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गोरखपुर विश्वविद्यालय: अधिवक्ता की मदद से तेज होगी रंगीन मिजाज प्रोफेसर की जांच, आंतरिक कमेटी लेगी विधिक सलाह

Mon, 07 Aug 2023 01:30 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 07 Aug 2023 01:30 PM IST
सार

गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने भी कुछ दिन पहले विश्वविद्यालय की आंतरिक कमेटी के साथ बैठक कर जांच की प्रगति पर चर्चा की। करीब एक घंटे तक हुई बैठक के दौरान कुलपति ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कमेटी को हर पहलु पर जांच करने का निर्देश दिया।

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Gorakhpur University With help of lawyer investigation of temperamental professor will speed up
DDU Gorakhpur - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गोरखपुर विश्वविद्यालय के रंगीन मिजाज प्रोफेसर की जांच कर रही विश्वविद्यालय की आंतरिक कमेटी की कानूनी मदद के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्लू) ने एक अधिवक्ता की तैनाती की है। डालसा (डिस्टिक लीगल सर्विसेज अथाॅरिटी) से जुड़े अधिवक्ता से कमेटी विधिक सलाह ले सकेगी। आंतरिक कमेटी अधिवक्ता से संपर्क कर अबतक हुई जांच पर चर्चा भी कर चुकी है।

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गोरखपुर विश्वविद्यालय के रंगीन-मिजाज प्रोफेसर का अश्लील वीडियो व ऑडियो समेत अन्य साक्ष्य भेजकर राष्ट्रीय महिला आयोग में शिकायत की गई है। शिकायत पर राष्ट्रीय महिला आयोग ने विश्वविद्यालय की आंतरिक कमेटी को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है।
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इसी बीच 25 जुलाई को राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य डेलिना खोंगडुप ने प्रोजेक्ट क्वार्डिनेटर सर्वेश पांडेय के साथ गोरखपुर पहुंचकर गोरखपुर विश्वविद्यालय के कमेटी हॉल में आंतरिक कमेटी के साथ बैठक की। बैठक के दौरान आयोग ने आंतरिक कमेटी को 30 दिन में प्रारंभिक जांच व 90 दिन में विस्तृत रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।
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कुलपति ने भी कमेटी से की जांच पर चर्चा

गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने भी कुछ दिन पहले विश्वविद्यालय की आंतरिक कमेटी के साथ बैठक कर जांच की प्रगति पर चर्चा की। करीब एक घंटे तक हुई बैठक के दौरान कुलपति ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कमेटी को हर पहलु पर जांच करने का निर्देश दिया।

मोबाइल मैकेनिक के नाम से शोध छात्रा ने की थी शिकायत
राष्ट्रीय महिला आयोग में प्रोफेसर की करतूत की शिकायत मोबाइल मैकेनिक बन कर की गई है। साथ ही वीडियो-ऑडियो समेत अन्य साक्ष्य उपलब्ध कराया गया है। विश्वविद्यालय की आंतरिक कमेटी की जांच में सामने आया कि शिकायत करने वाला कोई मोबाइल मैकेनिक नहीं बल्कि एक शोध छात्रा है, जो प्रोफेसर के निर्देशन में शोध कर रही है।



 
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