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गोरखपुर विश्वविद्यालय में छात्रा की मौत मामला: घंटेभर की तकरार के छात्रा का हुआ अंतिम संस्कार, छावनी में बदला डीडीयू
Mon, 02 Aug 2021 07:16 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 02 Aug 2021 07:16 PM IST
सार
प्रियंका शनिवार को विश्वविद्यालय में सुबह नौ बजे से परीक्षा देने गई थी। उसी दिन पूर्वाह्न करीब साढ़े 11 बजे प्रियंका शव विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान विभाग के स्टोर के पास फंदे से लटका मिला था
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मृतक छात्रा। (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की बीएससी तृतीय वर्ष की छात्रा प्रियंका का अंतिम संस्कार सोमवार सुबह राजघाट पर काफी तकरार के बाद हुआ। प्रियंका के अंतिम संस्कार के बाद जिला प्रशासन ने राहत की सांस ली।
बता दें कि प्रियंका शनिवार को विश्वविद्यालय में सुबह नौ बजे से परीक्षा देने गई थी। उसी दिन पूर्वाह्न करीब साढ़े 11 बजे प्रियंका शव विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान विभाग के स्टोर के पास फंदे से लटका मिला था, लेकिन स्वजन ने मौत को कई सवाल खड़े किए थे। इसे लेकर रविवार शाम कैंट थाने में प्रियंका के हत्या के आरोप में गृह विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष व उनके सहयोगियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करना पड़ा।
बता दें कि परिजनों का कहना था कि जब तक उनके पांच सवालों का जवाब और पांचों मांगे पूरी नहीं होती, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। परिजनों के सवाल थे कि जिस दुपट्टे से शव लटका हुआ था, वह प्रियंका का नहीं है। इससे तय है कि मौत से पहले प्रियंका के आसपास कोई मौजूद था। वहीं, अगर प्रियंका ने आत्महत्या की है तो उसके कपड़ों पर मिट्टी कैसे लगी।
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इसके अलावा मौत के बाद उसकी घड़ी गायब हो गई। ट्यूबलाइट की जिस राड में फंदा लगाने की बात कही जा रही है, वह ऐसा नहीं है जिसे फांसी लगाने के लिए चुना जा सके। फांसी से पहले प्रियंका को दूर जाकर चप्पल उतारने की क्या जरूरत पड़ी? उसके सिर में चोट कैसे लगी? धरने पर बैठे परिवार वालों के इस ताबड़तोड़ सवालों ने पुलिस को असहज में डाल दिया।
वहीं, दूसरी ओर परिवार वाले अपनी पांच मांगों पर अड़े रहें। उनकी मांग थी कि छात्रा के शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराया जाए। साथ ही उनका कहना था कि वह पढ़ने में काफी होनहार थी। ऐसे में उसकी मौत से परिवार को काफी छति हुई है। उन्होंने मुआवजे के तौर पर एक करोड़ रुपए की मांग की। इसके अलावा परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, पांच सदस्यीय पैनल से मामले की मजिस्ट्रियल जांच और परिवार की सुरक्षा की मांग पर अड़े रहे। उनका कहना था कि जब तक हमारी मांगे नहीं पूरी होंगी, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।
एसएसपी दिनेश कुमार प्रभु ने बताया कि परिवार की जो भी मांगे थी, उन्हें पूरी करने का आश्वासन दिया गया है। जल्द ही उनकी सभी मांगे पूरी भी कर दी जाएगी। सुबह अंतिम संस्कार करा दिया गया। परिवार की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है। यूनिवर्सिटी पर सुरक्षा के लिहाज से फोर्स तैनात की गई है।
गृह विज्ञान विभाग में नहीं लगे हैं कैमरे, मोबाइल नंबर की जांच शुरू
गोरखपुर यूनिवर्सिटी के गृह विज्ञान विभाग में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं। पुलिस मामले की जांच को पहुंची तो सिर्फ दीक्षा भवन में ही कैमरा मिला। पुलिस ने छात्रा के घर के मोबाइल नंबर की भी जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि मोबाइल नंबर जांच व अन्य साक्ष्यों से जल्द ही घटना का सच सामने आ जाएगा।
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बता दें कि प्रियंका शनिवार को विश्वविद्यालय में सुबह नौ बजे से परीक्षा देने गई थी। उसी दिन पूर्वाह्न करीब साढ़े 11 बजे प्रियंका शव विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान विभाग के स्टोर के पास फंदे से लटका मिला था, लेकिन स्वजन ने मौत को कई सवाल खड़े किए थे। इसे लेकर रविवार शाम कैंट थाने में प्रियंका के हत्या के आरोप में गृह विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष व उनके सहयोगियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करना पड़ा।
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बता दें कि परिजनों का कहना था कि जब तक उनके पांच सवालों का जवाब और पांचों मांगे पूरी नहीं होती, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। परिजनों के सवाल थे कि जिस दुपट्टे से शव लटका हुआ था, वह प्रियंका का नहीं है। इससे तय है कि मौत से पहले प्रियंका के आसपास कोई मौजूद था। वहीं, अगर प्रियंका ने आत्महत्या की है तो उसके कपड़ों पर मिट्टी कैसे लगी।
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इसके अलावा मौत के बाद उसकी घड़ी गायब हो गई। ट्यूबलाइट की जिस राड में फंदा लगाने की बात कही जा रही है, वह ऐसा नहीं है जिसे फांसी लगाने के लिए चुना जा सके। फांसी से पहले प्रियंका को दूर जाकर चप्पल उतारने की क्या जरूरत पड़ी? उसके सिर में चोट कैसे लगी? धरने पर बैठे परिवार वालों के इस ताबड़तोड़ सवालों ने पुलिस को असहज में डाल दिया।
वहीं, दूसरी ओर परिवार वाले अपनी पांच मांगों पर अड़े रहें। उनकी मांग थी कि छात्रा के शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराया जाए। साथ ही उनका कहना था कि वह पढ़ने में काफी होनहार थी। ऐसे में उसकी मौत से परिवार को काफी छति हुई है। उन्होंने मुआवजे के तौर पर एक करोड़ रुपए की मांग की। इसके अलावा परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, पांच सदस्यीय पैनल से मामले की मजिस्ट्रियल जांच और परिवार की सुरक्षा की मांग पर अड़े रहे। उनका कहना था कि जब तक हमारी मांगे नहीं पूरी होंगी, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।
एसएसपी दिनेश कुमार प्रभु ने बताया कि परिवार की जो भी मांगे थी, उन्हें पूरी करने का आश्वासन दिया गया है। जल्द ही उनकी सभी मांगे पूरी भी कर दी जाएगी। सुबह अंतिम संस्कार करा दिया गया। परिवार की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है। यूनिवर्सिटी पर सुरक्षा के लिहाज से फोर्स तैनात की गई है।
गृह विज्ञान विभाग में नहीं लगे हैं कैमरे, मोबाइल नंबर की जांच शुरू
गोरखपुर यूनिवर्सिटी के गृह विज्ञान विभाग में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं। पुलिस मामले की जांच को पहुंची तो सिर्फ दीक्षा भवन में ही कैमरा मिला। पुलिस ने छात्रा के घर के मोबाइल नंबर की भी जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि मोबाइल नंबर जांच व अन्य साक्ष्यों से जल्द ही घटना का सच सामने आ जाएगा।
छात्रा की मौत के मामले में जांच कराने के लिए किया प्रदर्शन
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में परीक्षा के बाद छात्रा प्रियंका कुमारी की मौत के मामले की सीबीसीआईडी या स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग पर छात्रों के दो गुटों ने सोमवार को मुख्य द्वार पर प्रदर्शन किया। पहले से मौजूद पुलिस ने नारेबाजी कर रहे छात्रों को समझा-बुझाकर रोक दिया। इसके बाद मुख्य नियंता प्रो सतीश चंद्र पांडेय ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन छात्रनेताओं से लिया और प्रशासन तक उनकी मांगों को पहुंचाने का आश्वासन दिया।
विश्वविद्यालय की परीक्षाओं के संबंध में पुलिस व प्रशासन पहले से ही सतर्क था। मुख्य द्वार पर पुलिस बल की तैनाती सुबह से ही की गई थी। वहीं नियंता मंडल ने भी प्रवेश को लेकर सख्ती बरती। बगैर प्रवेश पत्र किसी को जाने नहीं दिया गया। शिक्षकों से भी सहयोग करने का अनुरोध किया गया। सुबह करीब 11 बजे छात्र नेता मनीष ओझा के नेतृत्व में छात्रों का एक गुट पहुंचा और विवि मुख्य द्वार पर प्रदर्शन करने लगे।
कुछ ही देर में अमन यादव व उनके सहयोगी भी आ गए और छात्रा की मौत की निष्पक्ष जांच कराने की मांग करने लगे। एडीएम सिटी ने उन्हें समझा बुझाकर शांत कराया। इस दौरान पुलिस भी चौकस रही। मनीष ओझा ने कहा कि सप्ताह भर में मांगों पर विचार नहीं किया गया तो उग्र आंदोलन करेंगे।
इस अवसर पर अरुण यादव, गौरव वर्मा, नारायण दत्त पाठक, प्रतीक त्रिपाठी, कार्तिक यादव, हर्ष तिवारी, सतीश प्रजापति, उज्जवल सिंह, अभिषेक यादव, नागेंद्र यादव, पिंटू चौहान, आकाश यादव, सर्वेश त्रिपाठी, मोहित गुप्ता, तोष निधि त्रिपाठी, अर्जुन शर्मा, विशु शर्मा, अंकित सिंह, पिंटू चौहान, हर्ष मिश्रा, चंदन यादव आदि छात्र मौजूद रहे।
यह है मांगें...
एसएसपी दिनेश कुमार प्रभु ने कहा कि कुछ लोगों ने विश्वविद्यालय में परीक्षा को प्रभावित करने की कोशिश की जिन्हें रोक दिया गया। सारी परीक्षाएं सुचारू रूप से हुई है। विश्वविद्यालय की सुरक्षा बढ़ाई जाएगी।
विश्वविद्यालय की परीक्षाओं के संबंध में पुलिस व प्रशासन पहले से ही सतर्क था। मुख्य द्वार पर पुलिस बल की तैनाती सुबह से ही की गई थी। वहीं नियंता मंडल ने भी प्रवेश को लेकर सख्ती बरती। बगैर प्रवेश पत्र किसी को जाने नहीं दिया गया। शिक्षकों से भी सहयोग करने का अनुरोध किया गया। सुबह करीब 11 बजे छात्र नेता मनीष ओझा के नेतृत्व में छात्रों का एक गुट पहुंचा और विवि मुख्य द्वार पर प्रदर्शन करने लगे।
कुछ ही देर में अमन यादव व उनके सहयोगी भी आ गए और छात्रा की मौत की निष्पक्ष जांच कराने की मांग करने लगे। एडीएम सिटी ने उन्हें समझा बुझाकर शांत कराया। इस दौरान पुलिस भी चौकस रही। मनीष ओझा ने कहा कि सप्ताह भर में मांगों पर विचार नहीं किया गया तो उग्र आंदोलन करेंगे।
इस अवसर पर अरुण यादव, गौरव वर्मा, नारायण दत्त पाठक, प्रतीक त्रिपाठी, कार्तिक यादव, हर्ष तिवारी, सतीश प्रजापति, उज्जवल सिंह, अभिषेक यादव, नागेंद्र यादव, पिंटू चौहान, आकाश यादव, सर्वेश त्रिपाठी, मोहित गुप्ता, तोष निधि त्रिपाठी, अर्जुन शर्मा, विशु शर्मा, अंकित सिंह, पिंटू चौहान, हर्ष मिश्रा, चंदन यादव आदि छात्र मौजूद रहे।
यह है मांगें...
- घटना की सीबीसीआईडी या स्वतंत्र एजेंसी से जांच।
- घटना में लिप्त लोगों पर कार्रवाई हो।
- मृतक छात्रा के परिजनों को उचित मुआवजा मिले।
- परिवार के सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
एसएसपी दिनेश कुमार प्रभु ने कहा कि कुछ लोगों ने विश्वविद्यालय में परीक्षा को प्रभावित करने की कोशिश की जिन्हें रोक दिया गया। सारी परीक्षाएं सुचारू रूप से हुई है। विश्वविद्यालय की सुरक्षा बढ़ाई जाएगी।