{"_id":"60c08dee8ebc3e7b796f975c","slug":"gorakhpur-university-will-make-compost-by-collecting-garbage-from-hotel-restaurants-and-campus","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"गोरखपुर विश्वविद्यालय: परिसर के अलावा होटल-रेस्टोरेंट से जुटाएंगे कचरा, बनाएंगे खाद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गोरखपुर विश्वविद्यालय: परिसर के अलावा होटल-रेस्टोरेंट से जुटाएंगे कचरा, बनाएंगे खाद
Wed, 09 Jun 2021 03:16 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 09 Jun 2021 03:16 PM IST
सार
गोविवि में स्टोरेज, पैकेजिंग और मार्केटिंग की जिम्मेदारी संभालेंगे विद्यार्थी। कूड़ा प्रबंधन के लिए होने जा रही एक प्रबंधक की नियुक्ति।
विज्ञापन
DDU Gorakhpur
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर का कचरा अब बाहर नहीं जाएगा, साथ ही होटल-रेस्टोरेंट से भी कचरा एकत्र कर जैविक खाद तैयार किया जाएगा। विद्यार्थी कचरे से बनी जैविक खाद के स्टोरेज, पैकेजिंग और मार्केटिंग की जिम्मेदारी संभालेंगे।
शनिवार को इसे लेकर परिसर में नान प्राफिट कंपनी ‘जीरो वेस्ट कैंपस’ की शुरुआत हो गई। इसके तहत बायोडिग्रेडेबल वेस्ट से जैविक खाद बनाने की मशीन का उद्घाटन कुलपति ने किया। इसके तहत सभी विभागों में कचरा संग्रहण के लिए डिब्बा रखने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
दो दर्जन से अधिक विभागों में यह प्रक्रिया पूरी भी कर ली गई है। कूड़ा प्रबंधन में कोई दिक्कत न आने पाए, इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन जल्द प्रबंधक की नियुक्ति करने जा रहा है।
विज्ञापन
प्रबंधक अपने निर्देशन में विभागों से कूड़े-कचरे को संग्रहित कराएगा और उसमें से बायोडिग्रेडेबल वेस्ट को खाद बनाने वाली मशीन तक पहुंचाने का कार्य करेगा। इसके लिए उसे आउटसोर्सिंग के जरिए करीब 40 कर्मचारी दिए जाएंगे।
प्रबंधक को अर्न-बाय-लर्न योजना के तहत करीब 10 विद्यार्थियों का सहयोग भी मिलेगा। आईआईएम अहमदाबाद के एलुमिनाई डॉ. नरेश त्रिखा विश्वविद्यालय में आएंगे और इसे लेकर जरूरी सुझाव देंगे। इस योजना के लिए विश्वविद्यालय ने उन्हें सलाहकार नामित किया है।
विज्ञापन
शनिवार को इसे लेकर परिसर में नान प्राफिट कंपनी ‘जीरो वेस्ट कैंपस’ की शुरुआत हो गई। इसके तहत बायोडिग्रेडेबल वेस्ट से जैविक खाद बनाने की मशीन का उद्घाटन कुलपति ने किया। इसके तहत सभी विभागों में कचरा संग्रहण के लिए डिब्बा रखने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
विज्ञापन
दो दर्जन से अधिक विभागों में यह प्रक्रिया पूरी भी कर ली गई है। कूड़ा प्रबंधन में कोई दिक्कत न आने पाए, इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन जल्द प्रबंधक की नियुक्ति करने जा रहा है।
विज्ञापन
प्रबंधक अपने निर्देशन में विभागों से कूड़े-कचरे को संग्रहित कराएगा और उसमें से बायोडिग्रेडेबल वेस्ट को खाद बनाने वाली मशीन तक पहुंचाने का कार्य करेगा। इसके लिए उसे आउटसोर्सिंग के जरिए करीब 40 कर्मचारी दिए जाएंगे।
प्रबंधक को अर्न-बाय-लर्न योजना के तहत करीब 10 विद्यार्थियों का सहयोग भी मिलेगा। आईआईएम अहमदाबाद के एलुमिनाई डॉ. नरेश त्रिखा विश्वविद्यालय में आएंगे और इसे लेकर जरूरी सुझाव देंगे। इस योजना के लिए विश्वविद्यालय ने उन्हें सलाहकार नामित किया है।
15 अगस्त को सीएम से उद्घाटन की तैयारी
विश्वविद्यालय प्रशासन ने बायोडिग्रेडेबल वेस्ट के प्रबंधन के पूरे सेटअप का औपचारिक उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से 15 अगस्त को कराने की योजना बनाई है। इसीलिए तीन महीने में पूरा सेटअप तैयार कर लिया जाएगा।
होटल-रेस्टोरेंट पर रखे जाएंगे डिब्बे
कूड़ा जुटाने के लिए परिसर के बाहर की संस्थाओं, होटलों, रेस्टोरेंट आदि से संपर्क किया जाएगा। चिह्नित स्थानों पर इसके लिए कचरे का डिब्बा विश्वविद्यालय की ओर से लगाया जाएगा। डिग्रेडेबल वेस्ट का इस्तेमाल तो विश्वविद्यालय परिसर में ही कर देगा लेकिन नान डिग्रेडेबल वेस्ट के लिए वह नगर निगम की मदद लेगा।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने बताया कि ग्रीन कैंपस के तहत परिसर को पूरी तरह कूड़ा-कचरा मुक्त बनाने की है। तीन महीने में इस योजना का प्रभाव विश्वविद्यालय में दिखने लगेगा। प्रयास है कि विश्वविद्यालय का स्वच्छ और सुंदर स्वरूप अन्य शैक्षणिक संस्थानों के लिए नजीर बन सके।
होटल-रेस्टोरेंट पर रखे जाएंगे डिब्बे
कूड़ा जुटाने के लिए परिसर के बाहर की संस्थाओं, होटलों, रेस्टोरेंट आदि से संपर्क किया जाएगा। चिह्नित स्थानों पर इसके लिए कचरे का डिब्बा विश्वविद्यालय की ओर से लगाया जाएगा। डिग्रेडेबल वेस्ट का इस्तेमाल तो विश्वविद्यालय परिसर में ही कर देगा लेकिन नान डिग्रेडेबल वेस्ट के लिए वह नगर निगम की मदद लेगा।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने बताया कि ग्रीन कैंपस के तहत परिसर को पूरी तरह कूड़ा-कचरा मुक्त बनाने की है। तीन महीने में इस योजना का प्रभाव विश्वविद्यालय में दिखने लगेगा। प्रयास है कि विश्वविद्यालय का स्वच्छ और सुंदर स्वरूप अन्य शैक्षणिक संस्थानों के लिए नजीर बन सके।