रम की अवधारणा विकसित हुई थी। सूर्य की प्रतिमाएं प्राप्त हुई और सूर्य नारायण की परंपरा का विकास भी यहीं हुआ, जबकि हरिहर यानी शिव और वैष्णव मतों के समन्वय का विकास भी इसी क्षेत्र में है। शिवावतारी गुरु गोरक्षनाथ ने बेहतर जीवन शैली का पैकेज दिया है। इसमें अनुपस्थित रहते हुए उपस्थित होने का ज्ञान है। गोरखवाणी के अध्ययन में जीवन की सहज पद्धति का ज्ञान मिलता है। इसी प्रकार गीता प्रेस का वैचारिक योगदान बहुत महत्वपूर्ण है।
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एक गलियारे में होंगी विरासतें
गोरखपुर में विरासत गलियारा बनाया जा रहा है। इसमें शहर की सारी विरासतों की राह एक हो जाएगी। यह 194 करोड़ रुपये की परियोजना है, जिससे धर्मशाला बाजार से जटाशंकर तिराहा, अलीनगर चौराहा, बक्शीपुर, रेती चौक होते हुए घंटाघर तक 5.5 से 7 मीटर सड़क चौड़ी हो जाएगी। टाउनहाल से गीता प्रेस तक सड़क चौड़ी हो जाएगी तो मार्ग सुगम हो जाएगा। आजादी के पहले 1923 में गीता प्रेस की स्थापना हुई थी। गोरखनाथ मंदिर समृद्ध विरासत है। मध्यकालीन भारत का बसंत सराय है। विष्णु मंदिर 9वीं शताब्दी का है। लालडिग्गी के पास अग्नि की प्रतिमा प्राप्त हुई थी, असुरन चौक वैदिक कालीन है।
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-गोरखपुर में सहेजी जा रही है प्राचीन विरासतें
-विरासत गलियारा से बदल जाएगी सुविधाएं, आसानी होगी गीता प्रेस की राह
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। गोरक्षनगरी में भौतिक विरासतों को सहेजा जा रहा है, जबकि वैचारिक विरासत के मामले में भी यह क्षेत्र समृद्ध है। प्राचीन काल में यहां जिस वैचारिकता का सृजन हुआ है, वह बेहद महत्वपूर्ण है। गोरखपुर में बनाए जा रहे विरासत गलियारा से भी गीता प्रेस और घंटाघर का मार्ग और सुगम हो जाएगा। गोरखपुर में सूर्य, शिव और वैष्णव क्षेत्र है। तीनों से संबंधित प्राचीन मूर्तियां यहां बहुतायत प्राप्त हुई हैं। गोरखपुर में पुर नामांत है, इससे प्रतीत है कि यह प्राचीन नगर है और यहां की विरासत समृद्ध है।
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास, संस्कृति व पुरातत्व विभाग के प्रो. राजवंत राव के अनुसार विरासतें दो प्रकार की होती है। भौतिक के साथ वैचारिक विरासत भी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि गोरखपुर में चतुराश्रम की अवधारणा विकसित हुई थी। सूर्य की प्रतिमाएं प्राप्त हुई और सूर्य नारायण की परंपरा का विकास भी यहीं हुआ, जबकि हरिहर यानी शिव और वैष्णव मतों के समन्वय का विकास भी इसी क्षेत्र में है। शिवावतारी गुरु गोरक्षनाथ ने बेहतर जीवन शैली का पैकेज दिया है। इसमें अनुपस्थित रहते हुए उपस्थित होने का ज्ञान है। गोरखवाणी के अध्ययन में जीवन की सहज पद्धति का ज्ञान मिलता है। इसी प्रकार गीता प्रेस का वैचारिक योगदान बहुत महत्वपूर्ण है।
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एक गलियारे में होंगी विरासतें
गोरखपुर में विरासत गलियारा बनाया जा रहा है। इसमें शहर की सारी विरासतों की राह एक हो जाएगी। यह 194 करोड़ रुपये की परियोजना है, जिससे धर्मशाला बाजार से जटाशंकर तिराहा, अलीनगर चौराहा, बक्शीपुर, रेती चौक होते हुए घंटाघर तक 5.5 से 7 मीटर सड़क चौड़ी हो जाएगी। टाउनहाल से गीता प्रेस तक सड़क चौड़ी हो जाएगी तो मार्ग सुगम हो जाएगा। आजादी के पहले 1923 में गीता प्रेस की स्थापना हुई थी। गोरखनाथ मंदिर समृद्ध विरासत है। मध्यकालीन भारत का बसंत सराय है। विष्णु मंदिर 9वीं शताब्दी का है। लालडिग्गी के पास अग्नि की प्रतिमा प्राप्त हुई थी, असुरन चौक वैदिक कालीन है।
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