Exclusive: गोरखपुर कभी अपराध के लिए था बदनाम, अब सजायाफ्ता कैदी भी पढ़ रहे गीता
जेल अधीक्षक दिलीप कुमार पांडेय ने कहा कि जेल में बंद बड़ी संख्या में कैदी व बंदियों ने श्रीमद्भावत गीता पढ़ने की इच्छा जाहिर की थी। उन्हें उपलब्ध करा दी गई है। इससे उनके व्यवहार में काफी बदलाव भी नजर आ रहा है। इसकी वजह से ही कई सजायाफ्ता बंदी जेल में ही काम भी कर रहे हैं और अपने घर पर पैसे भी भेज रहे हैं।
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विकास और आम गोरक्षनगरी वासियों के आचार-व्यवहार के तौर पर ही नहीं, अपराधियों के लिए जाना जाने वाला गोरखपुर भी अब तेजी से बदल रहा है। सूबे में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद बदमाशों की पुलिस ने ऐसी कमर तोड़ी कि अब उन्हें भी श्रीमद्भागवत गीता भाने लगी है। गीता के उपदेश याद आने लगे हैं। आचरण में सुधार के लिए जेल में सजायाफ्ता 450 कैदी श्रीमद्भागवत गीता पढ़ रहे हैं, जबकि अन्य बंदियों ने भी जेल प्रशासन से धार्मिक पुस्तकों की डिमांड की है।
बताया जा रहा है कि कई कैदियों ने अपने आचरण में सुधार का संकल्प लिया है। यहां तक कहने लगे कि अगर इस बार वह जेल से बाहर गए तो अपराध छोड़ देंगे। उन्होंने गीता के उपदेशों से प्रभावित होकर यह संकल्प लिया है। कई कैदी गीता के उपदेशों की मदद से अपने अवसाद को दूर कर रहे हैं। इसका प्रभाव यह है कि उनमें सकारात्मक सोच विकसित हो रही है। इससे कइयों की मेडिटेशन और दवाइयों पर निर्भरता भी कम हो गई है।
जानकारी के मुताबिक, गोरखपुर मंडलीय कारागार में कुल 1967 बंदी हैं, जिसमें से करीब 450 सजायाफ्ता हैं। कई तो ऐसे भी हैं, जिनसे मिलने अपना कोई नहीं आता। ऐसे में वे श्रीमद्भागवत गीता पढ़कर मानसिक तनाव कम करते हैं। करीब 30-40 प्रतिशत बंदियों को पुस्तक उपलब्ध कराई गई है।
जेल अधीक्षक दिलीप कुमार पांडेय ने कहा कि जेल में बंद बड़ी संख्या में कैदी व बंदियों ने श्रीमद्भावत गीता पढ़ने की इच्छा जाहिर की थी। उन्हें उपलब्ध करा दी गई है। इससे उनके व्यवहार में काफी बदलाव भी नजर आ रहा है। इसकी वजह से ही कई सजायाफ्ता बंदी जेल में ही काम भी कर रहे हैं और अपने घर पर पैसे भी भेज रहे हैं। इसके अलावा अभी हाल ही में जेल की लाइब्रेरी में कई अच्छे लेखकों की पुस्तकें भी मंगा दी गई हैं।
फैक्ट फाइल
- कुल बंदियों की संख्या - 1967
- अंडर ट्रॉयल कैदी - 1597
- सजायाफ्ता पुरुष बंदी - 370
- महिला बंदियों की संख्या - 110
- सजायाफ्ता महिला बंदी - 27
- अंडर ट्रायल महिला कैदी - 83
- बैरक की संख्या - 29