गोरखपुर: हाईटेक होंगे प्रशासन-पुलिस के दफ्तर, शहीदों को मिलेगा सम्मान, पार्कों की सूरत बदलेगी
- 61 करोड़ से डीएम-एसएसपी भवन को मिलाकर एक इमारत बनेगी
- अपनी फरियाद पर होने वाली कार्रवाई की स्थिति घर बैठे ही जांच सकेंगे फरियादी
- डीएम, एडीएम, एसडीएम समेत 14 कोर्ट, अलग-अलग चैंबर
- प्रेक्षागृह के पास ही 200 लोगों की क्षमता वाला ओपन थिएटर भी बनेगा
- नार्मल ग्राउंड की खाली पड़ी जमीन पार्क में मिलाई जाएगी
विस्तार
प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली के साथ ही अब उनके दफ्तर भी हाईटेक होंगे। डीएम से लेकर नायब तहसीलदार तक के कोर्ट एक ही छत के नीचे होंगे तो फरियादी घर बैठे ही अपनी फरियाद पर होने वाली कार्रवाई की स्थिति जांच सकेंगे। इसके लिए उन्हें आला अफसरों के दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। मुख्यमंत्री की पहल पर शहीदों की याद में पार्क बनेगा तो वहीं दो दशक से अधिक समय से लटके प्रेक्षागृह में स्थानीय रंगकर्मियों का हुनर दिखाई पड़ेगा। प्रख्यात साहित्यकार मुंशी प्रेम चन्द के नाम से जाने, जाने वाले पार्क का भी कायाकल्प होगा।
वित्त विभाग पहुंचा कलेक्ट्रेट के इंटीग्रेटेड भवन का प्रस्ताव
कलेक्ट्रेट के नए इंटीग्रेटेड भवन का प्रस्ताव राजस्व विभाग की मंजूरी के बाद वित्त विभाग पहुंच गया है। वहीं एसएसपी दफ्तर के भवन के प्रस्ताव को भी जल्द ही गृह विभाग की मंजूरी मिल जाएगी। इसके बाद यह प्रस्ताव भी वित्त विभाग पहुंचेगा।
वहां के बाद कलेक्ट्रेट और पुलिस, दोनों की नई इमारत के प्रस्ताव को कैबिनेट से मंजूरी मिलेगी, फिर निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। पुलिस की इमारत के लिए भी डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने प्रमुख सचिव गृह अवनीश अवस्थी से पैरवी की है। बकौल डीएम, उन्होंने आश्वस्त भी किया है कि पुलिस की नई इमारत के प्रस्ताव को जल्द ही गृह विभाग की मंजूरी दे दी जाएगी।
दरअसल, कलेक्ट्रेट की मुख्य इमारत में ही डीएम, एडीएम समेत एसएसपी और एसपी आदि पुलिस अफसरों के भी कार्यालय है। 1902 में बनी कलेक्ट्रेट की इस इमारत की उम्र पूरी होने के साथ ही लोनिवि इसे बहुत पहले ही निष्प्रयोज्य भी घोषित कर चुका है। पिछले पांच वर्षों यानी सपा शासन से ही नई इमारत के लिए प्रयास किया जा रहा है मगर इसे गति मिली प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के आने के बाद।
इंटीग्रेटेड भवन की होगी ये खासियत
ये होगी खासियत
प्रशासन और पुलिस की एक इमारत
डीएम, एडीएम, एसडीएम समेत 14 कोर्ट, अलग-अलग चैंबर
100 से अधिक लोगों की क्षमता वाले दो अलग-अलग सभागार
दो और चार पहिया समेत तीन सौ से अधिक गाड़ियां की क्षमता वाली पार्किंग
शिशु वाली महिला कर्मचारियों-फरियादियों के लिए स्तनपान कक्ष
दृष्टिबाधित फरियादियों के लिए संबंधित अफसरों के कक्ष तक पहुंचने के लिए विशेष मार्ग
प्रार्थनापत्रों, कोर्ट के वादों को ऑनलाइन अपलोड किया जाएगा (घर बैठे जान सकेंगे स्थिति)
इमारत का हर कोना सीसीटीवी की जद में होगा, मेटल डिटेक्टर लगेंगे
शहीद पार्क के साथ ही एक और मुक्ताकाशी मंच बनेगा
डीएम का कहना है कि शहीद पार्क और मुक्ताकाशी मंच के लिए आर्किटेक्ट को डिजाइन तैयार करने की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। वहीं प्रेक्षागृह निर्माण के रास्ते के रोड़े खत्म की कवायद चल रही है।
मुख्यमंत्री की मंशा है कि प्रेक्षागृह के साथ ही पास में स्थित सीलिंग की जमीन पर शहीद पार्क व एक और मुक्ताकाशी मंच भी बने। वर्तमान में तारामंडल क्षेत्र में भी एक मुक्ताकाशी मंच है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर ही जिला प्रशासन ने इन तीनों परियोजनाओं को लेकर तैयारी शुरू कर दी है।
प्रेम चंद पार्क का दायरा बढ़ेगा, तोड़ी जाएगी पीछे की दीवार
गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) द्वारा संचालित मुंशी प्रेम चंद पार्क का दायरा अब और बढ़ाया जाएगा। पार्क के पीछे की दीवार तोड़कर नार्मल ग्राउंड की खाली पड़ी जमीन तक उसकी सीमा बढ़ाई जाएगी। ग्राउंड में निर्मित सभी छात्रावास और सरकारी दफ्तरों को चहारदीवार से घेरकर बाकी की खाली पड़ी जमीन को पार्क में मिला दिया जाएगा।
डीएम का कहना है कि शहर के प्रमुख पार्कों में प्रेमचंद एक है। मुंशी प्रेमचंद की याद में बने इस पार्क को और भव्य रुप देने का निर्णय किया गया है। यही वजह है नार्मल ग्राउंड में पांच एकड़ से अधिक खाली पड़ी जमीन में से ज्यादातर हिस्सों को पार्क में जोड़ दिया जाएगा। इसके लिए पार्क के पीछे की दीवार तोड़ी जाएगी। जॉगर्स ट्रैक लंबा किया जाएगा और चाइल्ड फन जोन का भी दायरा बढ़ाया जाएगा। इसके साथ ही पार्क में कई अन्य सुविधाओं को लेकर भी योजना बनाई जा रही है।
डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने कहा कि कलेक्ट्रेट की नई इंटीग्रेटेड इमारत के लिए प्रयास तेज कर दिया गया है। एक ही इमारत में कलेक्ट्रेट और पुलिस दोनों विभागों के अफसरों के दफ्तर-कोर्ट रहेंगे। कलेक्ट्रेट के हिस्से का प्रस्ताव तो राजस्व परिषद से पास होकर वित्त विभाग तक पहुंच गया है पुलिस के लिए गृह विभाग में सिफारिश की जा रही है। इसी तरह पुलिस लाइंस के सामने शहीद पार्क के अलावा एक और मुक्ताकाशी मंच बनेगा। इसके लिए डिजाइन तैयार की जा रही है। वर्षों से अधूरे प्रेक्षागृह का भी निर्माण जल्द पूरा होगा।