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Exclusive: 246 करोड़ रुपये खर्चे के बाद भी गोरखपुर प्राणी उद्यान 'बेजान', सीएम योगी के ड्रीम प्रोजेक्ट पर बड़ा सवाल

Fri, 27 Aug 2021 07:39 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो रोहित सिंह, गोरखपुर।
रोहित सिंह, गोरखपुर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Fri, 27 Aug 2021 07:39 AM IST
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Gorakhpur Zoological Park lifeless even after spending 246 crores due to discomfort in zoo
गोरखपुर चिड़ियाघर। - फोटो : अमर उजाला।
‘प्राणी उद्यान के हालात को देखते हुए लगता है कि मुख्यमंत्री महोदय को कुछ दिनों के लिए चिड़ियाघर बंद करवा देना चाहिए।’ चिड़ियाघर की विजिटर बुक पर लिखी यह इबारत 246 करोड़ रुपये खर्च करके बनाए गए मुख्यमंत्री के पसंदीदा प्रोजेक्ट की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल है। कुछ विभागीय अधिकारी हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी नहीं कराए जाने को बदहाली के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। विभागीय जानकार कहते हैं कि कार्यदायी संस्था और प्राणि उद्यान प्रबंधन के बीच सामंजस्य नहीं होने की वजह से बहुत से काम रुके रह गए।


मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक शहर का प्राणि उद्यान है। विश्व स्तर पर पहचान बन सके, इसलिए चिड़ियाघर को सुविधाओं व संसाधनों के साथ बनाने का निर्णय लिया था। इसमें जब-जब जरूरत पड़ी, शासन ने धन राशि बढ़ाकर स्वीकृत की और आननफानन में इसे अवमुक्त भी किया। लेकिन, उद्घाटन के बाद अभी भी 51 से अधिक बिंदुओं पर सुधार कार्य कराया जाना है। इस काम के पूरा नहीं होने की वजह से हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। सवाल है कि आखिर जब शासन की तरफ से स्वीकृत धनराशि अवमुक्त हो गई थी तो आखिर निर्माण या सुधार संबंधी काम उद्घाटन के पहले पूरा क्यों नहीं कराया गया?
Gorakhpur Zoological Park lifeless even after spending 246 crores due to discomfort in zoo
गोरखपुर चिड़ियाघर। - फोटो : अमर उजाला।
चिड़ियाघर प्रबंधन का कहना है कि बार-बार कार्यदायी संस्था निर्माण निगम को पत्र लिखकर बुलाया जा रहा, लेकिन कोरोना और अन्य कारणों से टीम नहीं आ सकी। इस वजह से प्राणि उद्यान द्वारा कराए जाने वाले सुधार कार्य नहीं हो सके हैं? ढिलाई की हालत यह है कि प्राणि उद्यान को खुले हुए पांच महीने पूरे हो गए, लेकिन अभी भी पूरी तरह से हैंडओवर की प्रक्रिया नहीं हो सकी है। निदेशक एच राजामोहन को हैंडओवर के संबंध में कागजात दिखाने पर उन्होंने कहा कि हमारे पास नहीं है। खुलने के पहले सिर्फ बाड़ों को हैंडओवर कराया गया था।
Gorakhpur Zoological Park lifeless even after spending 246 crores due to discomfort in zoo
गोरखपुर चिड़ियाघर। - फोटो : अमर उजाला।
निर्माण निगम का फंड भी है फंसा
प्राणि उद्यान के निर्माण में उद्घाटन के पहले 246 करोड़ रुपये अवमुक्त गए थे। इसके बाद भी काम को पूरा करने के लिए लोक निर्माण विभाग का दावा है कि उसे अपने पास से फंड लगाना पड़ा। निदेशक ने बताया कि 4.95 करोड़ रुपये के आसपास निर्माण निगम विभाग को अपने कराए काम के अभी भी चाहिए। उद्घाटन के पहले ही इसके लिए पत्र भेजा गया है। लेकिन, सवाल है कि आखिर 246 करोड़ रुपये जो अवमुक्त हो चुके थे, क्या वे काम के लिए पर्याप्त नहीं थे? अतिरिक्त रुपये भी निर्माण निगम विभाग की तरफ से लगाया जा चुका, इसके बाद भी प्राणि उद्यान में अभी भी 30 से अधिक बिंदुओं पर काम में गड़बड़ी दिख रही है। लोक निर्माण विभाग के परियोजना प्रबंधन डीबी सिंह ने बताया कि किए गए काम का कुछ फंड अभी फंसा है। उन्होंने भी बताया कि उनसे हैंडओवर की प्रक्रिया के लिए उद्घाटन के पहले किसी ने नहीं कहा था। उनकी तरफ से किसी प्रकार की रोक नहीं थी।
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Gorakhpur Zoological Park lifeless even after spending 246 crores due to discomfort in zoo
गोरखपुर चिड़ियाघर। - फोटो : अमर उजाला।
दर्शकों के साथ भी हो रहा छलावा
चिड़ियाघर में प्रतिदिन एक हजार या उससे अधिक लोग घूमने आते हैं। इन्हें 50 रुपये का प्रवेश शुल्क लेना होता है। दर्शकों को इसी टिकट पर चिड़ियाघर के अंदर बाड़े, कैफेटेरिया, तितलीघर, इंटरपेटेशन सेंटर का लुत्फ लेना है। जबकि वर्तमान में अंदर घूमने वाले दर्शकों को सिर्फ बाड़ा घूमने और वन्य जीव देखने को ही मिलते हैं। जबकि, करोड़ों रुपयों की लागत से बनकर तितलीघर, इंटरपेटेशन सेंटर अभी तक नहीं खुल सका है। निदेशक ने बताया कि 7डी में कुछ तकनीकी सुधार इंटरपेटेशन सेंटर के सामानों से किया गया था। इसलिए उसे अभी नहीं खोला जा सका। जबकि, सूत्र ने बताया कि सेंटर के अंदर लगभग 70 लाख रुपये से अधिक का काम हो चुका है। इसके बाद भी अभी बंद पड़ा है। तितलीघर एक प्रमुख आकर्षण चिड़ियाघर का है, इसे भी बंद रखा गया है। ये उसी टिकट की दर पर दर्शकों को देखने को मिलता। जबकि 7डी के लिए दर्शकों को 15 मिनट की फिल्म के लिए 100 रुपये का अतिरिक्त टिकट लेना पड़ता। ऐसे में दर्शकों से प्राणि उद्यान प्रबंधन जितने का टिकट ले रहा है उतनी मिलने वाली सुविधाएं नहीं मिल रहीं हैं।
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Gorakhpur Zoological Park lifeless even after spending 246 crores due to discomfort in zoo
गोरखपुर चिड़ियाघर। - फोटो : शिव हर्ष द्विवेदी।
प्राणि उद्यान परिसर के शेष कार्य-कमियां
साइनेज बिल्डिंग-लोहे की सीढ़ी पर दरवाजा का काम, इंट्रेंस प्लाजा की दीवारों पर सीलन, इंट्रेस प्लाजा में फायर सेंसर का कार्य न करना और छत पर पानी का ठहराव खत्म करना, बंदर के बाड़े में टूटे हुए गिलोटिन वायर के लिए बनाए छिद्र से पानी का अंदर आना, नाइट सेल का ढाल सही नहीं होने की वजह से फर्श पर पानी का रुकना, भालू के दोनों बाड़ों में मोटर से पानी न निकल पाने की समस्या यथावत है, स्लॉथ बियर के पैडॉक में मिट्टी बार बार कट कर बह रही है, स्पॉडेट डियर के बाड़े में पैडॉक में जलभराव की समस्या है व दीवारों पर सीलन और टाइल्स का काम अधूरा, हॉग डीयर के बाड़े में नाइट शेल के फर्श का ढाल सही नहीं है ऐसे ही कई वन्य जीवों के नाइट शेल के फर्श के ढाल खराब हैं, लेपर्ड के बाड़े की छत पर बिल्डिंग मैटेरियल का सामान बिखरा पड़ा है इसकी सफाई बहुत जरूरी है।

कछुए के बाडे़ में जमीन धंस गई है, बालू डालने की जरूरत है, विजिटर पाथवे पर कई स्थलों पर वर्षाकाल में जलभराव, ट्वाय ट्रेन के लिए बनाए गए पथ पर कई जगह आरसीसी रोड क्षतिग्रस्त है, यूजी टैंक का कार्य बाकी है, लैंड स्केपिंग एरिया पर बने पॉंड के पानी के बदलने या निकालने की कोई व्यवस्था नहीं है समेत अन्य बहुत से शेष कामों व कमियों की सूची प्रबंधन की तरफ से राजकीय निर्माण निगम को दी जा चुकी है।
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