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गोरखपुर विश्वविद्यालय : सेवा प्रदाता फर्म से करार खत्म, जांच कमेटी बनी
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गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय में सेवा प्रदाता फर्म जेजेजे इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड की सेवाओं को समाप्त कर दिया गया है। राजभवन के निर्देश के बाद सेवा प्रदाता फर्म के खिलाफ पड़ताल के लिए तीन सदस्यीय जांच कमेटी भी गठित कर दी गई है।
विश्वविद्यालय में सेवा प्रदाता फर्म जेजेजे इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ने पांच साल पहले टेंडर लिया। उसके बाद फिर कभी टेंडर ही नहीं हुआ। अधिकारियों की मेहरबानी पर बगैर टेंडर पांच साल से फर्म विश्वविद्यालय में करीब 250 आउटसोर्सिंग कर्मचारियों से काम करा रही है। आरटीआई कार्यकर्ता सत्यसेन सिंह ने विश्वविद्यालय में आउटसोर्सिंग पर तैनात कर्मचारियों के पीएफ अंशदान में गड़बड़झाले का आरोप लगाया था।
इसकी शिकायत राजभवन को की गई। आरोप लगाया गया कि सैकड़ों कर्मचारियों के भविष्य निधि अंशदान को कंपनी फर्म संचालकों ने हड़प लिया है। इसके अलावा उन्होंने फर्म के सेवा विस्तार पर भी सवाल उठाए थे। आरटीआई कार्यकर्ता के शिकायत पर राजभवन ने संज्ञान लिया है। इस मामले में राजभवन ने कुलपति को पत्र लिखकर जांच कराने का निर्देश दिया था।
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15 दिनों में देनी है जांच रिपोर्ट
तीन सदस्यीय जांच समिति की कमान वित्त अधिकारी को सौंपी गई है। इसके अलावा विधि विभाग के अधिष्ठाता प्रो. चंद्रशेखर व कुलसचिव या उनके द्वारा नामित अधिकारी को सदस्य बनाया गया है। कमेटी 15 दिनों में जांच कर कुलपति को रिपोर्ट सौंपेगी।
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विश्वविद्यालय में सेवा प्रदाता फर्म जेजेजे इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ने पांच साल पहले टेंडर लिया। उसके बाद फिर कभी टेंडर ही नहीं हुआ। अधिकारियों की मेहरबानी पर बगैर टेंडर पांच साल से फर्म विश्वविद्यालय में करीब 250 आउटसोर्सिंग कर्मचारियों से काम करा रही है। आरटीआई कार्यकर्ता सत्यसेन सिंह ने विश्वविद्यालय में आउटसोर्सिंग पर तैनात कर्मचारियों के पीएफ अंशदान में गड़बड़झाले का आरोप लगाया था।
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इसकी शिकायत राजभवन को की गई। आरोप लगाया गया कि सैकड़ों कर्मचारियों के भविष्य निधि अंशदान को कंपनी फर्म संचालकों ने हड़प लिया है। इसके अलावा उन्होंने फर्म के सेवा विस्तार पर भी सवाल उठाए थे। आरटीआई कार्यकर्ता के शिकायत पर राजभवन ने संज्ञान लिया है। इस मामले में राजभवन ने कुलपति को पत्र लिखकर जांच कराने का निर्देश दिया था।
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15 दिनों में देनी है जांच रिपोर्ट
तीन सदस्यीय जांच समिति की कमान वित्त अधिकारी को सौंपी गई है। इसके अलावा विधि विभाग के अधिष्ठाता प्रो. चंद्रशेखर व कुलसचिव या उनके द्वारा नामित अधिकारी को सदस्य बनाया गया है। कमेटी 15 दिनों में जांच कर कुलपति को रिपोर्ट सौंपेगी।