अभी दुरूह बनी रहेगी गोरखपुर-वाराणसी की सड़क यात्रा, रोजाना एक लाख से ज्यादा लोगों का होता है आवागमन
- अब दिसंबर 2021 तक बन पाएगी सड़क, पहले मार्च 2019 तक पूरी होनी थी
- एनएचएआई ने मार्च 2021 तक सड़क की एक लेन चालू करने की बात कही
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गोरखपुर-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर यात्रा अभी दुरूह बनी रहेगी। यह सड़क (एनएच 29) अब दिसंबर 2021 तक बनकर तैयार हो पाएगी। परियोजना अपने निर्धारित समय से दो साल से ज्यादा विलंबित हो चुकी है। इसे मार्च 2019 तक बनकर तैयार होना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अभी 43 फीसदी ही काम हो सका है। सड़क गोरखपुर से आजमगढ़, मऊ, गाजीपुर, बलिया, जौनपुर और वाराणसी सहित तमाम जिलों को आपस में जोड़ती है। इस पर रोजाना एक लाख से ज्यादा लोगों का आवागमन होता है।
नौसड़ से बड़हलगंज के बीच की 60 किलोमीटर की दूरी तय करना कठिन चुनौती से कम नहीं है। बारिश की वजह से सड़क लगभग गड्ढे में तब्दील हो चुकी है। इन गड्ढों में ट्रक, बस तक फंस जाती है। दोपहिया, छोटी चौपहिया वाहनों से चलना जान जोखिम में डालने जैसा है।
यह स्थिति तब है, जब सड़क निर्माण व प्रगति की समीक्षा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार कर रहे हैं। पीएमओ से मॉनीटरिंग की जा रही है। सड़क निर्माण की जिम्मेदारी जेपी समूह को मिली है। तीन वर्ष बीत गए, फिर भी काम रफ्तार नहीं पकड़ पाया है।
नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के अफसर का दावा है कि मार्च 2021 तक सड़क की एक लेन बन जाएगी, फिर राहगीरों की दिक्कतें कम हो जाएंगी। हालांकि काम की जो गति है, उसे देखकर नहीं लगता कि मार्च तक गोरखपुर से बड़हलगंज तक 60 किलोमीटर लंबी सड़क की एक लेन भी चालू हो पाएगी।
तीन वर्षों में 43 फीसदी ही काम
फोरलेन सड़क बनाने की स्वीकृति 2016 में मिली थी। 1870 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस सड़क का निर्माण वर्ष 2017 से शुरू हुआ। मार्च 2019 में काम पूरा हो जाना था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसका 57 फीसदी काम होना अब भी बाकी है। अब दिसंबर 2021 निर्माण की अंतिम तारीख बताई जा रही है। यह कैसे संभव हो पाएगा, इसपर अफसर, ठेकेदार कुछ खुलकर नहीं बोल रहे हैं।
धार्मिक, सांस्कृतिक लिहाज से भी सड़क महत्वपूर्ण
धार्मिक, सांस्कृतिक, पर्यटन और सामरिक दृष्टि से गोरखपुर-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग बहुत महत्वपूर्ण है। यह सड़क बाबा विश्वनाथ और गुरु गोरखनाथ की नगरियों को आपस में जोड़ती है। नेपाल जाने वाले तमाम सैलानी इसी मार्ग से आते-जाते हैं। सोनौली से नेपाल आना-जाना होता है। खाद्य सामग्री, ईंधन भी इसी रास्ते भेजा जाता है।
एनएचएआई परियोजना प्रबंधक श्रीप्रकाश पाठक ने बताया कि गोरखपुर-वाराणसी फोरलेन का काम मार्च 2019 में पूरा होना था लेकिन फर्म सही ढंग से काम नहीं कर सकी। मार्च 2021 तक एक लेन का निर्माण पूरा करने का लक्ष्य है। दिसंबर 2021 तक सड़क का निर्माण कार्य पूरा करा लिया जाएगा।
बीमार बना देगी सड़क
जिला पंचायत सदस्य पंकज शाही ने बताया कि इस सड़क पर इतने गड्ढे हैं कि स्वस्थ आदमी भी बीमार हो जाएगा। किसी को जनता की समस्याओं से कुछ लेना देना नहीं है। 60 किलोमीटर लंबी सड़क के आसपास लाखों की आबादी रहती है। सबका गोरखपुर आना-जाना होता है। समस्या से कब निजात मिलेगी, कोई बताने वाला नहीं है।
देवरिया जाकर आते हैं गोरखपुर
कारोबारी मनोज पाठक ने बताया कि हाटाबाजार में कारोबार है। गोरखपुर आना मजबूरी है। एनएच 29 की यात्रा कठिन है। लिहाजा, देवरिया केरुद्रपुर जाते हैं, फिर अंदर के रास्तों से गोरखपुर पहुंचते हैं। दूरी ज्यादा पड़ती है, लेकिन सुरक्षित है। सड़क बनवाने वाली फर्म के खिलाफ सख्ती जरूरी है।
जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जरूरत
कारोबारी मनोज जायसवाल ने बताया कि ठेकेदार जब काम नहीं करा रहा है तो जनप्रतिनिधियों को आवाज उठनी चाहिए। किसी जनप्रतिनिधि ने आवाज नहीं उठाई। अफसर भी सन्नाटा मारे हैं। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री आकर सड़क का निर्माण कराएंगे तो चल चुकी शासन-सत्ता। सड़क की बदहाली के जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। तभी निर्माण पूरा होगा।