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Gorakhpur News: कैंट स्टेशन से चली गोरखपुर-वाराणसी इंटरसिटी, रात में 10 बजे पहुंची बनारस
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- यात्रियों ने इसे सराहा, स्टेशन पर कुछ और सुविधाएं बढ़ाने की मांग की
- गोरखपुर स्टेशन पर एफओबी की मरम्मत के चलते 30 मई तक कैंट से चलेगी यह ट्रेन
फोटो
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। वाराणसी इंटरसिटी (15103) रविवार को गोरखपुर के बजाय गोरखपुर कैंट स्टेशन से रवाना हुई। सुबह भी इसकी यात्रा कैंट स्टेशन पर ही समाप्त हुई। पहले दिन यात्रियों को ट्रेन से उतरकर कैंट क्राॅसिंग पार करना अटपटा जरूर लगा, लेकिन अधिकांश का मानना था कि यह सुविधा नियमित होने से आराम मिलेगा। फिलहाल यह ट्रेन 30 मई तक कैंट स्टेशन से ही चलेगी। कैंट स्टेशन से शाम 4.32 बजे रवाना हुई यह ट्रेन रात में 10 बजे बनारस स्टेशन पर पहुंची। वहां से सुबह 5.25 बजे चलकर 11 बजे कैंट स्टेशन पहुंचेगी।
गोरखपुर स्टेशन के पूर्वी फुटब्रिज का पिलर बदला जाना है। इसके लिए रविवार को मरम्मत कार्य आरंभ हो गया। इस स्टेशन से ट्रेनों की भीड़ कम करने के लिए गोरखपुर-वाराणसी इंटरसिटी को 19 से 30 मई तक कैंट से चलाने का निर्णय लिया गया है। दो दिन पहले ही रेल प्रशासन ने इसकी सूचना जारी कर दी थी। रविवार को सुबह 11 बजे बनारस से आई ट्रेन ने कैंट स्टेशन पर यात्रा समाप्त की। इसके बाद शाम साढ़े चार बजे ट्रेन को यहीं से बनारस भेजा गया। ट्रेन में सवार रामशरण, वृजमोहन, राजेश, धीरेंद्र मोहन आदि का कहना था कि वाराणसी इंटरसिटी को कैंट स्टेशन से चलाने का निर्णय ठीक है। इससे गोरखपुर स्टेशन की भीड़भाड़ से बचा जा सकता है।
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सुविधाएं भी बढ़ानी होगी
मैं अक्सर इस ट्रेन से गोरखपुर आता-जाता हूं। आज भी इसी से आया। पहली बार कैंट स्टेशन से उतरकर शहर में जाने के लिए दिक्कत हुई। क्राॅसिंग पार करने के लिए 35 मिनट तक इंतजार करना पड़ा। इसके बाद ऑटो तय करके गया, लेकिन वापस आने पर दिक्कत नहीं हुई। बस स्टेशन के पास टैंपो में बैठा और एम्स गेट उतरकर वहां से पैदल ही आ गया। स्टेशन पर कुछ सुविधाएं बढ़ जाएं तो यहां से यात्रा करना अधिक आसान है।
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संजय गुप्ता-वाराणसी
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यहां से आसान है ट्रेन पकड़ना
मैं खलीलाबाद से आया हूं और बनारस जाना है। पहले भी कई बार गोरखपुर स्टेशन से जा चुका हूं। यहां से ट्रेन चलने के बाद एहसास हो रहा है कि यह बेहतर विकल्प है। गोरखपुर स्टेशन पर जितनी भीड़ है, उसके मुकाबले यहां आराम से बैठकर ट्रेन का इंतजार किया जा सकता है। वापसी यात्रा में भी यहीं से उतरकर नौसढ़ के लिए टैंपो मिल जाएगी। वहां से खलीलाबाद जाना एकदम आसान है।
रॉबिन पांडेय-खलीलाबाद
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- गोरखपुर स्टेशन पर एफओबी की मरम्मत के चलते 30 मई तक कैंट से चलेगी यह ट्रेन
फोटो
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। वाराणसी इंटरसिटी (15103) रविवार को गोरखपुर के बजाय गोरखपुर कैंट स्टेशन से रवाना हुई। सुबह भी इसकी यात्रा कैंट स्टेशन पर ही समाप्त हुई। पहले दिन यात्रियों को ट्रेन से उतरकर कैंट क्राॅसिंग पार करना अटपटा जरूर लगा, लेकिन अधिकांश का मानना था कि यह सुविधा नियमित होने से आराम मिलेगा। फिलहाल यह ट्रेन 30 मई तक कैंट स्टेशन से ही चलेगी। कैंट स्टेशन से शाम 4.32 बजे रवाना हुई यह ट्रेन रात में 10 बजे बनारस स्टेशन पर पहुंची। वहां से सुबह 5.25 बजे चलकर 11 बजे कैंट स्टेशन पहुंचेगी।
गोरखपुर स्टेशन के पूर्वी फुटब्रिज का पिलर बदला जाना है। इसके लिए रविवार को मरम्मत कार्य आरंभ हो गया। इस स्टेशन से ट्रेनों की भीड़ कम करने के लिए गोरखपुर-वाराणसी इंटरसिटी को 19 से 30 मई तक कैंट से चलाने का निर्णय लिया गया है। दो दिन पहले ही रेल प्रशासन ने इसकी सूचना जारी कर दी थी। रविवार को सुबह 11 बजे बनारस से आई ट्रेन ने कैंट स्टेशन पर यात्रा समाप्त की। इसके बाद शाम साढ़े चार बजे ट्रेन को यहीं से बनारस भेजा गया। ट्रेन में सवार रामशरण, वृजमोहन, राजेश, धीरेंद्र मोहन आदि का कहना था कि वाराणसी इंटरसिटी को कैंट स्टेशन से चलाने का निर्णय ठीक है। इससे गोरखपुर स्टेशन की भीड़भाड़ से बचा जा सकता है।
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सुविधाएं भी बढ़ानी होगी
मैं अक्सर इस ट्रेन से गोरखपुर आता-जाता हूं। आज भी इसी से आया। पहली बार कैंट स्टेशन से उतरकर शहर में जाने के लिए दिक्कत हुई। क्राॅसिंग पार करने के लिए 35 मिनट तक इंतजार करना पड़ा। इसके बाद ऑटो तय करके गया, लेकिन वापस आने पर दिक्कत नहीं हुई। बस स्टेशन के पास टैंपो में बैठा और एम्स गेट उतरकर वहां से पैदल ही आ गया। स्टेशन पर कुछ सुविधाएं बढ़ जाएं तो यहां से यात्रा करना अधिक आसान है।
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संजय गुप्ता-वाराणसी
यहां से आसान है ट्रेन पकड़ना
मैं खलीलाबाद से आया हूं और बनारस जाना है। पहले भी कई बार गोरखपुर स्टेशन से जा चुका हूं। यहां से ट्रेन चलने के बाद एहसास हो रहा है कि यह बेहतर विकल्प है। गोरखपुर स्टेशन पर जितनी भीड़ है, उसके मुकाबले यहां आराम से बैठकर ट्रेन का इंतजार किया जा सकता है। वापसी यात्रा में भी यहीं से उतरकर नौसढ़ के लिए टैंपो मिल जाएगी। वहां से खलीलाबाद जाना एकदम आसान है।
रॉबिन पांडेय-खलीलाबाद