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गोरखपुर विश्वविद्यालय: सुपर-100 खिलाड़ियों के चयन में 'खेल' का खुलासा करेगी कमेटी, जांच शुरू

Sat, 07 Oct 2023 03:49 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 07 Oct 2023 03:49 PM IST
सार

गोविवि कुलसचिव प्रो. शांतनु रस्तोगी ने कहा कि सुपर-100 के तहत हुए चयन और खर्च की जांच के लिए समिति गठित की गई है। जांच चल रही है। आर्डिनेंस के हिसाब से वार्षिक मूल्यांकन होना चाहिए था। दो वर्षों से नहीं हुआ है। इस बार दोनों वर्ष का होगा।

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Gorakhpur University Committee will reveal game in selection of Super-100 players
DDU Gorakhpur - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गोरखपुर विश्वविद्यालय में गुरु गोरखनाथ स्पोर्ट्स फेलोशिप के तहत सुपर-100 खिलाड़ियों के चयन, उनपर हुए खर्च के नाम पर जिम्मेदारों द्वारा खेल करने का मामला प्रकाश में आया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने ‘सुपर 100’ खिलाड़ियों के लिए अपनाई गई चयन प्रक्रिया, उस मद में हुए खर्च और खिलाड़ियों के उपलब्धियों की जांच के लिए कमेटी गठित की है। प्रथम दृष्टया चयन से लेकर खर्च करने तक में गोलमाल सामने आया है।

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गोविवि के कार्य परिषद ने नवंबर 2020 में गुरु गोरखनाथ स्पोर्ट्स फेलोशिप के तहत ‘सुपर 100’ खिलाड़ियों के लिए पूरी व्यवस्था करने की मंजूरी दी थी। यह फेलोशिप किन खिलाड़ियों को दी जाएंगी, उन्हें क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी और चयन का आधार क्या होगा? इन सब का भी विस्तार से उल्लेख था। सत्र 2021-22 में इसकी शुरुआत हुई थी।
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पहले सत्र में कुल 25 छात्रों का चयन इस फेलोशिप के लिए किया गया था। उनमें से नौ छात्र बीच में ही छोड़कर चले गए। सत्र 2022-23 में कुल 10 छात्र चयनित हुए, उनमें से चार छोड़कर चले गए। इस तरह दो सत्रों के कुल 22 छात्र ही रह गए हैं।
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सुपर-100 के तहत चयनित छात्रों की फीस, छात्रावास, मेस सुविधा निशुल्क है। प्रति खिलाड़ी पर एक दिन भोजन के लिए 250 रुपया खर्च किए जाते हैं। उन्हें निशुल्क किट भी दी जाती है। चर्चा है कि इस पूरी योजना पर करीब एक करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए हैं। इसके बाद भी पिछले दो वर्षों में एक अंतर विश्वविद्यालय प्रतियोगिता में आठ सदस्यीय खोखो टीम ने सिर्फ कांस्य पदक जीता। अन्य खिलाड़ियों ने कहां-कहां प्रतिभाग किया, इसका भी कमेटी द्वारा रिकॉर्ड खोजा जा रहा है।

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योग के प्रशिक्षक दे रहे थे कोचिंग
इन खिलाड़ियों को प्रशिक्षण के लिए दो कोच रखे गए थे। एक कोच की विशेषज्ञता योग प्रशिक्षक की थी। दूसरे कोच एथलेटिक्स के थे। दोनों को अधिकतम 25 हजार रुपये मानदेय पर रखा गया था। इस योजना पर आउटकम के लिए एक खेल सलाहकार भी रखे गए थे। चर्चा है उन्हें प्रतिमाह 75 हजार रुपये मानदेय दिया जा रहा था।
 

तीन साल की मांगी गई रिपोर्ट

सूत्रों के मुताबिक कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच कमेटी गठित करते हुए तीन साल की रिपोर्ट मांगी है। खिलाड़ियों के ट्रायल के लिए अपनाई गई विधि, उपलब्धियां, कार्य, छात्रों की उपस्थिति और बजट को जांच के केेंद्र में रखा गया है।

ऐसे खुला मामला
सुपर-100 के तहत चयनित 22 खिलाड़ियों के लिए गेस्ट हाउस के मेस में भोजन की व्यवस्था की गई थी। तीन दिन पहले मेस से उनके लिए आवंटित रकम खत्म होने की जानकारी देकर भोजन देने से मना कर दिया गया। इसके बाद परेशान खिलाड़ी कुलपति से मिलने पहुंचे। तब यह मामला प्रकाश में आया।

गोविवि कुलसचिव प्रो. शांतनु रस्तोगी ने कहा कि सुपर-100 के तहत हुए चयन और खर्च की जांच के लिए समिति गठित की गई है। जांच चल रही है। आर्डिनेंस के हिसाब से वार्षिक मूल्यांकन होना चाहिए था। दो वर्षों से नहीं हुआ है। इस बार दोनों वर्ष का होगा।

 
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